जिओ हजारों साल
मनुष्य की उम्र 2000 साल !
क्या मजाक है ! नहीं ये मजाक नहीं है, दुनिया के बहुत से वैज्ञानिक मनुष्य की उम्र को बढ़ाने की इस घड़ी को कंट्रोल करने की कोशिस में लगे हैं.
मनुष्य या जीव बूढ़े कैसे होते हैं ?
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हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है; केवल कुछ मिनटों के लिए ऑक्सीजन से वंचित रहने से अपरिवर्तनीय क्षति और कोशिका मृत्यु भी हो सकती है। साथ ही ऑक्सीजन के कुछ रूप कोशिकाओं के लिए विषैले भी होते हैं और उम्र बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण मात्रा में कोशिकीय क्षति उत्पन्न कर सकते हैं. सामान्य भाषा में ऑक्सीकरण का प्रभाव हर तरह के पदार्थ और जीवों की रासायनिक गतिविधियों पर पड़ता है. क्योकी जीवों का शरीर भी एक तरह की संतुलित रासायनिक परिकिर्या है, इसमें थोड़ा भी रासायनिक बदलाव उसके संतुलन को या तो बिगाड़ देता है या धीरे धीरे नुक्सान करता रहता है, शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीकरण व अन्य कारणों से होने वाले नुक्सान को जब शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करने वाली क्षमता ( Regeneration या पुनःनिर्माण) कमजोर पड़ने लगती है तब धीरे -2 नई कोशिकाओं का निर्माण या तो कम होने लगता है या उसमें दोबारा जवान बनने की क्षमता घट जाती है, शरीर में होने वाले इन्ही बदलावों को सबसे पहले शरीर की बाहरी सुरक्षा (त्वचा) पर पड़ने लगता है साथ ही सबसे पहले बदलाव भी यहीं पर दिखाई पड़ते हैं, इसके साथ उम्र बढ़ने के दूसरे लक्षण भी सामने आने लगते हैं, जैसे ब्लड प्रेशर का सामान्य से अधिक रहना, बालों का सफ़ेद होना, आँखों का कमजोर होना या चश्में की जरूरत पड़ने लगना, पेट की समस्याओं का बढ़ जाना, जल्दी थक जाना आदि, इन्ही बदलावों को बुढ़ापे की शुरुआत कहते हैं. ये सभी कारण वैसे तो फिजिकल होते हैं, किन्तु इनके पीछे कारण शरीर में होने वाले रासायनिक बदलाव होते हैं.
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इसलिए अधिक समय तक कोशिकाओं के जवान बने रहने के कारण रोग संबंधी स्थितियों में मृत्यु दर में कमी और सामान्य आबादी में दीर्घायु होने के प्रभाव दिखने लगते हैं.
ये स्थिति चीन के मोनेको, जापान, स्पेन, इटली तथा फ़्रांस की जनसँख्या पर उनके लम्बे जीवन जो सामान्यतः 80-89 वर्ष तक की मिलती है.
इसके लिए यदि दूसरे जानवरों के ऑक्सीजन के कम प्रयाग से या प्रति मिनट कम साँस लेने से जीवन पर या उम्र पर उसके प्रभाव को देंखे तो कछुआ एक मिनट में सिर्फ 04 बार साँस लेता है, और जीवों में कछुवे की उम्र 400 साल तक हो सकती है. मनुष्यों में भी लम्बी उम्र के लिए योग द्वारा सांसो को नियंत्रित करने की परिकिर्या को या कम आक्सीजन का प्रयोग (योकिक क्रियाओं द्वारा) करने के आधार को माना जाता है.
किन्तु हम बात कर रहे है उम्र के हजारों साल के होने की, इस स्थिति को पाने के लिए विश्व के बहुत से वैज्ञानिक मनुष्यों के कोशिकाओं में समय के साथ होने वाले बदलावों की घड़ी को डीएनए में बदलाओं तक ले जा कर, समझना सीख रहे हैं व चूहों पर इसके बदलाव को लगातार प्रयोगो द्वारा नियंत्रण में लेने की कोशिस में लगे हैं. और इसकी तरफ हम चल भी पड़ें हैं.
मनुष्यों के डीएनए में कंप्यूटर के प्रोग्राम जैसे प्रोग्राम होते हैं जो मनुष्यों के शरीर में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करते हैं, साधारण भाषा में समझे तो मनुष्य या किसी भी जीव में शरीर की बनावट बदलाव मरम्मत का एक निश्चित समय होता है, यदि हम डीएनए में स्थित जिम्मेदार प्रोग्राम में बदलाव के समय को बदल दें तो मनुष्यों की उम्र हजारों वर्षों की बनाई जा सकती है. सैद्धांतिक रूप से इसको काफी हद तक समझ लिया गया है, किन्तु डीएनए में स्थित प्रोग्राम को प्रक्टिकली बदलने में अभी काम किया जा रहा है.
बहुत से लम्बा जीवन जीने वाले प्राणियों (हाथी,व्हेल, मनुष्य,) में एक जैसी बिमारियों के लक्षण आते हैं, किन्तु हर एक प्राणी उसको अलग अलग तरह से नियंत्रण में करते हैं जैसे कैंसर से प्रभावित सेल को नियंत्रण में लाने के लिए जो मॉलिक्यूलर ट्रिक बोहेड शार्क अपनाती है वह दूसरे जीवों से बेहतर काम करती है. वह अपने डीएनए स्तर पर कोशिकाओं की मरम्मत अच्छे से कर पाती है.
डीएनए में मौजूद P 53 gene इस काम को करने के लिए जिम्मेदार होता है. और भी जीन हैं जिनको टारगेट कर के देखा जा रहा है.
JOAO के अनुसार एजिंग या बूढ़ा होने की रफ़्तार या गति को धीमा किया जा सकता है और यदि एक बार इसमें सफलता मिल गई तो इसे लम्बे समय तक (सालों ) तक रोका भी जा सकेगा
सैद्धांतिक रूप से यह संभव है, बस इसको प्रेक्टिकली करने में अभी समय लगेगा।





