एजुकेशन और एडमिशन
संविधान किसी भी देश का मूल कानून (Supreme Law) होता है, जो यह बताता है कि—
-
देश कैसे चलेगा,
-
सरकार की संरचना कैसी होगी,
-
नागरिकों के अधिकार, कर्तव्य और दायरे क्या होंगे।
संविधान की सरल परिभाषा
👉 संविधान वह लिखित दस्तावेज है, जिसमें राज्य के सभी राजनीतिक संस्थानों की शक्तियाँ, कार्य और सीमाएँ
निर्धारित होती हैं तथा नागरिकों के अधिकार व कर्तव्य स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं।
हमें संविधान की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
-ताकि सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण रहे।
-नागरिकों की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे।
-अल्पसंख्यकों, कमजोर वर्गों के अधिकार सुरक्षित रहें।
-शासन में मनमानी न हो।
-देश में एक व्यवस्था, न्याय, समानता और स्वतंत्रता
-देश कैसे चलेगा,
-सरकार की शक्तियाँ क्या होंगी,-नागरिकों के अधिकार, स्वतंत्रताएँ और कर्तव्य क्या होंगे,
-न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में संतुलन कैसे रहेगा।
भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसे 26 नवंबर 1949 को अपनाया
गया और 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया, जिस दिन भारत एक गणतंत्र बना।
संविधान की सरल परिभाषा
👉 संविधान वह लिखित दस्तावेज है, जिसमें राज्य के सभी राजनीतिक संस्थानों की शक्तियाँ, कार्य और सीमाएँ
निर्धारित होती हैं तथा नागरिकों के अधिकार व कर्तव्य स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं।
संविधान की आवश्यकता
-ताकि सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण रहे।
-नागरिकों की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे।-अल्पसंख्यकों, कमजोर वर्गों के अधिकार सुरक्षित रहें।
-शासन में मनमानी न हो।
-देश में एक व्यवस्था, न्याय, समानता और स्वतंत्रता बनी रहे।
भारतीय संविधान की विशेषताएँ
(Key Features of Indian Constitution)
1. लिखित एवं विस्तृत संविधान
भारतीय संविधान दुनिया के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।
2. संघीय ढांचा, परंतु एकात्मक झुकाव
भारत एक संघ (Union of States) है, परंतु केंद्र सरकार मजबूत है।
3. संसदीय शासन प्रणाली
प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है। भारत में यह प्रणाली ब्रिटेन से ली गई है।
4. धर्मनिरपेक्षता (Secularism)
राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं, सभी धर्म समान।
5. न्यायपालिका की स्वतंत्रता
सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह स्वतंत्र है, ताकि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सके।
6. मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का समावेश
संविधान नागरिकों को अधिकार भी देता है और कर्तव्य भी बताता है।
संविधान नागरिकों को छह मुख्य अधिकार देता है, जिन्हें अदालत में लागू कराया जा सकता है।
मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
नागरिकों की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियाँ।
मौलिक अधिकार
(Fundamental Rights)
भारत के संविधान में 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं (अनुच्छेद 12–35)।
1. समानता का अधिकार (Right to Equality) – अनु. 14–18
-कानून की नजर में सभी बराबर।
-धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं।
-अस्पृश्यता (Untouchability) का अंत।
-पदों पर समान अवसर।
2. स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) – अनु. 19–22
अनुच्छेद 19 नागरिकों को छह स्वतंत्रताएँ देता है—
-
वक्तव्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
-
शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता
-
संगठन/संघ बनाने की स्वतंत्रता
-
देश में घूमने की स्वतंत्रता
-
कहीं भी रहने-बसने की स्वतंत्रता
-
किसी भी पेशे/व्यवसाय को अपनाने की स्वतंत्रता
साथ ही इसमें—
-अपराध न करने पर गिरफ्तारी से सुरक्षा (आर्टिकल 20)-जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा (आर्टिकल 21)
-अवैध हिरासत से सुरक्षा (आर्टिकल 22)
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation) – अनु. 23–24
-मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी निषिद्ध।-14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से खतरनाक उद्योगों में काम करवाना अपराध।
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
(Right to Freedom of Religion) – अनु. 25–28
-धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।-धार्मिक संस्थाओं को प्रबंधित करने का अधिकार।
5. सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार
(Cultural & Educational Rights) – अनु. 29–30
-अपनी संस्कृति, भाषा और लिपि को संरक्षित करने का अधिकार।-अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान खोलने का अधिकार।
6. संवैधानिक उपचार का अधिकार
(Right to Constitutional Remedies) – अनु. 32
-अगर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो, तो नागरिक सुप्रीम कोर्ट / हाई कोर्ट में रिट दायर कर सकता है।
-पाँच प्रकार की रिट: हेबियस कॉर्पस, मेंडेमस, सर्टियोरेरी, क्वो-वॉरंटो, प्रोहिबिशन।
भारतीय नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्य हैं (42वें व 86वें संशोधन द्वारा जोड़े गए)—
-
संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना
-
आज़ादी की रक्षा करना
-
भारत की एकता व अखंडता बनाए रखना
-
देश की रक्षा करना और सेवा करना
-
सभी धर्मों का सम्मान करना
-
वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना
-
महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए काम करना
-
पर्यावरण, जंगल और झीलों की रक्षा
-
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा
-
उत्कृष्टता के लिए प्रयास करना
-
(86वां संशोधन) — 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाना
-कानून का पालन करना चाहिए
-मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेना चाहिए
-कर (टैक्स) ईमानदारी से देना चाहिए
-समाज व राष्ट्रहित के कार्यों में सहयोग देना चाहिए
-सामूहिकता, सहिष्णुता और भाईचारा बढ़ाना चाहिए
मौलिक कर्तव्यों की सूची (सार रूप में)
-
संविधान का पालन करना
-
स्वतंत्रता एवं अखंडता की रक्षा
-
देश की रक्षा करना
-
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा
-
राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान
-
पर्यावरण संरक्षण
-
वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना
-
महिलाओं का सम्मान
-
सांस्कृतिक विरासत की रक्षा
-
निरंतर शिक्षा का प्रयास
-
माता-पिता/अभिभावक का दायित्व (6 से 14 वर्ष बच्चों को शिक्षा दिलाना)





