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नेपाल में अचानक आई सुनामी बाढ़ की तबाही, 

95 की मौत; सैकड़ों लोग अब भी लापता




NB7- दिल्ली :- नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई अचानक फ्लैश फ्लड ने हिमालयी सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उफान ने गांवों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। CCTV में दिख रहे भागते लोग -सुनामी में गायब हो गए।  

ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल और तिब्बत क्षेत्र को मिलाकर मृतकों की संख्या करीब 98 बताई जा रही है। लेकिन यह शुरुआती आंकड़े हैं, इनमें अभी और समाचार आने बाकि हैं, हो सकता है ये सख्या जितना बताया जा रहा है उससे कहीं अधिक हो।  

लगभग 750 लोग लापता हैं जिनमें हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम करने गए भारतीय भी शामिल हैं, लगभग 144 भारतियों के लापता होने की खबर है।  


कुछ ही मिनटों में आया विनाशकारी सुनामी सैलाब

सूत्रों के अनुसार  नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक बड़े पैमाने पर मलबा, चट्टान और बर्फ नदी में गिरने से पानी का बहाव बेहद तेजी से बढ़ गया। शुरुआती रिपोर्टों में 4.4 तीव्रता के भूकंप के बाद हुए भूस्खलन को संभावित कारणों में शामिल किया गया है, जबकि कुछ आकलन ग्लेशियर या बर्फ के अचानक टूटने की ओर भी इशारा कर रहे हैं। घटना की सटीक वजह की जांच अभी जारी है।

सड़क, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं बर्बाद

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में दिखाई दिया है। पानी के तेज बहाव में वाहन, मकान और दूसरी संपत्तियां कुछ नहीं छोड़ा, सब बह गईं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है तथा कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।


पर्यटक और विदेशी नागरिक भी लापता

इस आपदा ने पर्यटकों और विदेशी नागरिकों को भी प्रभावित किया है। सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। कुछ लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा और नेपाल के धार्मिक पर्यटन मार्गों से जुड़े हुए थे। भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। लेकिन कई सड़कें और पुल टूट जाने के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

हिमालयी क्षेत्र के लिए फिर बड़ी चेतावनी :-

नेपाल में हुई यह घटना केवल बाढ़ नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक जोखिम की एक गंभीर चेतावनी भी है। विशेषज्ञ लंबे समय से ग्लेशियरों के पिघलने, ग्लेशियल झीलों, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। ऐसे इलाकों में समय रहते चेतावनी देने वाली व्यवस्था और मजबूत करना बेहद जरूरी है।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले 59 भारतीय भी अभी तक लापता बताये जा रहे हैं, किन्तु इसकी पुष्टि अभी तिब्बत (चीन) से होनी बाकि है।  

बरसात के मौसम में पहाड़ों पर धार्मिक यात्रा करना कभी खतरे से खाली नहीं होता, बरसात के मौसम में में हर वर्ष इस तरह के बाढ़ भूस्खलन एक्सीडेंट के समाचार आम होते हैं, ऐसे मौसम में घर पर रहना ही सुरक्षित।   

नेपाल में क्यों आयी सुनामी जैसी बाढ़ ?


इसमें जलवायु परिवर्तन की भूमिका ? या ये तो केदारनाथ की तरह होना ही था !

यह एक दिन की घटना नहीं थी इसके पीछे बढ़ता मानवीय अतिक्रमण-कंस्ट्रक्शन-जनसख्याँ ,

तापमान और तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और भूस्खलन हैं।  

हिमालय तेजी से गर्म हो रहा है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियर अचानक पिघल रहे हैं, बर्फ और चट्टानों की संरचना कमजोर हो रही है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अस्थिर बर्फ-मलबे तथा ग्लेशियल झीलों का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए जलवायु परिवर्तन को इस तरह की घटनाओं का जोखिम बढ़ाने वाला कारक माना जा रहा है—हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन कहना भी सही नहीं होगा, 

यह भी एक हिमालय में होने वाली एक और प्राकृतिक घटना है, बस इस बार इसका स्वरुप विकराल था।  हाँ, मनुष्यों की बढ़ती जनसख्या और उनके लिए बनती इमारतें, सड़क, पुल इन घटनाओं के रास्ते में आ जाती हैं, तब तबाही निश्चित हो जाती है। 

 “ग्लेशियर टूटा → नदी रुकी → पानी  के साथ मलबा, नदी की गाद जमा हुआ → बांध टूटा → नेपाल में सुनामी जैसी लहर” 

न्यूज़बेल7 अपडेट: नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान जारी है और मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या बदल सकती है। आधिकारिक आंकड़ों के अपडेट के साथ इस खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है ।

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जयपुर में CJP की टीम पर जानलेवा हमला: 




शिक्षा का सच दिखाने पहुंचे आशुतोष रांका और कार्यकर्ताओं के साथ 

मारपीट, गाड़ियां फोड़ीं-

जयपुर (newsbell7.in न्यूज़ डेस्क):

राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। शिक्षा व्यवस्था की 

जमीनी हकीकत का जायजा लेने और सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने पहुंचे कॉकरोच 

जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनकी टीम पर जानलेवा हमला कर 

दिया गया।

CJP का आरोप है कि बगड़ी विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित प्राथमिक विद्यालय (जो 

पिछले काफी समय से तबेले में चलने को मजबूर है) का निरीक्षण करने पहुंची टीम पर सत्तारूढ़ पार्टी 

से जुड़े गुंडों ने हमला बोला। इस हमले में CJP के कई कार्यकर्ताओं के हाथ-पैर टूट गए हैं, महिलाओं 

के साथ हाथापाई की गई, फोन तोड़े गए और गाड़ियों के शीशे फोड़ दिए गए।


'पुलिस के सामने होती रही गुंडागर्दी, मूकदर्शक बनी रही सरकार'

घटना के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल की बदहाली छुपाने के 

लिए सत्ताधारी दल के गुंडों को पहले से वहां तैनात किया गया था। 

उन्होंने कहा, "हम बच्चों के लिए बेहतर स्कूल और बुनियादी सुविधाएं मांगने आए थे। लेकिन वहां 

मौजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमारे कार्यकर्ताओं पर पत्थरों और लाठियों से हमला किया। 

पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बना रहा। यह राजस्थान के लोकतंत्र 

में एक काला दिन है।"


अभिजीत दीपके का तीखा हमला: 48 घंटे का अल्टीमेटम

इस घटना पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर राजस्थान सरकार और राज्य पुलिस पर जमकर निशाना साधा। दीपके ने सवाल उठाया कि जब बच्चे तबेले में पढ़ने को मजबूर हैं, तो स्कूल की जांच करने से किसे डर लग रहा है?

अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन को सीधा 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है:

  1. हमलावरों की तुरंत गिरफ्तारी: CJP कार्यकर्ताओं पर हमला करने वाले और गाड़ियां तोड़ने 

  2. वाले सभी आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए।

  3. स्कूल की मरम्मत शुरू हो: तबेले में चल रहे स्कूल की इमारत के तुरंत निर्माण और मरम्मत का काम शुरू किया जाए।

दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वह खुद जयपुर 

पहुंचकर सड़कों पर उतरेंगे और राज्य सरकार के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन का रुख

दूसरी ओर, घटना के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिसे लेकर युवाओं और कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।


झारखंड भर्ती विवाद: JPSC के बाद अब TDPL की पुरानी 

परीक्षाएं भी जांच के दायरे में लाने की मांग



रांची | NewsBell7: झारखंड में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब आंदोलन कर रहे छात्रों ने सिर्फ इस परीक्षा को रद्द करने की मांग नहीं की है, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली निजी कंपनी TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) द्वारा पहले कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं की भी जांच कराने की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि अगर एक ही एजेंसी की परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो उसी एजेंसी द्वारा पहले आयोजित परीक्षाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे यह साफ हो सकेगा कि कहीं पहले की भर्तियों में भी गड़बड़ी तो नहीं हुई।

अभय तिवारी कौन है?और क्या हैं आरोप ?

एक के बाद एक सरकारी नौकरी, अब जांच के घेरे में अभय तिवारी! 

झारखंड भर्ती विवाद में बड़ा खुलासा-

अभय तिवारी कौन हैं?

झारखंड में JPSC–JSSC भर्ती अनियमितता मामले की जांच के दौरान सबसे अधिक चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह अभय कुमार तिवारी (उर्फ मनोज कुमार तिवारी) का है। CID ने उन्हें इस मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल किया है। हालांकि, उनके खिलाफ लगे सभी आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

अभय तिवारी के बारे में अब तक क्या जानकारी सामने आई है?

वे कथित तौर पर TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि थे। इसी कंपनी को 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा मिला था।

दूसरी ओर, वे झारखंड सरकार में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) के पद पर भी कार्यरत बताए गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि दोनों भूमिकाएं कैसे निभाई जा रही थीं।

CID के अनुसार, अभय तिवारी ने पिछले लगभग 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। इनमें JPSC, JSSC, पुलिस, CRPF, भारतीय नौसेना, BARC और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल बताई गई हैं।

अब इन सभी परीक्षाओं की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि उनके भाई और भाभी (या पत्नी, विभिन्न रिपोर्टों में अलग-अलग उल्लेख) को सरकारी नौकरी मिलने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं। अभी इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।

उन पर क्या आरोप हैं?

CID की FIR के अनुसार अभय तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े संगठित नेटवर्क में भूमिका निभाई। उन पर परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर, जालसाजी, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसी धाराओं के तहत जांच चल रही है। इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत द्वारा नहीं हुई है।


देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में आंदोलन

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो रांची में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द नहीं की जाती और TDPL द्वारा आयोजित सभी विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मांग है कि पूरे भर्ती तंत्र को पारदर्शी बनाया जाए ताकि युवाओं का विश्वास दोबारा कायम हो सके।

छात्रों की मुख्य मांगें

-14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
-TDPL द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
-दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई-

इस मामले में CID जांच जारी है। कई स्थानों पर छापेमारी की गई है, कई गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि केवल गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं, बल्कि यदि भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई है तो परीक्षाओं की वैधता पर भी फैसला होना चाहिए।

यह मामला केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती व्यवस्था पर भरोसे का है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी होगी। वहीं दूसरी ओर, किसी भी व्यक्ति पर लगे आरोपों को अंतिम सत्य तभी माना जा सकता है जब जांच पूरी हो जाए और न्यायिक प्रक्रिया अपना निष्कर्ष दे।


सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 से 

फायरिंग: 




पुलिसकर्मी निलंबित, न्यायिक जांच की मांग तेज

NB7 दिल्ली :-बिहार के सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 राइफल से 

फायरिंग किए जाने का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर 

वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ते हुए AK-47 से कई राउंड हवाई फायर 

करता दिखाई देता है। घटना के बाद बिहार पुलिस ने संबंधित कांस्टेबल को तत्काल निलंबित कर 

विभागीय जांच शुरू कर दी है।

सिवान बिहार में क्या हुआ था?

25 जुलाई को बिहार बंद और छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान सिवान में पुलिस और प्रदर्शनकारियों 

के बीच झड़प हुई। पुलिस ने पहले लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसी दौरान एक 

पुलिसकर्मी ने AK-47 से फायरिंग कर दी, जिसका वीडियो वायरल हो गया। पुलिस अधिकारियों के 

अनुसार संबंधित जवान को ऐसी स्थिति में हथियार चलाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था।

क्या कोई घायल हुआ?

घटना को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं।

-बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि वीडियो में दिखाई गई AK-47 की हवाई फायरिंग 

से किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।

-वहीं कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि गोलीबारी की घटनाओं में तीन छात्र घायल हुए, 

जिनमें एक किशोर भी शामिल है। इन घायलों की परिस्थितियों और गोली किस फायरिंग से लगी, 

इसकी जांच जारी है।

पुलिस का आधिकारिक बयान:

बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि:

-AK-47 का इस्तेमाल "पूरी तरह अनुचित" था।

-संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है।

-उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

-जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि फायरिंग का कोई आदेश नहीं दिया गया था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

विपक्षी नेताओं ने पूछा कि छात्रों के प्रदर्शन में AK-47 जैसी सैन्य श्रेणी की राइफल का इस्तेमाल 

किसके आदेश पर हुआ।

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल 

कांस्टेबल को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आदेश देने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही 

तय होनी चाहिए।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि:

यह प्रदर्शन कथित NEET पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं तथा युवाओं से जुड़े अन्य 

मुद्दों को लेकर चल रहे व्यापक छात्र आंदोलन का हिस्सा था। हाल के दिनों में इन आंदोलनों ने राष्ट्रीय 

राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।

अब आगे क्या?

-संबंधित पुलिसकर्मी निलंबित है।

-विभागीय जांच जारी है।

-घटना को लेकर न्यायिक जांच की मांग उठ रही है।

-वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है कि फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई और 

घायल होने की घटनाओं का उससे क्या संबंध है।


विदेशी मीडिया की नज़र में दिल्ली छात्र आंदोलन: 

क्या लिखा ?




NB7-नई दिल्ली: सोमवार को दिल्ली में हुए छात्रों के प्रदर्शन ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया 

के कई बड़े मीडिया संस्थानों का भी ध्यान खींचा। यह प्रदर्शन कथित NEET पेपर लीक, शिक्षा 

व्यवस्था में भ्रष्टाचार और छात्रों की आत्महत्या के मामलों को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शन 

के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया की प्रमुख 

सुर्खियाँ बनीं।


रॉयटर्स (Reuters) ने क्या लिखा?

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह आंदोलन युवाओं की शिक्षा 

व्यवस्था से जुड़ी नाराज़गी का प्रतीक बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के 

इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग की।

रॉयटर्स ने यह भी बताया कि संसद की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज 

और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों 

सहित कई लोग घायल हुए तथा दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया। साथ ही, आंदोलन के नेताओं 

ने आगे के मार्च रोकने की घोषणा की ताकि और लोग घायल न हों।


द गार्जियन (The Guardian) की रिपोर्ट

The Guardian ने इस आंदोलन को भारत के युवाओं के बढ़ते असंतोष से जोड़ते हुए लिखा कि 

इसकी शुरुआत सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन अब यह शिक्षा व्यवस्था में सुधार 

और जवाबदेही की मांग करने वाला बड़ा जनआंदोलन बन चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया कि आंदोलन का मुख्य मुद्दा NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियां और उससे 

जुड़े छात्रों का भविष्य है। अख़बार ने यह भी लिखा कि प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल, इंटरनेट 

प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी।


प्रदर्शनकारियों की मांगें:

विदेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें थीं:

-NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच।

-परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।

-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।

-शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।

-कथित पेपर लीक से जुड़े छात्र आत्महत्या मामलों में न्याय और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा।


सरकार और पुलिस का पक्ष:

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष भी प्रकाशित किया है। पुलिस का कहना है 

कि कुछ प्रदर्शनकारी सुरक्षा बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जिसके बाद भीड़ को 

नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। पुलिस ने यह भी कहा कि इस दौरान उनके कई जवान भी 

घायल हुए।


जबकि प्रोटेस्ट शांतिपूर्ण था ?

प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज और हिंसा की पहल पुलिस की और से देखी गयी।  

विदेशी मीडिया की अधिकांश रिपोर्टों में इस आंदोलन को भारत की शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के 

भविष्य और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। साथ ही, इन रिपोर्टों में 

प्रदर्शनकारियों के आरोपों और सरकार तथा पुलिस के आधिकारिक पक्ष—दोनों को शामिल किया 

गया है। इस घटना ने भारत की शिक्षा प्रणाली और लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन के तरीकों पर वैश्विक 

स्तर पर चर्चा को तेज़ कर दिया है।


राम मंदिर चंदा विवाद में जांच तेज, कई नए घटनाक्रम ने बढ़ाए 

सवाल





NB7-अयोध्या/नई दिल्ली, 

आज (12 जुलाई 2026) की प्रमुख अपडेट 

अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं की जांच अब नए चरण 

में पहुंच गई है। पिछले कुछ दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे मामले की 

गंभीरता और बढ़ गई है। हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

1. राम मंदिर चंदा चोरी मामला

-एसआईटी की जांच जारी है और कथित चंदा गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ आगे 

बढ़ रही है।

-जांच के दौरान पुलिस लगभग 50 बैंक खातों की जांच कर रही है, जो आरोपियों और उनके 

रिश्तेदारों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

-पुलिस ने नकदी, आभूषण और एक कार भी बरामद करने का दावा किया है।

-इस बीच, आरएसएस ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस मामले पर दुख व्यक्त करते हुए कहा है

 कि उसे एसआईटी और पुलिस की जांच पर भरोसा है तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

-राम मंदिर ट्रस्ट ने भी कथित चोरी के बाद दान गिनने की नई व्यवस्था लागू की है। अब QR आधारित 

पहचान, कड़ी निगरानी और नए सुरक्षा नियम लागू किए जा रहे हैं।




भारत का विदेशी मुद्रा खर्च (FY2025 अनुमान)


भारत के विदेशी मुद्रा खर्च की ताज़ा स्थिति :

आयात/खर्च का क्षेत्रअनुमानित वार्षिक खर्च
(अरब डॉलर)
कुल आयात खर्च में हिस्सामुख्य कारण
कच्चा पेट्रोलियम तेल137 अरब डॉलर~33%
पेट्रोल, डीजल, LPG, उद्योग
सोना आयात47 अरब डॉलर~11
निवेश, शादी-ब्याह, ज्वेलरी
इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल92 अरब डॉलर~22%मोबाइल, चिप्स, कंप्यूटर
मशीनरी व औद्योगिक उपकरण58 अरब डॉलर~14%फैक्ट्री, इंफ्रास्ट्रक्चर
रसायन व उर्वरक32 अरब डॉलर~8%खेती और उद्योग
खाद्य तेल (पाम/सोया आदि)19 अरब डॉलर~5%घरेलू मांग
कोयला व गैस28 अरब डॉलर~7%बिजली उत्पादन

Hindi News Paper Today:



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