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India AI Summit 2026- 

AI Summit 2026:  क्या खोया- क्या पाया ? 



दिल्ली ट्रैफिक जाम, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स चोरी, अफरातफरी , PM के लिए प्रतिभागियों को 

हाल से बाहर खड़े करना, फोटो सेशन, जगह जगह AI के बजाय PM के बड़े बड़े पोस्टर  से 

लेकर चीनी रोबोट विवाद और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन तक पूरी पड़ताल

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट | NewsBell7

AI Summit 2026 को भारत के लिए “टेक्नोलॉजी का महाकुंभ” बताया गया। राजधानी दिल्ली में आयोजित इस बड़े आयोजन में दुनिया भर के टेक लीडर्स, स्टार्टअप, निवेशक और नीति निर्माता शामिल हुए। सरकार ने इसे भारत के “AI महाशक्ति” बनने की दिशा में बड़ा कदम बताया। लेकिन सवाल भी कम नहीं उठे — दिल्ली में भीषण ट्रैफिक जाम, गलगोटियास यूनिवर्सिटी के कथित चीनी रोबोट डॉग विवाद, प्रधानमंत्री की फोटो-सेशन राजनीति, और कांग्रेस का प्रदर्शन…

तो आखिर AI Summit 2026 में भारत को क्या मिला और क्या खोया? आइए विस्तार से समझते हैं


AI Summit 2026 क्या था? 

AI Summit 2026 भारत सरकार की पहल पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े स्टार्टअप, रिसर्च संस्थान और वैश्विक टेक कंपनियों ने हिस्सा लिया। आयोजन को नीति आयोग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सहयोग से आगे बढ़ाया गया।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उद्घाटन सत्र में कहा —

AI भारत के युवाओं के लिए अवसरों का नया द्वार खोलेगा।”

सरकार का दावा था कि इस समिट के जरिए भारत को अरबों डॉलर के निवेश, रिसर्च सहयोग और 

ग्लोबल टेक पार्टनरशिप मिलेगी।


दिल्ली ट्रैफिक कंजेशन: टेक्नोलॉजी समिट, लेकिन सड़कों पर अफरा-तफरी

AI Summit का आयोजन दिल्ली के प्रमुख कन्वेंशन सेंटर में हुआ। लेकिन इस दौरान राजधानी की 

सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, समिट के दौरान कई रूट डायवर्जन किए गए। ऑफिस जाने वाले 

लोग घंटों जाम में फंसे रहे। सोशल मीडिया पर #DelhiTraffic ट्रेंड करने लगा।

लोगों का सवाल था —

“जब AI की बात हो रही है, तो ट्रैफिक मैनेजमेंट में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का ध्यान क्यों नहीं रखा 

गया, AI या लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के लिए मैन्युफैक्चरिंग के लिए क्या भारत वास्तव में तैयार है ?"

यह आयोजन जहां भारत की टेक क्षमता दिखाने का मंच था, वहीं दिल्ली की ट्रैफिक अव्यवस्था ने 

प्रशासन की तैयारी पर ही सवाल खड़े कर दिए । 

इस आयोजन को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे गावों कस्बों में जहां सुविधाओं की कमी होती है और 

किसी की शादी हो रही हो तो "फेरों" में पता चलता है की फेरों की मालाएं तो लाये ही नहीं । 


गलगोटियास यूनिवर्सिटी का चीनी रोबोट डॉग विवाद: 

मेड इन इंडिया या मेड इन चाइना?


AI Summit में गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने एक “AI रोबोट डॉग” पेश किया। दावा किया गया कि यह 

350 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का हिस्सा है और पूरी तरह भारतीय तकनीक से बना है।

लेकिन जैसे ही ये खबर लाइव हुई टेक एक्सपर्ट ने इसे लपक लिया और हंगामा मच गया, क्योंकि इस 

डॉग को लोग काफी समय से इंटरनेट पर देख रहे थे सब जानते थे की ये प्रोडक्ट तो काफी पहले चीन 

की कंपनी ने बेचना भी शुरू कर दिया था।  चीन से भी किसी ने इस प्रोडक्ट को प्रोडक्ट की फोटो के 

साथ शेयर कर दिया और हंसी भी उडा दी।  

यहां चीन की कंपनी Unitree Robotics का नाम सामने आया। सोशल मीडिया पर तुलना की गई कि 

रोबोट का डिजाइन और फीचर उसी कंपनी के मॉडल से मिलते-जुलते हैं।

गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनका प्रोडक्ट “इंडिजिनस 

इनोवेशन” है बता दिया था और चोरी पकड़ी जाने पर भी बार बार झूठ बोलते रहे की हमने ऐसा नहीं 

कहा, जबकि सबकुछ कैमरे पर मौजूद था।  किन्तु आयोजकों ने गलगोटिया से हाल खाली करवा 

लिया।  किन्तु इन सब ख़बरों के चलते भारत में हो रही AI समिट ली विश्वसनीयता पर दाग लग गया।  

लेकिन यह विवाद भारत की टेक विश्वसनीयता पर असर डालने वाला मुद्दा बन गया।


मोदी फोटो सेशन और हैंडशेक डिप्लोमेसी

AI Summit 2026 में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कई वैश्विक टेक सीईओ से मुलाकात की। मंच 

पर हैंडशेक, ग्रुप फोटो और स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ बातचीत की तस्वीरें हुईं।

सरकार ने इसे “टेक डिप्लोमेसी” बताया।

आलोचकों ने कहा कि समिट से ज्यादा “फोटो-सेशन ” बनकर रह गया, जबकि ठोस नीति घोषणाएं 
सीमित रहीं।

समर्थकों का तर्क है कि वैश्विक मंच पर भारत की छवि मजबूत करना भी बड़ी उपलब्धि है।


कांग्रेस का प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव


AI Summit के बाहर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि:

-बेरोजगारी पर कोई ठोस योजना नहीं

-AI से नौकरियां जाएंगी, नई नौकरियां कैसे आएंगी?

-समिट सिर्फ “इवेंट मैनेजमेंट” है


कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार AI के नाम पर “कॉरपोरेट फ्रेंडली एजेंडा” चला रही है।

विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि क्या AI नीति में डेटा प्राइवेसी और आम नागरिक की सुरक्षा का 

ध्यान रखा गया है?


भारत को क्या मिला?

अब बात करते हैं सकारात्मक पक्ष की।

1. विदेशी निवेश के आश्वासन

सरकार के अनुसार, कई वैश्विक कंपनियों ने भारत में AI रिसर्च सेंटर खोलने में रुचि दिखाई।

2. स्टार्टअप को मंच

भारत के कई स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने अपना प्रोडक्ट दिखाने का मौका मिला।

3. ग्लोबल पोजिशनिंग

AI के क्षेत्र में भारत को एक गंभीर खिलाड़ी के रूप में पेश किया गया।

4. स्किल डेवलपमेंट

AI और मशीन लर्निंग में स्किलिंग प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की गई।


भारत को क्या नुकसान हुआ?

1. विश्वसनीयता पर सवाल

गलगोटियास विवाद ने “मेड इन इंडिया” दावों पर संदेह पैदा किया।

2. ट्रैफिक और अव्यवस्था

दिल्ली में आम जनता को भारी असुविधा हुई। साथ ही विदेशी मेहमानों को भारत की प्रदूषित 

वातावरण का भी अहसास हो गया।  

3. राजनीतिक ध्रुवीकरण

समिट टेक्नोलॉजी की जगह राजनीति का मुद्दा बन गया।

4. रोजगार चिंता

AI से नौकरी जाने का डर आम युवाओं में बढ़ा है। AI से रोजगार को खतरे में डालने वाला डर बेवजह 

नहीं है।  सबको पता है AI से फायदा सिर्फ कुछ लोगों को होगा, ज्यादातर या यूँ कहो 70% जॉब 

खतरे में पड़ने वाले हैं और वह भी बिना प्रोडक्शन या सर्विस सेक्टर की सेवाएं कम किये बिना, यानी 

बिज़नेस हॉउस को तो फायदा होगा किन्तु निचले पायदान पर मौजूद कर्मचारी की नौकरी निश्चित 

खतरे मैं है।     


AI और रोजगार: डर या अवसर?

विशेषज्ञों का मानना है कि AI कुछ पारंपरिक नौकरियां खत्म करेगा, लेकिन नई नौकरियां भी पैदा 

करेगा।

-भारत के लिए चुनौती है:

-युवाओं को AI स्किल देना

-रिसर्च में निवेश बढ़ाना

-डेटा सुरक्षा कानून मजबूत करना

अगर ये कदम नहीं उठाए गए, तो AI सिर्फ बड़े कॉरपोरेट के लिए फायदेमंद होगा।




IND vs PAK: भारत की ऐतिहासिक जीत से गूंजा स्टेडियम, हार के 

बाद पाकिस्तान में फूटा गुस्सा, टीवी तोड़ने के वीडियो वायरल


भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं का टकराव होता है। एक बार फिर जब मैदान में आमने-सामने थीं टीम इंडिया और पाकिस्तान, तो रोमांच, दबाव और जुनून अपने चरम पर था। लेकिन मैच खत्म होते-होते माहौल पूरी तरह बदल चुका था। भारत की शानदार जीत ने जहां देशभर में जश्न का माहौल बना दिया, वहीं पाकिस्तान में हार के बाद गुस्से की लहर देखने को मिली।

भारत ने पाकिस्तान को 15 फरवरी 2026 को टी20 वर्ल्ड कप में 61 रनों से हराया — ईशान 

किशन के तूफानी प्रदर्शन से इंडिया ने धुलाई!

कोलंबो, श्रीलंका (15 फरवरी 2026) — ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप 2026 के कड़े मुकाबलों में भारत 

और पाकिस्तान के बीच ग्रुप A का हाई-वोल्टेज मैच कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गया। 

टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के इस मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 61 रनों से करारी 

हार दी और सुपर 8 चरण के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है। यह मैच क्रिकेट फैन्स के लिए एक 

बार फिर यादगार बन चुका है।


मैच का पूरा नज़ारा: भारत का डोमिनेशन

भारत को टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी का मौका मिला और भारतीय पारी की शुरुआत थोड़ी अस्थिर रही। हालांकि बाद में बल्लेबाजों ने गति पकड़ ली और साझेदारियों ने 175/7 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इस विशाल स्कोर की राह में सबसे बड़ा रोल निभाया Ishan Kishan ने।

इशान किशन का धमाकेदार खेल

— 40 गेंदों में 77 रन की धुंआधार पारी खेली, जिसमें 10 चौके और 3 छक्के शामिल थे।
उनकी इनिंग ने न सिर्फ पावरप्ले के बाद गति बढ़ाई, बल्कि विकेट हाथ में होने पर भी स्कोर को सामर्थ्य प्रदान किया। उन्होंने स्पिन और पेस दोनों परिस्थितियों में पाकिस्तान के गेंदबाज़ों को अपनी बल्लेबाज़ी की कड़ी के रूप में जवाब दिया।

सूर्यकुमार यादव ने भी 32 रन की उपयोगी पारी खेली, लेकिन इशान की पारी ही मैच का टर्निंग पॉइंट रही।


पाकिस्तान का संघर्ष और भारतीय गेंदबाज़ों की धार

पाकिस्तान को लक्ष्य का पीछा करते हुए 176 रनों का लक्ष्य मिला, लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने पाकिस्तान की टीम को 100 के आसपास बांध कर रख दिया और पूरी पाकिस्तान टीम सिर्फ 114 रन ही बना पाई और 18 ओवर में आउट हो गई।

भारतीय गेंदबाज़ों ने शानदार संयम से विकेट प्राप्त किए, जिससे पाकिस्तान का पीछा कभी भी स्थिर नहीं हो पाया।

इस शानदार जीत के साथ भारत ने अपने टी20 वर्ल्ड कप रिकॉर्ड में पाकिस्तान के खिलाफ जीत को 8-1 तक बढ़ा दिया है।


 मुकाबले के अहम मोमेंट्स

📌 टॉस: पाकिस्तान ने पहले फील्डिंग चुनी

📌 भारतीय स्कोर: 175/7 (20 ओवर)

📌 पाकिस्तान स्कोर: 114 (18 ओवर)

📌 जीत का अंतर: भारत ने 61 रन से मैच अपने नाम किया

📌 प्लेयर ऑफ द मैच: इशान किशन (77) — उनके बल्ले से मैच का सर्वोत्तम स्पर्श आया जिसे 

भारत की बड़ी जीत में बदल दिया गया।


भारत की तैयारी और टीम भावना:

भारत ने अपनी टी20 वर्ल्ड कप यात्रा में अब तक स्थिरता और आत्मविश्वास दिखाया है। सनकदार पिच पर पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम को बड़ी हार देना यह दर्शाता है कि भारतीय टीम ने हर विभाग में रणनीति के साथ खेला। स्पिन, पेस और बीच के ओवरों में संयम — सभी क्षेत्रों में टीम इंडिया कंप्लीट दिखाई दी।

इशान किशन ने कप्तान और टीम मैनेजमेंट का भरोसा जीतते हुए साबित किया कि बड़े मुकाबलों का दबाव उन्हें चुनौती मानने के बजाय अवसर देता है। उनकी इनिंग को करोड़ों फैंस ने सोशल मीडिया पर यादगार बताया है।


पाकिस्तान की राह कठिन

पाकिस्तान की टीम को इस हार से ग्रुप A की स्थिति पर असर पड़ा है। उन्हें नेट रन रेट और आगामी 

मैचों में बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है ताकि वे सुपर 8 में अपनी यात्रा को जारी रख सकें।

विशेषकर बल्लेबाज़ों का संघर्ष इस मैच में साफ दिखा — लक्ष्य की ओर बढ़ने के दौरान कोई बड़ी 

साझेदारी बन नहीं पाई और इससे विकेट जल्दी गिरते रहे। भारत के गेंदबाज़ों ने उसी स्थिति का 

भरपूर फायदा उठाया और विपक्षी टीम को संतुलित प्रदर्शन नहीं करने दिया।


क्या ये दोनों टीमें फिर से आमने सामने आएँगी ?

हाँ — भारत और पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप 2026 में फिर आमने-सामने आ सकते हैं, लेकिन यह 

ग्रुप स्टेज या सुपर-8 में नहीं, बल्कि नॉकआउट चरण (सेमीफाइनल या फाइनल) में संभव है।


सुपर-8 में फिर मुकाबला क्यों नहीं?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 का प्रारूप पहले से तय है और टीमों को अलग-अलग सुपर-8 ग्रुप में विभाजित 

किया गया है। भारत और पाकिस्तान दोनों ग्रुप-1 और ग्रुप-2 में हैं, इसलिए सुपर-8 चरण में दोनों का 

आमने-सामने होना संभावित नहीं है।


सेमीफाइनल में टकराव संभव

अगर दोनों टीमें सुपर-8 में टॉप-2 स्थान हासिल कर लेती हैं, तो सेमीफाइनल में उनका आमना-

सामना हो सकता है। यही सबसे बड़ी संभावना है जहाँ दोनों बड़े प्रतिद्वंद्वी फिर भिड़ सकते हैं।


फाइनल में भी हो सकता है मुकाबला

यह और भी रोमांचक होगा — अगर दोनों टीमें सेमीफाइनल जीत जाती हैं, तो फाइनल में उनसे फिर 

भिड़ने का मौका भी बन सकता है। ऐसे में टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाक का मैच तीन बार तक 

हो सकता है:

-ग्रुप चरण में (पहला मुकाबला, जो हो चुका है)

-सेमीफाइनल

-फाइनल


मायने क्या हैं?

ग्रुप चरण में भारत पहले ही जीत चुका है और सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर लिया है।

पाकिस्तान को सुपर-8 में क्वालीफाई करने के लिए बाकी ग्रुप मैचों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

अगर पाकिस्तान सुपर-8 में क्वालीफाई को हासिल कर लेता है, तो नॉकआउट में मुकाबला होना 

रीयलिस्टिक संभावना बन जाती है। 






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दिल्ली की हवा क्यों नहीं सुधरती? समस्या न गाड़ियों में है, न सिर्फ

 सरकारों में — असली हल वैज्ञानिक समझ में छिपा है


हर वर्ष सर्दी में दिल्ली का आसमान धुंध से ढक जाता है, AQI 400 के पार पहुंच जाता है और शहर “गैस चेंबर” बन जाता है।

लोग सड़कों पर उतरते हैं, स्लोगन गूंजते हैं — “I Can’t Breathe”, “Save My Lungs”

सरकारें भी “ऑड-ईवन”, “पुरानी कार बैन”, “धूल नियंत्रण” जैसे कदम उठाती हैं।

लेकिन सच्चाई यह है कि ये उपाय बीमार हवा के लक्षणों पर मरहम हैं, बीमारी की जड़ पर 
नहीं।





असली समस्या: वैज्ञानिक समझ की कमी

दिल्ली का प्रदूषण केवल वाहनों का धुआं या पराली का धुआं नहीं है, बल्कि यह भौगोलिक, 

मौसमीय और मानव-जनित कारकों का मिला-जुला प्रभाव है।

जानिए क्यों दिल्ली की हवा हर सर्दी में घुटती है और कैसे समाधान सिर्फ नारेबाजी नहीं, बल्कि वैज्ञानिक समझ में छिपा है। ये सही है लोगों को अपने शहर के वातावरण के लिए जागरूक होना चाहिए किन्तु सिर्फ नारेबाजी से या सरकारों द्वारा लिए गए उलटे सीधे फैसले जैसे किसी एक कारण के रोकने से (कारों को 10 - 15 साल में ही बैन करना जबकि वो असली और एकमात्र विलेन नहीं होते ) नहीं होगा चाहे जिस पार्टी की सरकार हो जब तक इस समस्या की जड़ को नहीं समझा जायेगा तब तक दिल्ली की हवा ऐसे ही बनी रहेगी 

दिल्ली का स्थान उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र में है —

दिल्ली के नजदीक उत्तर में 200 - 300 किलोमीटर दूर ठण्डे पहाड़ और  पश्चिम में  रेगिस्तान जैसे भू-

आकृतिक अवरोध, गंगा-यमुना जैसी नमी देने वाली नदियाँ, और ठंड के मौसम में लगभग स्थिर ( 

अत्यधिक माध्यम गति से चलने वाली हवाएं) , भारी, नम हवाएं - सभी मिलकर दिल्ली को एक “एयर 

ट्रैप जोन (Air Trap Zone)” बना देते हैं।

इस स्थिति में हवा ऊपर नहीं उठती और प्रदूषण नीचे फंस जाता है — जिसे वैज्ञानिक “थर्मल 

इनवर्ज़न” कहते हैं।






दिल्ली की कारें-गाड़ियां ( CNG /पेट्रोल ) असली विलेन नहीं

सरकारें अकसर सबसे आसान रास्ता चुनती हैंवाहनों को जिम्मेदार ठहरा देना।

केवल 10 या 15 साल पुरानी कारों पर बैन लगाना, या केवल BS-IV गाड़ियों को हटाना, कोई समाधान नहीं, बल्कि भ्रम है।

क्योंकि दिल्ली में कुल प्रदूषण का लगभग 30-35% ही वाहनों से आता है।

बाकी 70 % हिस्सा आता है — धूल, औद्योगिक धुआं, पराली, निर्माण कार्य और मौसमीय फंसे प्रदूषकों से।

पुराने वाहनों का योगदान सीमित है, लेकिन सड़कों  पर जाम और ट्रैफिक मैनेजमेंट की अव्यवस्था से 

प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है।


वैज्ञानिक नीति की जरूरत, न कि राजनीतिक बहस की

प्रदूषण का हल किसी एक पार्टी या नारे से नहीं निकल सकता।

जरूरत है — वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नीति निर्माण की।

पर्यावरण वैज्ञानिकों, मौसम विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों को नीति-निर्धारण में शामिल करने की।

दीर्घकालिक समाधान पर काम करने की — जैसे ग्रीन ज़ोन, हवा के प्रवाह के लिए खुले क्षेत्र, और धूल

नियंत्रण तकनीक।जनता में वैज्ञानिक सोच का विकास, ताकि लोग भावनाओं या प्रचार से नहीं, तथ्यों के

आधार पर निर्णय लें।

जनता की भूमिका — सिर्फ विरोध नहीं, समझ जरूरी

प्रदूषण से लड़ाई सिर्फ नारेबाजी से नहीं, साझेदारी से जीती जाएगी।

हर नागरिक को यह समझना होगा कि गाड़ियों, फैक्ट्रियों या सरकारों को दोष देने से पहले, हमें कारण की जड़ तक जाना होगा।

जब जनता वैज्ञानिक सोच के साथ निर्णय लेगी — तभी सही प्रतिनिधि और सही नीति चुनी जाएगी।












शार्ट टर्म कोर्सेस जो देतें हैं 100 %  जॉब गॅारंटी 



मैन्युफैक्चरिंग में कैरियर  

Career in Manufacturing 

भिवाड़ी राजस्थान 

   पैकेजिंग में कैरियर

      (Packaging) 

    दिल्ली मुंबई कोलकता        अहमदाबाद चेन्नई बैंगलुरु 

     हेल्थ सेक्टर में कैरियर  

      (Paramedical )               (दिल्ली ) 

डिप्लोमा इन टूल एंड डाई मेकिंग  03 ईयर 

Diploma In Tool and Die Making 

 PG Diploma in Packaging Industry 

 Paramedical Courses after 12th

 24.06.2025 

 15 जून 2025 

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