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CBSE OSM विवाद और भारतीय विद्यार्थी पाकिस्तानी घोषित

CBSE OSM विवाद में नया मोड़: 





राहुल गांधी का हमला, वेदांत को ‘पाकिस्तानी’ कहे जाने पर राजनीति 

तेज

NB7-Delhi: देशभर में इस समय CBSE के नए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर 

बड़ा विवादखड़ा हो गया है। मामला तब और ज्यादा चर्चा में आ गया जब दिल्ली के छात्र वेदांत 

श्रीवास्तव ने आरोप लगाया किरी-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान उन्हें जो स्कैन कॉपी भेजी गई, वह 

उनकी अपनी उत्तरपुस्तिका ही नहीं थी। 


इसपूरे मामले में अब कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi भी खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने केंद्र 

सरकार तथा शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।


विवाद केवल उत्तरपुस्तिका तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर वेदांत को “पाकिस्तानी”, “एंटी-

नेशनल”और “डीप स्टेट एजेंट” तक कहा गया, जिसके बाद यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था से निकलकर 

राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया।


क्या है पूरा मामला?

CBSE ने इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में नया On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू 

किया है। इससिस्टम में उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा जाता है। 

परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने कम अंक आने और कॉपी जांच में गड़बड़ी के आरोप लगाए।


 वेदांत श्रीवास्तव भी इन्हीं छात्रों में शामिल थे। वेदांत ने दावा किया कि फिजिक्स में अपेक्षा से बहुत 

कम अंक मिलनेके बाद उन्होंने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी 

मंगाई। लेकिन जब कॉपी डाउनलोड की गई तो उसमें मौजूद हैंडराइटिंग, उत्तर और लेखन शैली 

उनकी नहीं थी।

वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनके रोल नंबर के 

साथ किसी दूसरे छात्र कीउत्तरपुस्तिका अपलोड कर दी गई है। इसके बाद यह मामला तेजी से 

वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ हमला वेदांत के पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल 

मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक वर्ग ने छात्र की शिकायत को गंभीर बताते हुए 

जांच की मांग की, जबकि दूसरे वर्ग ने वेदांत की देशभक्ति पर सवाल उठाने शुरूकर दिए।

कुछ यूजर्स ने वेदांत की X प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया कि उनका अकाउंट 

“पाकिस्तान” या “साउथ एशिया” से संचालित हो रहा है। इसके आधार पर उन्हें “पाकिस्तानी” और 

“एंटी-नेशनल” कहा जाने लगा। वैसे भारत की लोकेशन भी  “साउथ एशिया” में ही है।  

बाद में वेदांत के भाई सिद्धांत श्रीवास्तव ने सफाई देते हुए कहा कि अकाउंट नया बनाया गया था और 

लोकेशन सेटिंग्स की तकनीकी वजह से ऐसा दिख रहा था। उन्होंने कहा कि वेदांत सोशल मीडिया पर 

सक्रिय नहीं थे क्योंकि वह पढ़ाई में व्यस्त थे। अकाउंट केवल शिकायत उठाने के लिए बनाया गया था।

सिद्धांत ने X पर पोस्ट कर लिखा, “हम पाकिस्तानी नहीं हैं।” यह पोस्ट भी सोशल मीडिया पर तेजी से 

वायरल हुआ।

राहुल गांधी का बड़ा हमला:


इस विवाद में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और CBSE पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक 

छात्र, जो केवल अपने भविष्य से जुड़े सवाल पूछ रहा था, उसे ट्रोल कर “देशद्रोही” बताया गया।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा: “मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का 

प्रतीक बना दिया।”

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता खत्म होती जा रही है और छात्रों की शिकायतों 

को गंभीरतासे नहीं लिया जा रहा। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा 

मामला होने के बावजूद सरकार जवाबदेही से बच रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan पर निशाना साधते 

हुए कहा कि “कोईजवाब नहीं, कोई जवाबदेही नहीं।”

CBSE ने आखिरकार मानी गलती:


लगातार बढ़ते विवाद और सोशल मीडिया दबाव के बाद CBSE ने स्वीकार किया कि वेदांत के मामले 

में तकनीकी त्रुटि हुई थी। बोर्ड ने कहा कि गलती से गलत स्कैन कॉपी अपलोड हो गई थी और बाद में 

छात्र को सही उत्तरपुस्तिका भेज दी गई।

वेदांत ने भी बाद में X पर पोस्ट कर पुष्टि की कि CBSE अधिकारियों ने संपर्क किया और उन्हें सही 

उत्तरपुस्तिका भेजी गई है।

हालांकि विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि OSM सिस्टम 

में व्यापकस्तर पर तकनीकी गड़बड़ियां हैं। कुछ छात्रों ने ब्लर स्कैन, गलत पेज, पोर्टल क्रैश और 

मूल्यांकन त्रुटियों की शिकायतें भी दर्ज कराईं।

क्या OSM सिस्टम पर उठ रहे हैं बड़े सवाल?

CBSE का नया On-Screen Marking सिस्टम इस वर्ष पहली बार बड़े स्तर पर लागू किया गया। 

बोर्ड का दावा थाकि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। लेकिन परिणाम आने के बाद 

बड़ी संख्या में शिकायतें सामनेआने लगीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कैनिंग, अपलोडिंग या डिजिटल टैगिंग में छोटी सी गलती भी हो जाए 

तो छात्र कापूरा रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि अब विपक्ष इस मुद्दे पर स्वतंत्र जांच की 

मांग कर रहा है।


वेदांत के परिवार ने क्या कहा?

वेदांत के पिता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि उनका बेटा मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया था। 

उन्होंने बताया कि गलत उत्तरपुस्तिका देखने के बाद वह कई रातों तक ठीक से सो नहीं पाया।

परिवार का कहना है कि उन्होंने केवल न्याय की मांग की थी, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें 

देश-विरोधी बताया जाने लगा। वेदांत के भाई ने कहा कि “अगर कोई छात्र अपनी कॉपी में गड़बड़ी की 

शिकायत करता है तो उसे ट्रोल क्यों किया जाता है?”

सोशल मीडिया और ट्रोल राजनीति पर बहस यह मामला अब केवल CBSE तक सीमित नहीं रह गया 

है। प्रताड़ित छात्र की सोशल मीडिया अकाउंट की लोकेशन साऊथ एशिया बताई जाने लगी, और 

छात्र का अकाउंट पाकिस्तानी बताया जाने लगा, जबकि भारत के ये समझदार लोग ये तक नहीं 

जानते भारत भी साऊथ एशिया में ही आता है।   

सोशल मीडिया पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या किसी सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले 

व्यक्ति को तुरंत “देशविरोधी” करार देना सही है?

कई पत्रकारों, शिक्षाविदों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि एक 17 वर्षीय छात्र को केवल 

शिकायत करने पर “पाकिस्तानी” कहना बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है।

दूसरी ओर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी नैरेटिव तेजी से फैलते हैं, इसलिए 

किसी भी दावे की जांच जरूरी है।


छात्रों में बढ़ रही चिंता और असंतोष :

CBSE के लाखों छात्र अब अपने रिजल्ट और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चिंतित हैं। सोशल मीडिया 

पर कई छात्र अपनी उत्तरपुस्तिकाओं की कॉपियां शेयर कर रहे हैं और पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे 

हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती नहीं 

होगी तो भविष्य में ऐसे विवाद और बढ़ सकते हैं।


विपक्ष का इस्तीफा जायज क्यों है? 

शिक्षा मंत्रालय और उससे जुड़े बोर्ड जैसे CBSE आखिरकार सरकार के अधीन आते हैं।

अगर लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाली बड़ी गड़बड़ी सामने आती है, तो विपक्ष “मोरल 

रिस्पॉन्सिबिलिटी” यानी नैतिक जिम्मेदारी तय करने की बात करता है।

इस्तीफे की मांग राजनीतिक दबाव बनाने का तरीका भी होती है ताकि सरकार जांच और सुधार के 

लिए मजबूर हो।

जैसे अभी OSM विवाद, उत्तरपुस्तिका गड़बड़ी और छात्रों की शिकायतों को लेकर 

विपक्ष कह रहा है कि शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan जवाबदेही लें

 

क्या यह सिर्फ राजनीति भी हो सकती है?

कई बार हां भी नहीं भी - क्योंकि सवाल ज्यादा बड़े हैं और युवाओं का भविष्य दाँव पर है।  


क्या  जिम्मेदारी किसी की नहीं ? ये एक बड़ा सवाल है 

भारतीय राजनीति में किसी भी बड़े विवाद पर:

विपक्ष सरकार को घेरता है, किन्तु यही तो विपक्ष का काम है, सवाल करता है।  

सरकार विपक्ष पर “राजनीति करने” का आरोप लगाती है।

सरकार का तर्क : हर प्रशासनिक या तकनीकी गलती पर तुरंत इस्तीफा मांग लिया जाए, तो 

यह राजनीतिक रणनीति भी माना जाता है। खासकर तब, जब जांच पूरी न हुई हो या गलती सिस्टम 

स्तर की हो, किसी एक व्यक्ति की नहीं।


“फिर जिम्मेदार कौन?” — लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ी से शिक्षा 

व्यवस्था पर सवाल खड़े होना राजनीती कैसे 


देश में पिछले कुछ वर्षों में एक के बाद एक कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में घिरती रही हैं। 

कभी पेपर लीक, कभी रिजल्ट गड़बड़ी, कभी भर्ती परीक्षा रद्द, तो कभी उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में 

तकनीकी त्रुटियां — इन घटनाओं ने करोड़ों छात्रों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए 

हैं। 

अब CBSE के OSM विवाद और छात्र वेदांत के मामले ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है कि 

आखिर इन लगातार होती गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार कौन है?


विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल “तकनीकी गलती” कहकर मामलों को शांत करने की कोशिश 

करती है, लेकिन वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती। कई शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि केवल 

जांच समिति बना देने से समस्या खत्म नहीं होती, क्योंकि अक्सर न तो बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई 

होती है और न ही सिस्टम में गहरे सुधार दिखाई देते हैं।


लगातार बढ़ते विवाद:

हाल के वर्षों में कई प्रमुख परीक्षाएं विवादों में रही हैं।

NTA (National Testing Agency) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पेपर लीक और रिजल्ट गड़बड़ी के 

आरोप लगे।

-कई राज्यों की भर्ती परीक्षाएं लीक के कारण रद्द करनी पड़ीं।

-अब CBSE के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम OSM पर सवाल उठ रहे हैं।

छात्रों और अभिभावकों के अनुसार हर बार जांच और सुधार का वादा किया जाता है, लेकिन कुछ 

समय बाद नया विवाद सामने आ जाता है।


जिम्मेदारी आखिर किसकी?

विशेषज्ञों के अनुसार जिम्मेदारी कई स्तरों पर तय होती है:

1. परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां

यदि उत्तरपुस्तिका अपलोडिंग, स्कैनिंग, डेटा सुरक्षा या पेपर वितरण में गड़बड़ी होती है, तो सबसे 

पहली जिम्मेदारी परीक्षा संचालित करने वाली संस्था की मानी जाती है।

जैसे OSM मामले में सवाल यह उठ रहा है कि यदि गलत उत्तरपुस्तिका अपलोड हो सकती है, तो क्या 

डिजिटल सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है?


2. निजी टेक्नोलॉजी कंपनियां

आज कई परीक्षा संस्थाएं डिजिटल मूल्यांकन, सर्वर प्रबंधन और डेटा प्रोसेसिंग के लिए निजी कंपनियों 

पर निर्भर हैं। विपक्ष का आरोप है कि इन कंपनियों की जवाबदेही स्पष्ट नहीं होती और तकनीकी 

विफलता का खामियाजा छात्र भुगतते हैं।

3. मंत्रालय और सरकार

क्योंकि सभी केंद्रीय परीक्षा संस्थाएं अंततः शिक्षा मंत्रालय के अधीन आती हैं, इसलिए राजनीतिक 

जिम्मेदारी सरकार पर भी आती है। विपक्ष इसी आधार पर शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से 

जवाब मांग रहा है।

“कार्रवाई क्यों नहीं होती?” सबसे बड़ा सवाल

सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि बार-बार विवाद होने के बावजूद बड़े 

अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती।

कई मामलों में:

-जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, कोई पारदर्शिता नहीं 

-जनता को अंधेरे में रखा जाता है और दोषी आजाद घूमते हैं,

-निलंबन अस्थायी रहता है, या सिर्फ ट्रांसफर कर दिया जाता है,

-जिम्मेदारी निचले स्तर के कर्मचारियों पर डाल दी जाती है,

-और कुछ अधिकारी बाद में दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर दिखाई देते हैं।

यही वजह है कि छात्रों में यह धारणा मजबूत हो रही है 

कि सिस्टम में “जवाबदेही की कमी या नहीं ” है।


छात्रों का भरोसा टूट रहा है

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का कहना है कि वे वर्षों मेहनत करते हैं, 

लेकिन पेपर लीक, रिजल्ट त्रुटि या भर्ती रद्द होने से उनका मानसिक और आर्थिक नुकसान होता है।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हुआ, तो इसका असर 

देश की सामाजिक स्थिरता और युवाओं के मनोबल पर भी पड़ेगा।


क्या सिर्फ राजनीति हो रही है?

सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि विपक्ष हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देता है और तकनीकी 

गलतियों को “घोटाला” बताकर माहौल बनाता है। उनका तर्क है कि डिजिटल सिस्टम लागू होने पर 

शुरुआती समस्याएं आ सकती हैं और सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि यदि हर कुछ महीनों में नई परीक्षा विवादों में घिर जाए, तो इसे 

केवल “तकनीकी त्रुटि” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब आगे क्या?

विशेषज्ञों और शिक्षा सुधार की मांग करने वाले समूहों ने कई सुझाव दिए हैं:

-परीक्षा एजेंसियों की स्वतंत्र ऑडिट,

-डिजिटल सिस्टम की थर्ड पार्टी जांच,

-पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें,

-दोषी अधिकारियों पर सार्वजनिक कार्रवाई,

-और छात्रों के लिए पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है —


यदि हर बार छात्र ही पीड़ित बन रहे हैं, लेकिन कोई बड़ी जवाबदेही तय नहीं हो रही, तो आखिर 

जिम्मेदार कौन है?


आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या CBSE इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएगा? क्या OSM 

सिस्टम में तकनीकी सुधार किए जाएंगे? और क्या छात्रों की शिकायतों के लिए कोई स्वतंत्र निगरानी 

तंत्र बनाया जाएगा?

विपक्ष इस मुद्दे को संसद और राष्ट्रीय राजनीति में उठाने की तैयारी कर रहा है, जबकि शिक्षा मंत्रालय 

फिलहाल तकनीकी त्रुटि मानकर सुधारात्मक कदमों की बात कर रहा है।

फिलहाल वेदांत का मामला देशभर में शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल मूल्यांकन और सोशल मीडिया ट्रोलिंग 

— तीनों पर बड़े सवाल खड़े कर चुका है।


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