क्या एथेनॉल मिला पेट्रोल अच्छा है या बुरा ? पूरी रिपोर्ट

एथेनॉल क्या है और एथेनॉल की पूरी सच्चाई  

(वैज्ञानिक शोध पर आधारित रिपोर्ट)


     एथेनॉल से किसका फायदा पर्यावरण को या एथेनॉल मंत्री को ?

Is Ethanol Good or Bad? (E20 Petrol Explained)

By NewsBell7 Research Desk

भारत में पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 

पहले जहां लोगों को लगभग शुद्ध पेट्रोल मिलता था, वहीं अब E10 और E20 जैसे नाम आम हो चुके 

हैं। सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों 

की आय बढ़ाना और प्रदूषण घटाना है। लेकिन दूसरी ओर करोड़ों वाहन मालिकों के मन में कई 

सवाल हैं।


-क्या एथेनॉल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है?

-क्या पुराने वाहनों के इंजन पर इसका बुरा असर पड़ता है?

-क्या एथेनॉल वातावरण से पानी सोखता लेता है?

-क्या एथेनॉल वास्तव में ग्रीन फ्यूल है या प्रदूषण नियंत्रण का भ्रम?

-क्या एथेनॉल भविष्य का फ्यूल है ?


एथेनॉल क्या है? 

What is Ethenol ?

एथेनॉल (Ethanol) एक प्रकार का अल्कोहल (स्पिरिट)आधारित जैव ईंधन (Biofuel) है। 

इसे मुख्य रूप से गन्ने के शीरे (Molasses), मक्का, टूटे चावल तथा अन्य कृषि उत्पादों से बनाया 

जाता है। इसे सीधे पेट्रोल की जगह नहीं, बल्कि पेट्रोल में मिलाकर उपयोग किया जाता है।


उदाहरण के लिए—

-E10 = 90% पेट्रोल + 10% एथेनॉल

-E20 = 80% पेट्रोल + 20% एथेनॉल

-E85 = 15% पेट्रोल + 85% एथेनॉल (केवल Flex-Fuel वाहनों के लिए)

भारत में वर्तमान नीति का मुख्य फोकस E20 है।


भारत एथेनॉल को क्यों बढ़ावा दे रहा है?

सरकार के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं।

1. कच्चे तेल का आयात कम करना

भारत अपनी आवश्यकता का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इससे विदेशी मुद्रा पर 

भारी खर्च होता है। यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जाए तो तेल आयात कुछ हद तक कम हो सकता है।

2. किसानों को लाभ

गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल बनने पर किसानों को अतिरिक्त बाज़ार मिल सकता है। इससे 

चीनी उद्योग को भी सहारा मिलता है।

3. प्रदूषण कम करने का प्रयास

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कुछ प्रकार के प्रदूषक कम हो सकते हैं और कार्बन 

उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है।


क्या एथेनॉल वास्तव में ग्रीन फ्यूल है?

यहीं से सबसे बड़ी बहस शुरू होती है।

यदि केवल गाड़ी के एग्जॉस्ट से निकलने वाले धुएँ को देखा जाए तो एथेनॉल मिश्रित ईंधन कुछ मामलों 

में पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

लेकिन पर्यावरण वैज्ञानिक केवल वाहन से निकलने वाले धुएँ को नहीं देखते।

वे ईंधन के पूरे जीवन-चक्र (Life Cycle) का अध्ययन करते हैं।

इसमें शामिल होता है—

-फसल उगाने में पानी कितना लगा?

-खाद और बिजली कितनी लगी?

-फैक्ट्री में कितना ईंधन जला?

-उत्पादन के दौरान कितना प्रदूषण हुआ?

-परिवहन में कितनी ऊर्जा खर्च हुई?

-अंत में वाहन से कितना उत्सर्जन निकला?

-देश की जरूरत को पूरा करने के लिए देश में बहुत अधिक एथेनॉल बनाने के प्लांट लगाने पड़ेंगें,   

 और ये कारखाने कितना प्रदूषण बढ़ेगा ये अभी तक रिसर्च नहीं की गयी है।  

- दुनिया के बड़े देशों (अमेरिका, ब्राजील, जर्मनी) में आज भी E5 और E10 के साथ शुद्ध पेट्रोल 

   उपयोगकर्ता  को उनकी मर्ज़ी से चुनने का अधिकार है।  

 यानी केवल सड़क पर निकलने वाला धुआँ देखकर किसी ईंधन को पूरी तरह "ग्रीन" नहीं कहा जा 

 सकता है। 

 1 -उस ईंधन को बनाने में कितना कोयला/लकडी/अन्य ईंधन जला? 

 2 -कितना पर्यावण को नुक्सान हुवा ? 

 3 -कितना पानी प्रयोग हुवा ?

4 - कितना रासायनिक खाद लगी ?

5 - कितनी जमीनों में गन्ना बोने के कारण दूसरी फसलों में कमी आने से बढ़ने वाली महगाई बढ़ी ? 

6 -अंतिम उपभोक्ता को कितना फायदा या नुक्सान हुवा ? 

 ये भी अभी तक सरकार ने रिसर्च नहीं की है।  


एथेनॉल के प्रमुख फायदे

विदेशी तेल पर निर्भरता कम

भारत का आयात बिल कम करने में मदद मिल सकती है।

किसानों को अतिरिक्त आय

गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।

ऑक्टेन रेटिंग बेहतर

एथेनॉल की ऑक्टेन संख्या अधिक होती है, जिससे आधुनिक इंजनों में नॉकिंग कम हो सकती है।

कुछ प्रदूषकों में अस्थाई कमी

कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे कुछ उत्सर्जनों में कमी देखी गई है।


एथेनॉल के नुकसान

 जहाँ फायदे हैं, वहीं कुछ नुक्सान और चुनौतियाँ भी हैं।

-ऊर्जा कम होने से माइलेज पर असर

-कम माइलेज के कारण अधिक पेट्रोल की खपत से अधिक खर्च होगा और 

-प्रदूषण को कम करने के बजाय अधिक प्रदूषण की संभावना बनेगी।  इसका सीधा असर आम 

आदमी की जेब पर और हवा की शुध्दता पर पड़ेगी।   

-एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर कम ऊर्जा होती है।

-इसी कारण E20 में सामान्य परिस्थितियों में माइलेज कुछ कम हो सकती है।

-हालाँकि "20% माइलेज कम हो जाती है" जैसा दावा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।

-अधिकांश अध्ययनों में दुसरे कारण भी जुड़ जाये तो ये स्थिति बन जाती है।

-पेट्रोल पम्प मालिक अत्यधिक मिलावट कर इसका दोष पेट्रोल कंपनियों पर डालेंगे।  

-20 % से 30 % माइलेज का कम होना स्वाभाविक है, किन्तु एथेनॉल मिक्स पेट्रोल अकेला इसके लिए 

जिम्मेदार नहीं, बल्कि माइलेज कम करने का बड़ा कारण या पानी आधारित एथेनॉल इंजन के बुरे  

प्रदर्शन की शुरुआत करने वाला और दुसरे कारण पैदा कर देता है।  


क्या पुराने वाहनों के लिए खतरा है?

यह प्रश्न सबसे अधिक पूछा जा रहा है।

यदि वाहन E20 के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है, तो कुछ समस्याओं की संभावना 

बढ़ सकती है।

विशेषकर— इन उपकरणों को समय समय पर गुणवत्ता जांच से देखते रहे।  

-पुराने रबर पाइप

-गैस्केट

-सील

-स्टील फ्यूल टैंक जंग 

-फ्यूल पंप

जैसे हिस्सों पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं कि हर पुरानी गाड़ी तुरंत खराब हो जाएगी, बल्कि जोखिम वाहन की उम्र, 

रखरखाव और निर्माता के डिज़ाइन पर निर्भर करता है।


क्या एथेनॉल पानी को अपनी ओर खींचता है?

इस प्रश्न का उत्तर है—हाँ, लेकिन इसे सही तरीके से समझना जरूरी है।

एथेनॉल को वैज्ञानिक भाषा में Hygroscopic (पानी में घुलने वाला ) कहा जाता है।

आसान हिन्दी में समझें—

"पेट्रोल और पानी एक-दूसरे से नहीं मिलते, लेकिन एथेनॉल पानी का करीबी साथी है। 

हवा में मौजूद नमी को भी एथेनॉल अपने साथ मिला सकता है।"

इसी कारण यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहे, विशेषकर गर्मियों और बरसात के मौसम में, तो ईंधन 

में नमी मिलने की संभावना 50% बढ़ सकती है।


बरसात में पुरानी गाड़ियों के लिए क्या समस्या हो सकती है?

यदि—

-वाहन कई सप्ताह तक खड़ा रहे,

-टैंक आधा खाली हो,

-वातावरण में नमी अधिक हो,

तो टैंक के अंदर संघनन (Condensation)  (पानी की बूंदे इकठ्ठा) हो सकता है।

यदि पानी की मात्रा अधिक हो जाए तो कुछ मामलों में ईंधन की परतें अलग हो सकती हैं।

इसे Phase Separation कहा जाता है।

ऐसी स्थिति में इंजन के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है। जब जब इंजन में पेट्रोल के साथ पानी 

पहुँचता है तो पानी जलता नहीं है इसलिए इंजन पर दबाव पड़ता है और इंजन खराब होने की स्थिति 

बनने लगती है।  

ऐसी स्थिति में बार बार कार्बन जमने से या इंजन में पानी के कारण पिस्टन और सील में भी खराबी आ 

सकती है, इंजन खोलकर ठीक करवाना मतलब बड़ा खर्च।  


क्या एथेनॉल जंग (Rust) लगाता है?

एथेनॉल खुद नहीं। बल्कि एथेनॉल पानी आकर्षित करने के कारण पानी की अधिक मात्रा और 

ऑक्सीजन लोहे की टंकी में जंग लगने का कारन बंटी है 

मतलब जंग का कारण एथेनॉल नहीं उसका पानी से दोस्ती है।

जंग तब लगती है जब—

धातु + पानी + ऑक्सीजन एक साथ मौजूद हों। भारत में बनने वाली अधिकतर गाड़ियां उच्च 

गुणवत्ता या हाई क्वालिटी स्टैण्डर्ड पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती, पुरानी गाड़ियों में तो हालत और 

ज्यादा खराब हो सकती है इसलिए पुरानी गाड़ियों में जंग लगने की समस्या आना स्वाभाविक है।  

क्योंकि एथेनॉल पानी को अपने साथ रखने की क्षमता रखता है, इसलिए पुराने (लोहा शीट) स्टील टैंकों 

में नमी की स्थिति बनने पर जंग का जोखिम बढ़ सकता है।

जबकि 100% पेट्रोल प्राकर्तिक रूप से पेट्रोल टैंक को जंग से बचा कर रखता है।   

यही कारण है कि नई E20-अनुकूल गाड़ियों में विशेषकर पेट्रोल टैंक बनाने में  विशेष प्रकार की 

सामग्री-पेंट  और रबर की कोटिंग का उपयोग किया जाता है।

Note: बरसात के दिनों में हवा में आद्रता या नमी की मात्रा 80% से भी अधिक हो जाती है, इसलिए 

पेट्रोल पम्पों के पेट्रोल टैंकों में भी पेट्रोल में पानी की मौजूदगी की समस्याएं बढ़ने से लगती हैं, यदि 

पेट्रोल में एथेनॉल सामान्य से अधिक हुवा तो पेट्रोल पम्पों का पानी भी इसमें मिलावट का कारण बनेगा 

- जिसका सीधा असर वाहनों की कार्यक्षमता  पर पड़नेलगता है।  


वाहन मालिक क्या सावधानी रखें?

-विश्वसनीय पेट्रोल पंप से ही ईंधन भरवाएँ।

-हो सके तो समय समय पर गाड़ी के पेट्रोल टैंक को खाली करा कर, पानी की मात्रा पर धयान दें।  

-वाहन को महीनों तक बिना चलाए न रखें।

-बरसात में टैंक को बहुत अधिक खाली न रहने दें।

-पुरानी गाड़ियों की फ्यूल लाइन, टैंक और फिल्टर की समय-समय पर जांच कराएँ।

-यदि निर्माता ने E20-अनुकूल ईंधन की अनुमति नहीं दी है, तो वाहन निर्माता की सलाह का पालन 

  करें।

Q. क्या एथेनॉल को पेट्रोल से घर पर ही अलग किया जा सकता है ?

Ans. हाँ, आसानी से !

कैसे ? क्योकि एथेनॉल पानी में आसानी से घुल जाता है, जबकि पेट्रोल पानी में नहीं घुलता।  

किसी भी प्लास्टिक केन (पारदर्शी टंकी )  में पेट्रोल लें और उसमें थोड़ा पानी मिला दें, फिर उस केन को बंद कर के हिला लें।  इसके बाद उसे कुछ घण्टों के लिए स्थिर रख दें।  कुछ देर बाद अगर  केन ट्रांसपेरेंट है तो आपको पेट्रोल के नीचे पानी की अच्छी परत दिख जायेगी।  केन से उपर ऊपर से पेट्रोल बिना हिलाये पाइप की सहायता से अलग कर लें और नीचे बैठा पानी और एथेनॉल का मिश्रण किसी सुरक्षित जगह पर गिरा दें, ध्यान रखें इस पूरे प्रकरण में आग से दूरी बना कर रखें।  बच्चे ये प्रयोग न करें।  पेट्रोल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होता है इसलिए कोई भी प्रयोग सुरक्षा उपकरणों केसाथ ही करें।