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Who invited Babar to Invade Delhi

बाबर किसके कहने पर दिल्ली पर आक्रमण किया था


बाबर को पंजाब के गवर्नर दौलत खान लोदी और मेवाड़ के राणा सांगा ने भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था, जिन्होंने सुल्तान इब्राहिम लोदी के शासन को उखाड़ फेंकने में उसकी मदद मांगी थी

दौलत खान लोदी: पंजाब के गवर्नर के रूप में दौलत खान लोदी जिन्हें दिल्ली के सुलतान इब्राहिम लोदी ने ही नियुक्त किया था, दिल्ली के लोदी वंश के सुल्तान इब्राहिम लोदी के शासन को उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहे थे. 

राणा सांगा: मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने भी इब्राहिम लोदी की सत्ता को चुनौती देने के लिए बाबर को उकसाया था। यह बाबर ने भी अपनी किताब बाबरनामा में दर्ज किया था, साथ ही उसने लिखा है की राणा सांगा ने मुझे दिल्ली पर आक्रमण करने के साथ युद्ध में सहायता करने का प्रलोभन भी दिया था किन्तु इस विषय में कुछ इतिहासकारों का मत ये भी है की राणा सांगा, बाबर और इब्राहिम लोदी को आपस में लड़ाकर, दोनों को कमजोर कर स्वयं दिल्ली पर कब्जा करना चाहता था,  किन्तु बाद में सीधे उनके युद्ध में शामिल नहीं हुवा।  मतलब राणा सांगा को लगता था की बाबर सिर्फ लूट के मकसद से दिल्ली पर हमला करेगा, किन्तु बाद में बाबर की असली मंशा को समझ कर वह पीछे हट गये   

बाबरनामा: बाबर के अपने वृत्तांत "बाबरनामा" में उल्लेख है कि उसे दौलत खान लोदी ने स्पष्ट रूप से खुल कर इब्राहिम लोदी के खिलाफ लड़ने के लिए आमंत्रित किया था। जबकि राणा सांग ने भी युद्ध में सहायता करने की बात कही थी जिससे बाद में राणा सांग पीछे हट गए। 

अन्य ऐतिहासिक विवरण: अन्य ऐतिहासिक स्रोत भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि दौलत खान लोदी और राणा सांगा ने बाबर को भारत आमंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

बाबर भारत पर आक्रमण करने क्यों आया? उस घटना को उस समय के राजनैतिक स्थिति से समझते हैं, की भारतीय उपमहाद्वीप में असंख्य राजाओं के बीच क्या चल रहा था 

बाबर के हमले के समय भारत: बाबर के हमले के समय दो राजवंश सत्ता में थे - इब्राहिम लोदी के अधीन दिल्ली की सल्तनत, और मेवाड़ के राणा सांगा के नेतृत्व में एक हिंदू राजपूत संघ द्वारा शासित राजपुताना। हालाँकि, लोदी के अधीन साम्राज्य कमज़ोर नेतृत्व और विद्रोह के कारण ढह रहा था। पंजाब के गवर्नर दौलत खान लोदी और लोदी के चाचा अला-उद-दीन ने बाबर को युद्ध छेड़ने और सत्ता पर कब्ज़ा करने के लिए आमंत्रित किया था।

बाबर का आक्रमण और उसके युद्ध :

1. लाहौर में मुठभेड़:

दिल्ली जाते समय, लाहौर में बाबर की लोधी सेना से पहली मुठभेड़ हुई। बाबर ने प्रतिरोध को दबा दिया, लेकिन शहर में आग लग गई। लड़ाई खत्म होने के बाद, बाबर ने सुल्तान इब्राहिम के असंतुष्ट चाचाओं में से एक आलम खान को नियुक्त किया, जिसने बाबर को भारत पर हमला करने से रोकने में अहम भूमिका निभाई। जैसे ही बाबर आगे बढ़ा, लोधी ने विद्रोह कर दिया और आलम खान को काबुल भागने पर मजबूर कर दिया।

2. दिल्ली में मुठभेड़ : 

अगली मुठभेड़ दिल्ली में हुई जिसमें आलम खान और दौलत खान लोदी बाबर की सेना में शामिल हो गए। इस मुठभेड़ में इब्राहिम लोधी की सेना बाबर के इस हमले को विफल करने में सफल रही।

3. पानीपत में मुठभेड़:

 दिल्ली में युद्ध हारने के बाद भी बाबर ने हिम्मत नहीं हारी और पानीपत के युद्ध स्थल पर होने वाली मुठभेड़ के लिए तैयारियाँ शुरू कर दीं। इस युद्ध में सुल्तान इब्राहिम मारा गया और उसकी सेना हार गई। बाबर ने दिल्ली और आगरा दोनों पर कब्ज़ा कर लिया और इस तरह भारत में दिल्ली सल्तनत का हमेशा के लिए अंत हो गया।




बाबर की जीत का रहस्य :
बाबर ने पहली बार भारत पर आक्रमण करने के लिए बारूद  और बड़ी संख्या में छोटी तोपों का इस्तेमाल किया थे, जिसके लिए इब्राहिम लोधी और उनकी सेना तैयार नहीं थी. 
इब्राहिम लोदी अपनी एक लाख से ज्यादा सेना के संख्या पर और पुरानी तरह की लड़ाइयों की तकनीक जिसमें धनुष बाण तलवार भाले आदि के इस्तेमाल पर आधारित थी पर भरोसा कर रहे थे किन्तु बाबर ने अचानक तीन तरफ से तोपों के इस्तेमाल और इब्राहिम लोधी की सेना के लिए खोदी गयी खाइयों के कारण कम संख्या में होते हुवे भी इब्राहिम लोदी की सेना में भगदड़ मचा दी.  

तोपों से की गयी गोलाबारी के कारण इब्राहिम लोधी की सेना बजाय लड़ने के तोपों की मार से बचने के लिए इधर उधर भागते रहे परिणाम स्वरुप बेहतरीन युद्ध रणनीति और युद्ध कौशल के कारण बाबर को इस सबसे महत्वपूर्ण अभियान में जीत मिली। तुलुगमा का निर्माण, दुश्मन के लिए अज्ञात खाई खोदना, घुड़सवार सेना और तोपों का प्रभावी उपयोग और विपरीत दिशा में समय पर हमला जैसे प्रभावी रणनीतिक निर्णय लेना, युद्ध में बाबर की जीत के मुख्य कारण थे। यह बारूद, आग्नेयास्त्रों और फील्ड आर्टिलरी का उपयोग करने वाली सबसे शुरुआती लड़ाइयों में से एक है।

(Source : विकिपीडिया)- बाबरनामा के अनुसार, राणा सांगा ने भी इब्राहिम के खिलाफ बाबर की मदद करने की पेशकश की थी, हालाँकि जब बाबर ने लोदी पर हमला किया और दिल्ली और आगरा पर कब्ज़ा कर लिया, तो सांगा ने कोई कदम नहीं उठाया, जाहिर तौर पर उसने अपना मन बदल लिया था। बाबर को इस कदम से नाराजगी थी; अपनी आत्मकथा में, बाबर ने राणा सांगा पर उनके समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। हालाँकि राजपूत स्रोत इसके विपरीत दावा करते हैं और कहते हैं कि सांगा लोदी साम्राज्य के खिलाफ सफल रहे और उन्हें बाबर की सहायता की आवश्यकता नहीं थी। इसके बजाय यह बाबर ही था जिसने राणा सांगा से संपर्क किया और लोदी साम्राज्य के खिलाफ गठबंधन का प्रस्ताव रखा।इतिहासकार सतीश चंद्र 

Note: इस लेख में जो भी जानकारी दी गयी है वह सभी इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न स्त्रोतों से ली गयी है तथा इसमें हमारे द्वारा कोई भी जानकारी जोड़ी या घटाई नहीं गयी है जो भी जानकारी जैसी इंटरनेट पर उपलब्ध है वैसी की वैसी आपके सामने रख दी गयी है.