गाज़ियाबाद तीन नाबालिग बहनों की रहस्यमयी मौत:
क्या मामला इतना सीधा ? पिता,पत्नियां और पारिवार और
अनकहे सवालों की क्राइम जांच-
उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों की सामूहिक मौत को
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ऊँचाई से गिरना दर्ज है।
लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे यह सवाल भी गहराने लगा--
क्या यह मामला वाकई उतना सरल है, जितना शुरुआती पुलिस रिपोर्ट में दिखाया गया?
👉 या इसके पीछे पारिवारिक पृष्ठभूमि, मानसिक दबाव और उलझे रिश्तों की जटिलता का
कोई गहरा एंगल छिपा है?
4 फरवरी की रात, भारत सिटी सोसाइटी के लोग अचानक तेज़ आवाज़ से चौंक गए।
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
यहीं से यह मामला सिर्फ़ एक दुखद घटना नहीं, बल्कि क्राइम जांच में बदल गया।
पुलिस के अनुसार:
-तीनों बच्चियों ने खुद से ऊँचाई से छलांग लगाई
-कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद थाकाग़ज़ों में मामला सीधा दिखता है।
लेकिन क्राइम जांच सिर्फ़ काग़ज़ों से नहीं चलती।
यहीं से सवाल उठने लगते हैं
फॉरेंसिक और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ मानते हैं कि:
-सामूहिक आत्महत्या दुर्लभ होती है
-नाबालिगों में यह और भी असामान्य मानी जाती है
-तीनों का एक जैसा फैसला और एक जैसा एक्शन
क्या यह सिर्फ़ संयोग था ?
लेकिन रिपोर्ट या पुलिस ब्रीफिंग में यह साफ़ नहीं किया गया कि:
-वे कितनी दूरी पर गिरीं
-पैरों से गिरीं या सिर के बल-तीनों एक-दूसरे से कितनी पास-पास गिरीं
👉ये सभी बातें यह तय करने में मदद करती हैं कि
गिरना स्वैच्छिक था या कोई दबाव या आवेश /परिस्थिति का नतीजा।
अब वह एंगल, जिस पर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है — परिवार
इस केस में अब एक और सवाल उठ रहा है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।मीडिया रिपोर्ट्स में क्या सामने आया?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस सूत्रों के अनुसार:
-बच्चियों के पिता की पारिवारिक पृष्ठभूमि जटिल बताई जा रही है
-पिता की एक से अधिक शादियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए
-परिवार में पहले भी तनाव और अस्थिरता की बातें कही जा रही हैं
⚠️ स्पष्ट करना ज़रूरी है:
इन बातों पर पुलिस ने अब तक कोई आपराधिक आरोप दर्ज नहीं किया है।-मानसिक स्थिति को समझने के लिए अहम होता है।
सवाल 3: क्या पारिवारिक दबाव कोई भूमिका निभा सकता है?
मनोवैज्ञानिक दृष्टि से:-अस्थिर पारिवारिक माहौल
-माता-पिता के रिश्तों में उलझन
-सुरक्षा और स्थायित्व की कमी
👉 ये सभी बातें नाबालिग बच्चों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती हैं।
किन्तु इसका मतलब यह नहीं कि परिवार दोषी है, किन्तु उलझे पारिवारिक रिश्तों के कारण ऐसी
सवाल 4: क्राइम सीन री-क्रिएशन क्यों नहीं किया गया ?
अगर पुलिस:
-उसी ऊँचाई से
-समान वज़न वाले डमी या सैंडबैगतो यह साफ़ हो सकता था कि:
-खुद कूदने पर शरीर कहाँ गिरता है या कहाँ गिरना चाहिए !
-और धक्का/दबाव की स्थिति में कहाँ गिरना चाहिए !👉 अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक री-क्रिएशन सार्वजनिक नहीं किया गया।
यह सवाल गंभीर है, लेकिन तथ्यात्मक जवाब ज़रूरी है।
-सैद्धांतिक रूप से किसी भी केस में-सुसाइड नोट
-डायरी
-पोस्टमार्टम रिपोर्ट की थ्योरी के आधार पर
आत्महत्या की थ्योरी को सपोर्ट करते हुवे तहकीकात कर रहे हैं
लेकिन:
जो बातें जांच के बाहर रखी जाती हैं, वही शक को जन्म देती हैं।तो क्या यह केस पूरी तरह साफ़ है?
इस सवाल का ईमानदार जवाब है — नहीं।
✔️ मौत का कारण स्पष्ट है किन्तु -
❗ लेकिन मौत की परिस्थिति अभी भी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं
❗ पारिवारिक पृष्ठभूमि पर सवाल हैं
❗ फॉरेंसिक डिटेल्स अधूरी हैं
निष्कर्ष: यह सिर्फ़ एक त्रासदी नहीं, बल्कि एक अधूरी जांच है
यह मामला न तो अभी हत्या साबित हुआ है,
न ही इसे पूरी तरह बंद केस कहा जा सकता है।
जब तक:
-गिरने की दूरी
-पोज़िशन-आपसी दूरी
-और पारिवारिक पृष्ठभूमि की भूमिका
-पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती,
👉 तब तक यह सवाल ज़िंदा रहेगा:
क्या तीन नाबालिग बहनों की मौत वाकई उतनी सीधी है, जितनी दिखाई जा रही है?
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