Header Ads Widget

NEET 2026 Exam Centre City Slip Update

NEET UG 2026 Paper Leak- Latest News:



New Exam Centres, New City Slip, और Re-Exam की पूरी 

जानकारी

Newsbell7-क्राइम अन्वेषण डेस्क:- NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश 

परीक्षा, जिससे डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले विद्यार्थियों को देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेज में 

MBBS/BDS/BAMS आदि कोर्सेस में प्रवेश या दाखिला मिलता है, उसकी प्रवेश परीक्षा में हर साल 

परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो जाता है, जिससे ईमानदारी से पढ़ने वाले छात्रों को मेहनत के बाद भी 

प्रवेश नहीं मिल पाता, क्योंकि पेपर लीक माफिया NEET परीक्षा के पेपर पहले ही NTA से लीक 

करवाने में सफल हो जाता है और एक एक पेपर लाखों में बिक जाता है।  

इस बार फिर NEET UG 2026 फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। लाखों छात्रों और उनके परिवारों 

की मेहनत पर सवाल तब उठे जब परीक्षा के पेपर लीक होने, कुछ कोचिंग सेंटरों तक पहले से प्रश्न 

पहुंचने और कई राज्यों में संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने के आरोप सामने आए। अब इस मामले की 

जांच CBI कर रही है और देशभर में लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं।

इस पूरे विवाद के बाद NTA  यानी National Testing Agency पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्रों 

और अभिभावकों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था बार-बार क्यों फेल हो रही है। 

कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने भी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।  

NEET UG 2026 Paper Leak News:- दोबारा परीक्षा के लिए 

-Re-Exam के सेण्टर बदलने के लिए अंतिम तिथि 21 मई 2026 - 

-दो शहरों का विकल्प होगा छात्रों के पास 

-शहर नहीं बदला तब भी सेण्टर हो सकता है अलग 

पेपर लीक का मामला कैसे सामने आया? "राजस्थान फिर केंद्र में"

सूत्रों  के अनुसार राजस्थान के सीकर, जयपुर और कुछ अन्य शहरों में परीक्षा से पहले एक 

तथाकथित “गेस पेपर” वायरल हुआ था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उस गेस पेपर के लगभग 120 

से अधिक प्रश्न वास्तविक NEET परीक्षा से मेल खाते थे। एक साथ 120 पर्श्नों का एकदम मेल खा जाना 

कोई संयोग नहीं हो सकता, लीक पेपर को जानबूझ कर गैस पेपर की तरह बनाया गया, ताकि नजर में 

न आ सके, किन्तु गैस पेपर के सोशल मीडिया पर वायरल होने और बिक्री होने से सबकी नजर में आ 

गया।   

जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था। महाराष्ट्र, 
हरियाणा, 

बिहार, जम्मू-कश्मीर और केरल तक इसका कनेक्शन बताया जा रहा है।


किन शहरों और एग्जाम सेंटरों पर जांच? 

CBI और राज्य पुलिस की जांच में कई परीक्षा केंद्र और कोचिंग हब रडार पर हैं। रिपोर्ट्स में जिन 

प्रमुख शहरों का नाम सामने आया है उनमें शामिल हैं: 

-सीकर (सबसे अधिक )

-जयपुर

-नासिक

-गुरुग्राम

-लातूर

-पुणे

-दिल्ली

-बिहार के कुछ परीक्षा केंद्र

इन शहरों में प्रश्नपत्र पहुंचाने, स्कैन करने और Telegram-WhatsApp नेटवर्क के जरिए फैलाने की 

बात सामने आई है।

जांच एजेंसियों को शक है कि प्रश्नपत्र ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज के दौरान लीक हुआ। 

कुछ जगह हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर और “शैडो सर्वर” का इस्तेमाल किया गया ताकि 

डिजिटल ट्रेस छिपाया जा सके।  


CBI जांच में क्या-क्या खुलासे?

CBI ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कुछ शिक्षक, कोचिंग संचालक और 

कथित मास्टरमाइंड शामिल हैं। पुणे के एक केमिस्ट्री प्रोफेसर और एक बॉटनी शिक्षक की गिरफ्तारी 

ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के सीकर में एक व्यक्ति ने अपने बेटे के लिए कथित रूप से 10 

लाख रुपये देकर लीक पेपर खरीदा था। हालांकि छात्र का स्कोर केवल 107/720 रहा, जिससे जांच 

एजेंसियां पूरे रैकेट की फाइनेंशियल ट्रेल खंगाल रही हैं।

CBI अब सोशल मीडिया चैट, Telegram ग्रुप, WhatsApp डेटा और कोचिंग नेटवर्क की जांच कर 

रही है।  


NEET Re-Exam 2026 को लेकर क्या अपडेट?

पेपर लीक विवाद के बाद NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द किए जाने की खबरों ने छात्रों की चिंता 

और बढ़ा दी। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि री-एग्जाम 21 जून 2026 को कराया जा सकता 

है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक:

-छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा,

-पुराना आवेदन वैध रहेगा,

-नई City Intimation Slip जारी होगी,

-Admit Card दोबारा डाउनलोड करना होगा,

-कई एग्जाम सेंटर बदले जा सकते हैं,

-संवेदनशील जिलों के सेंटर हटाए जा सकते हैं।  


नए Exam Centres और City Slip में क्या बदलाव हो सकते हैं?


NTA अब उन परीक्षा केंद्रों को हटाने पर विचार कर रही है जहां सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। 

सूत्रों के अनुसार इस बार:

-CCTV निगरानी और मजबूत होगी,

-GPS ट्रैकिंग वाले ट्रांसपोर्ट सिस्टम का उपयोग हो सकता है,

-कई शहरों में सेंटर बदले जाएंगे,

-छात्रों को नई City Slip जारी की जाएगी,

-डिजिटल सुरक्षा बढ़ाई जाएगी,

- भविष्य में NEET परीक्षा को CBT यानी Computer Based Test मोड में कराया जा सकता है 

ताकि पेपर लीक की घटनाएं कम हों।


छात्रों और अभिभावकों में भारी गुस्सा

देशभर में लाखों छात्रों ने महीनों तक कोचिंग, टेस्ट सीरीज, हॉस्टल और पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च 

किए। कई परिवारों ने कर्ज लेकर बच्चों को मेडिकल की तैयारी कराई। ऐसे में पेपर लीक की खबर ने 

छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।

छात्रों का कहना है कि:

-मेहनती छात्रों के साथ अन्याय हुआ,

-परीक्षा प्रणाली पर भरोसा टूट रहा है,

-बार-बार पेपर लीक से करियर प्रभावित हो रहा,

-मानसिक तनाव और डिप्रेशन बढ़ रहा

तमिलनाडु की Child Rights Watch संस्था ने भी इस मामले को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ 

बताया है।

NTA पर क्यों उठ रहे सवाल?

National Testing Agency पहले भी कई परीक्षाओं को लेकर विवादों में रही है। NEET 2024 

विवाद के बाद 2026 में फिर से पेपर लीक जैसे आरोप सामने आने से एजेंसी की विश्वसनीयता पर 

बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।


विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में “वन डे हाई स्टेक एग्जाम मॉडल” बहुत जोखिम भरा हो चुका है। 

जब 20 लाख से अधिक छात्र एक ही दिन परीक्षा देते हैं तो छोटी सी चूक भी राष्ट्रीय संकट बन जाती है।


सीबीआई की नजर सीकर, राजस्थान पर क्यों ?


राजस्थान का सीकर पिछले कुछ वर्षों में देश का नया “मिनी कोटा” बनकर उभरा। मेडिकल और 

इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए हजारों छात्र यहां आते हैं। लेकिन अब यही शहर 

NEET UG पेपर लीक जांच के केंद्र में है। 

पिछले साल NEET 2024 के दौरान अचानक बड़ी संख्या में टॉप रैंक और असामान्य स्कोर ने सोशल 

मीडिया पर सवाल खड़े किए थे।

2024 में कई छात्रों के एक ही परीक्षा केंद्र से 07 बच्चों का टॉप रैंक लाने पर चर्चा हुई थी। उसी 

समय पेपर लीक और “ग्रेस मार्क्स” विवाद ने भी देशभर में बहस छेड़ दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट तक 

मामला पहुंचा।
 
अब 2026 के कथित पेपर लीक मामले में CBI की जांच ने एक बार फिर सीकर को राष्ट्रीय बहस के 

केंद्र में ला खड़ा किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 410 प्रश्नों का एक दस्तावेज कई दिनों पहले से सर्कुलेट हो रहा था। इसमें 

Biology और Chemistry के बड़ी संख्या में प्रश्न वास्तविक पेपर से मेल खाते बताए गए।

इस बार सवाल केवल पेपर लीक का नहीं है, बल्कि उस पूरे “कोचिंग-एग्जाम नेटवर्क” का है, जो 

कथित तौर पर वर्षों से सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा रहा था। 

जांच एजेंसियां अब यह भी देख रही हैं कि क्या पिछले वर्षों में आए असामान्य रिजल्ट और इस बार 

सामने आए पेपर लीक नेटवर्क के बीच कोई संबंध है।

अब 2026 की जांच में सीकर का नाम फिर सामने आने के बाद पुराने सवाल दोबारा उठ रहे हैं — 

क्या यह केवल संयोग था, या फिर परीक्षा माफिया पहले से सक्रिय था?


CBI की नजर में सीकर का कोचिंग नेटवर्क-

जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर केवल डिजिटल तरीके से नहीं बल्कि “फिजिकल चैन” के जरिए भी 

फैलाया गया। 

जालसाजों ने पेपर लीक कर, प्रश्नपत्र पहले हाथ से लिखा गया, फिर स्कैन करके 

PDF बनाया गया और बाद में Telegram, WhatsApp तथा कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया गया।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के कुछ लोगों ने इस पेपर को खरीदकर सीकर के कोचिंग 

हब में फैलाया। जांच में जयपुर के बिवाल परिवार का नाम भी सामने आया है।

CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

-क्या कुछ कोचिंग नेटवर्क को पहले से प्रश्न मिले थे?

-क्या टॉप स्कोर करने वाले कुछ छात्रों को अनुचित लाभ मिला?

-क्या पिछले साल भी इसी तरह की गतिविधियां हुई थीं?

-क्या “गेस पेपर” वास्तव में लीक प्रश्नपत्र था?


पिछले साल के टॉपर्स अब क्यों चर्चा में?

2024 में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर हुई थी कि कुछ खास परीक्षा केंद्रों 

और शहरों से बड़ी संख्या में टॉपर कैसे निकल आए।

हालांकि किसी भी छात्र के खिलाफ सीधे तौर पर कोई आधिकारिक आरोप साबित नहीं हुआ था, 

लेकिन जांच एजेंसियां अब पुराने डेटा को नए सबूतों से जोड़कर देख रही हैं। सूत्रों के मुताबिक CBI 

पिछले वर्षों के रिजल्ट पैटर्न, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया चैट और कोचिंग कनेक्शन की भी जांच 

कर रही है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसियों को शक है कि सीकर में दो दिन पहले से कथित 

पेपर सामग्री घूम रही थी और इसे अलग-अलग रकम में बेचा गया।


क्या 2024 और 2026 के बीच कोई लिंक है?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

फिलहाल CBI ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि 2024 के सभी टॉप स्कोर संदिग्ध थे। 

लेकिन जांच एजेंसियां अब पुराने विवादों और वर्तमान पेपर लीक नेटवर्क के बीच संभावित संबंध 

तलाश रही हैं।

यही कारण है कि सीकर का नाम जांच में बार-बार सामने आ रहा है।

जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, यदि पिछले वर्षों के डेटा और वर्तमान डिजिटल ट्रेल में कोई 

समानता मिलती है, तो जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है। और यदि ये लिंक सही पाए गए तो टॉप 

करने वाले छात्रों पर भी गाज गिर सकती है।  

CBI को अब तक क्या सबूत मिले?

जांच एजेंसियों के अनुसार:

-छात्रों की नोटबुक में असली प्रश्न मिले,

-WhatsApp और Telegram चैट बरामद,

-PDF पेपर सर्कुलेशन के संकेत,

-लाखों रुपये के लेन-देन के सुराग,

-कुछ मामलों में नकदी बरामदगी,

-कथित “स्पेशल क्लास” आयोजित होने के आरोप

(timesofindia.indiatimes.com, ndtv.com)

CBI का दावा है कि कुछ प्रश्न छात्रों की नोटबुक में “word-to-word” वास्तविक पेपर से मेल खाते हैं। 

(timesofindia.indiatimes.com


पिछले मामलों में क्या हुआ था?

2024 NEET विवाद में भी कई गिरफ्तारियां हुई थीं। CBI ने उस समय 36 से अधिक लोगों को 

गिरफ्तार किया था, जिनमें स्कूल कर्मचारी और MBBS छात्र शामिल थे। (wikipedia.org)

लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण अंतिम सजा में काफी समय लग सकता है। भारत में पेपर लीक 

मामलों में अक्सर:

-लंबी जांच,

-कोर्ट ट्रायल,

-तकनीकी सबूत,

-जमानत प्रक्रिया।  

के कारण फैसले आने में वर्षों लग जाते हैं। इस तरह के मामलों में पाय गए सबूत इतने पुख्ता नहीं 

होते, जिन्हे अदालत में सही साबित किया जा सके, इसलिए अधिकतर सबूतों को या तो सबूत नहीं 

माना जाता या बेनिफिट ऑफ़ डॉउट के कारण अपराधी आसानी से छूट जाते हैं।  

ये भी पढ़ें !

बोर्ड परीक्षा में हर वर्ष लड़कियाँ लड़कों से आगे क्यों? सच जानकर आप हैरान रह जाएंगे!