दिल्ली हॉस्टल हादसा: इमारत गिरने की असली वजह क्या थी? जांच में सामने आएंगे ये बड़े सवाल

दिल्ली हॉस्टल हादसा: इमारत आखिर क्यों गिरी? 

सामने आईं ये बड़ी वजहें




NB7-नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला हॉस्टल/पीजी की इमारत गिरने से 

कई 7 - 8 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद पूरी रात राहत और बचाव का काम चलता रहा। 

मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के कारण बचाव दल ने बेहद सावधानी से मलबा हटाया।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है—आखिर यह इमारत गिरी क्यों?

प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि हादसे के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं, बल्कि कई वजहें हो 

सकती हैं।

पुरानी और कमजोर थी इमारत :

बताया जा रहा है कि यह इमारत काफी पुरानी थी। समय के साथ किसी भी इमारत की मजबूती कम 

हो सकती है, खासकर तब जब उसकी सही तरीके से मरम्मत और जांच न की जाए।

पुरानी इमारत में अगर अतिरिक्त मंजिलें बना दी जाएं या उस पर जरूरत से ज्यादा भार हो, तो खतरा 

और बढ़ सकता है।

बेसमेंट में चल रहा था काम

रिपोर्टों के अनुसार हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। बेसमेंट में भी काम किए 

जाने की जानकारी सामने आई है।

बेसमेंट किसी भी इमारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। वहां खुदाई, दीवार हटाने या दूसरे 

बदलाव करने से जमीन और नींव पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, क्या बेसमेंट में किए गए काम की वजह से इमारत कमजोर हुई, इसकी पुष्टि जांच के 

बाद ही होगी।

पानी जमा होने की भी बात-

बेसमेंट में पानी जमा होने की बात भी सामने आई है। अगर लंबे समय तक पानी जमा रहे तो जमीन 

की मजबूती और नींव पर असर पड़ सकता है।

लेकिन यह भी अभी जांच का विषय है कि पानी वास्तव में इमारत गिरने की मुख्य वजह था या नहीं।


क्या बिना अनुमति निर्माण हुआ था?

कुछ रिपोर्टों में इमारत में अतिरिक्त निर्माण और नियमों के खिलाफ किए गए बदलावों की बात कही 

गई है। 

किन्तु लगभग पूरी दिल्ली में अनधिकृत और अधिकृत इमारतों में अनुमति से निर्माण की परम्परा नहीं 

है, अधिकतर निर्माण इमारत के मालिक अपनी मर्ज़ी से करते हैं, और इसमें सरकार से यदि अनुमति 

मांगी जाती है तो कुछ 'ले दे कर' आसानी से मिल जाती है।  यह भी तथ्य प्रत्यक्षदर्शियों से बात कर 

सामने आया है।  

दूसरा बड़ा कारण घटिया निर्माण, बिना सीमेंट कंक्रीट पिलर्स का ढांचा, पतले, कम और कमजोर 

सरिया जैसा मलबे से पता लग रहा है बताता है की बिल्डिंग सिर्फ ईंटों पर खड़ी थी और उस पर पांच 

मंजिलों का बोझ, साथ ही उसमें और निर्माण से इमारत अपने ही बोझ से ढह गयी।  

अगर किसी पुरानी इमारत में बिना विशेषज्ञ की सलाह के बड़े बदलाव किए जाएं, तो उसकी मूल 

संरचना प्रभावित हो सकती है।

लेकिन इस मामले में किस तरह का निर्माण हुआ था और वह कानूनी था या नहीं, इसका फैसला 

जांच के बाद ही किया जा सकता है।


असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इमारत केवल एक वजह से गिरी।

संभावना है कि पुरानी इमारत, उसकी संरचनात्मक कमजोरी, मरम्मत का काम, बेसमेंट में 

बदलाव और पानी जैसी कई परिस्थितियों ने मिलकर खतरा पैदा किया हो।

अब जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि इमारत की आखिरी बार संरचनात्मक जांच कब हुई 

थी, मरम्मत के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं और काम के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया 

गया था या नहीं।


किन्तु मलबा क्या कहानी बता रहा है?

हादसे के बाद मलबे को देखने पर सबसे बड़ा सवाल इमारत की संरचनात्मक मजबूती को लेकर 

उठता है। मलबे में जिस तरह के ईंटों सीमेंट न के बराबर कॉलम और सरिये दिखाई दे रहे हैं, उससे 

यह सवाल जरूर पैदा होता है कि क्या यह ढांचा मूल रूप से इतनी मंजिलों का भार उठाने के लिए 

बनाया गया था?

बताया जा रहा है कि इमारत करीब 50 साल पुरानी थी। यदि मूल निर्माण उस समय एक या दो 

मंजिलों के लिए किया गया था और बाद के वर्षों में उसमें अतिरिक्त कमरे या मंजिलें जोड़ी गईं, तो यह 

जांच का बेहद महत्वपूर्ण बिंदु है।

“इस हादसे की जांच में मलबा खुद कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है। टूटी हुई संरचना, दिखाई दे 

रहे सरिये और निर्माण का तरीका देखकर प्रारंभिक सवालों के जवाब मौके पर ही तलाशे जा सकते हैं।

हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए स्ट्रक्चरल इंजीनियर की जांच जरूरी है। यानी जांच के लिए किसी 

जटिल पहेली से ज्यादा जरूरी है—मलबे में मौजूद सबूतों को सही तरीके से पढ़ना।”


रातभर क्यों चला रेस्क्यू ऑपरेशन?

इमारत गिरने के बाद मलबा बहुत ज्यादा था। उसके नीचे लोगों के फंसे होने की आशंका थी।

NDRF, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने मशीनों और 

दूसरे उपकरणों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जल्दबाजी करना भी खतरनाक हो सकता था, क्योंकि मलबे का कोई हिस्सा 

अचानक गिर सकता था। इसलिए टीमों ने सावधानी से एक-एक हिस्सा हटाया और अंदर फंसे लोगों 

की तलाश की।


बड़ा सवाल: क्या हादसा रोका जा सकता था ?

यह सवाल अब सबसे महत्वपूर्ण है।

अगर इमारत पुरानी थी और उसमें बड़े स्तर पर मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा था, तो यह 

देखना जरूरी था कि उसकी Structural Safety यानी संरचनात्मक सुरक्षा की जांच हुई थी या 

नहीं।

यदि निर्माण कार्य चल रहा था तो निर्माण के दौरान इमारत खाली क्यों नहीं की गयी थी।

इस इमारत के दस कदम पर ही MCD का ऑफिस भी है, यानी सरकारी ऑफिसरों की नजर के 

ठीक नीचे लापरवाही की कहानी लिखी गयी।

अभी और कितनी इमारतें ऐसी हैं जो खतरनाक हैं और कभी भी गिर सकती हैं, किन्तु उनमें लोग रह 

रहे हैं ?

हॉस्टल और पीजी में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। इसलिए ऐसी इमारतों की सुरक्षा में किसी भी तरह 

की लापरवाही भारी पड़ सकती है।

हादसे की पूरी सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी। लेकिन यह घटना दिल्ली में 

पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा जांच पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा करती है 


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