212 अफसरों से सिर्फ 6 नाम, फिर ज्ञानेश कुमार और संधू पर मुहर: क्या 2024 में CEC की कहानी पहले ही लिखी जा चुकी थी?
यही वह बिंदु है जहां से 212 → 6 → 2 की कहानी शुरू होती है।
212 अधिकारियों की सूची से आखिर 6 नाम कैसे निकले?
2024 में Election Commission में दो Election Commissioner पद खाली हुए थे। चयन समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और तत्कालीन विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी शामिल थे।
अधीर रंजन चौधरी के अनुसार उन्हें रात में 212 अधिकारियों की विस्तृत सूची दी गई थी। उनका कहना था कि छह shortlisted नाम बैठक शुरू होने से लगभग 8–10 मिनट पहले साझा किए गए।
चौधरी ने यह भी कहा था कि उन्होंने shortlisted अधिकारियों के bio-profiles पहले उपलब्ध कराने की मांग की थी ताकि वह उनकी योग्यता और प्रशासनिक रिकॉर्ड की समीक्षा कर सकें।
छह shortlisted नाम कौन-कौन से थे?
| # | अधिकारी | 2024 में परिणाम |
|---|---|---|
| 1 | उत्पल कुमार सिंह | चयनित नहीं |
| 2 | प्रदीप कुमार त्रिपाठी | चयनित नहीं |
| 3 | ज्ञानेश कुमार | Election Commissioner |
| 4 | इंदेवर पांडे | चयनित नहीं |
| 5 | सुखबीर सिंह संधू | Election Commissioner |
| 6 | सुधीर कुमार गंगाधर राहाटे | चयनित नहीं |
सबसे बड़ा सवाल यहीं से उठता है
212 नामों की बड़ी सूची से छह नाम सामने आए। फिर उन्हीं छह में से दो नाम चुने गए।
लेकिन क्या इन छह नामों तक पहुंचने की प्रक्रिया और selection criteria विपक्षी सदस्य को पर्याप्त समय और जानकारी के साथ उपलब्ध कराए गए थे?
यही procedural objection 2024 में अधीर रंजन चौधरी के विरोध का प्रमुख आधार था।
“क्या हुआ था?” — पूरी कहानी Timeline में
Election Commission में दो पद खाली हुए
Anup Chandra Pandey के retirement और Arun Goel के resignation के बाद Election Commission में दो Election Commissioner पद खाली हुए।
छह नाम shortlist हुए
Selection process के दौरान छह अधिकारियों के नाम सामने आए। अधीर रंजन चौधरी के अनुसार उन्हें shortlist की जानकारी बैठक से कुछ मिनट पहले मिली।
ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू का चयन
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को Election Commissioners के रूप में चुनने की सिफारिश की।
दोनों ने Election Commissioner का पद संभाला
ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने Election Commissioners के रूप में कार्यभार संभाला। यहाँ से ज्ञानेश कुमार के CEC की कुर्सी तक पहुँचने का पहला रास्ता बनाया गया।
ज्ञानेश कुमार बने 26वें Chief Election Commissioner
Election Commission के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें Chief Election Commissioner के रूप में कार्यभार संभाला। यहीं से ज्ञानेश के चयन पर सवाल खड़े होने लगे थे, 370 के बाद ज्ञानेश कुमार की भूमिका SIR के लिए CEC के पद पर बिठाने की तैयारी को लेकर संदेह खड़े करती है।
SIR और Election Commission की कार्यप्रणाली पर विवाद
Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर Election Commission की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक और कानूनी सवाल उठे और मामला अदालतों तक पहुंचा। SIR के लिए ज्ञानेश कुमार को क्यों चुना गया ? इसका सीधा जवाब धारा 370 के हटाने में ज्ञानेश कुमार की भूमिका तक जाता है।
Article 370 के समय ज्ञानेश कुमार की भूमिका क्यों चर्चा में आती है?
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के Kerala cadre के IAS अधिकारी रहे हैं। 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े Article 370 के घटनाक्रम के समय वह गृह मंत्रालय में Additional Secretary के पद पर थे।
बाद में उन्होंने Parliamentary Affairs Secretary और Cooperation Secretary जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। 31 जनवरी 2024 को वह सरकारी सेवा से retire हुए और कुछ ही सप्ताह बाद Election Commissioner नियुक्त किए गए।
Article 370 से जुड़े प्रशासनिक काम में भूमिका होना अपने आप में किसी राजनीतिक पक्षधरता का प्रमाण नहीं है। इसी तरह Election Commissioner नियुक्त होना भी अपने आप में यह साबित नहीं करता कि नियुक्ति पहले से तय थी।
2024 की नियुक्ति से 2025 की CEC कुर्सी तक
2024 में Election Commissioner बनने के बाद ज्ञानेश कुमार ने Lok Sabha और कई राज्य चुनावों से जुड़े Election Commission के कामकाज में भूमिका निभाई।
19 फरवरी 2025 को Election Commission के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने भारत के 26वें Chief Election Commissioner के रूप में कार्यभार संभाला।
यही वह अगला पड़ाव था जिसने 2024 की नियुक्ति को पीछे मुड़कर देखने का कारण दिया — खासकर इसलिए क्योंकि वह Election Commission में आने के लगभग एक साल बाद ही CEC बन गए।
SIR विवाद: अब सवाल सिर्फ 2024 की नियुक्ति तक सीमित नहीं
2026 में Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar की कार्यप्रणाली पर नए सवाल उठे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने SIR से जुड़े कई फैसलों या प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों को लेकर अदालतों में याचिकाएं पहुंचीं।
Form 6 विवाद ने SIR मामले को और गंभीर क्यों बनाया?
Form 6 मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला महत्वपूर्ण electoral form है।
5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI Surya Kant ने स्पष्ट किया कि अदालत ने Form 6 में किए गए किसी modified declaration को approve नहीं किया था।
अदालत अब रिकॉर्ड के आधार पर यह देख रही है कि संबंधित बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी थी।
रिपोर्टों में Election Commissioners की ओर से SIR से जुड़े कई फैसलों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। मामला न्यायिक जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
आरोप क्या हैं और ECI का पक्ष क्या है?
याचिकाओं और आलोचकों के सवाल
• क्या कुछ SIR फैसलों में सभी Election Commissioners की राय को पर्याप्त महत्व दिया गया?
• Form 6 में अतिरिक्त declaration किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया?
• क्या electoral-roll revision की प्रक्रिया पर्याप्त पारदर्शी थी?
• क्या मतदाताओं को पर्याप्त जानकारी और अवसर मिला?
ECI की स्थिति
Election Commission ने SIR से जुड़े अपने कदमों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है और आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन आरोपों को अंतिम रूप से सही नहीं ठहराया है। अदालत संबंधित रिकॉर्ड और पक्षों के जवाब के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
तो क्या 2024 में CEC की कहानी पहले ही लिखी जा चुकी थी?
सार्वजनिक रिकॉर्ड अभी इतना साबित नहीं करता।
रिकॉर्ड यह जरूर दिखाता है कि 2024 में 212 अधिकारियों की सूची, छह shortlisted नाम और फिर ज्ञानेश कुमार तथा सुखबीर सिंह संधू के चयन को लेकर विपक्षी सदस्य ने procedural objections उठाए थे।
बाद में ज्ञानेश कुमार 2025 में CEC बने और 2026 में उनके नेतृत्व वाली Election Commission की SIR प्रक्रिया से जुड़े विवाद अदालत तक पहुंचे।
इसलिए असली investigative question यह है:
क्या Election Commission जैसी संवैधानिक संस्था के शीर्ष पदों की नियुक्ति प्रक्रिया इतनी पारदर्शी है कि जनता उसके फैसलों पर बिना संदेह भरोसा कर सके?
NB7 निष्कर्ष: सवाल सिर्फ ज्ञानेश कुमार का नहीं
212 → 6 → 2 की कहानी को केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति के रूप में देखना पूरी बहस को छोटा कर देता है।
असली मुद्दा है — Election Commission जैसी संवैधानिक संस्था में नियुक्ति कितनी पारदर्शी है? चयन समिति के प्रत्येक सदस्य को उम्मीदवारों की जानकारी कितनी पहले मिलती है? और क्या विपक्षी सदस्य को वास्तविक scrutiny का पर्याप्त अवसर मिलता है?
2024 में उठी procedural objections और 2026 में SIR को लेकर चल रही न्यायिक कार्यवाही दो अलग घटनाएं हैं। इनके बीच सीधा राजनीतिक संबंध होने का निष्कर्ष सार्वजनिक रिकॉर्ड से अपने आप नहीं निकाला जा सकता।
लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है।
Election Commission पर जनता का भरोसा केवल कानून से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष प्रक्रिया की सार्वजनिक धारणा से भी जुड़ा है।
रिपोर्ट में इस्तेमाल प्रमुख सार्वजनिक स्रोत
- Election Commission of India — Gyanesh Kumar का official profile और 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में कार्यभार ग्रहण करने का रिकॉर्ड।
- Indian Express — 14 मार्च 2024 की रिपोर्ट और Adhir Ranjan Chowdhury का 212 अधिकारियों तथा छह shortlisted नामों को लेकर बयान।
- Indian Express — Gyanesh Kumar की 2019 Article 370 के दौरान गृह मंत्रालय में भूमिका से संबंधित background report।
- Supreme Court proceedings और 5 अक्टूबर 2026 की Form 6/SIR सुनवाई से संबंधित सार्वजनिक रिपोर्टें।