पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों और विश्लेषणों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
"इस्लामाबाद का क्षण" (Islamabad's Moment): 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के एक प्रमुख लेख
भारत की दुविधा (India's Dilemma): पाकिस्तानी अखबारों का मानना है कि भारत अब एक
कूटनीतिक संकट में है। लेख में जिक्र है कि भारत ने शेख हसीना में बहुत अधिक निवेश किया था,
लेकिन अब तारिक रहमान की सरकार हसीना के प्रत्यर्पण (extradition) की मांग कर सकती है, जो
भारत के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव: पाकिस्तानी मीडिया का विश्लेषण है कि बांग्लादेश अब भारत पर अपनीऐतिहासिक संबंधों की बहाली की उम्मीद: पाकिस्तानी मीडिया इस बात को रेखांकित कर रहा है कि
कुल मिलाकर, पाकिस्तानी मीडिया इसे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भारत के दबदबे के कम
लेकिन क्या यह सच है?
क्या एक आर्थिक रूप से कंगाल पाकिस्तान वाकई बांग्लादेश के लिए भारत का विकल्प बन सकता है?
या फिर पाकिस्तानी मीडिया सिर्फ अपनी कल्पनाओं के घोड़े दौड़ा रहा है? आइए इसका गहराई से
विश्लेषण करते हैं।
हसीना युग का अंत: शेख हसीना के कार्यकाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते सबसे निचले
बीएनपी का इतिहास: तारिक रहमान की पार्टी (BNP) का झुकाव ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान के
भारत को झटका देने की चाहत: कश्मीर और अन्य मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ा
2. हकीकत का आईना: पाकिस्तान बनाम भारत (आर्थिक और सामरिक तुलना)
पाकिस्तानी मीडिया यह भूल रहा है कि 2026 का बांग्लादेश वह 1971 वाला पूर्वी पाकिस्तान नहीं है।| तुलनात्मक बिंदु | भारत | पाकिस्तान | बांग्लादेश के लिए महत्व |
| अर्थव्यवस्था (GDP) | $4 ट्रिलियन+ | लगभग $340 बिलियन (संकट में) | भारत एक विशाल बाजार और निवेशक है। |
| मुद्रा भंडार | $700 बिलियन+ | $10 बिलियन से कम (उधार पर निर्भर) | पाकिस्तान खुद दिवालिया होने की कगार पर है। |
| कनेक्टिविटी | तीन तरफ से सीमा और समुद्री मार्ग | कोई सीधी भौगोलिक सीमा नहीं | व्यापार के लिए भारत अनिवार्य है। |
| निर्यात | वैश्विक हब | बेहद कम | बांग्लादेश को कच्चा माल भारत से मिलता है। |
प्रश्न यह है: क्या तारिक रहमान एक ऐसे देश (पाकिस्तान) की ओर झुकेंगे जो खुद चीन और IMF की
बैसाखियों पर टिका है?
3. तारिक रहमान की दुविधा: 'न दिल्ली, न पिंडी'
तारिक रहमान ने अपने शुरुआती बयानों में "बांग्लादेश फर्स्ट" की नीति की बात की है। वह जानते हैं कि:-भारत एक मजबूत पड़ोसी है: भारत के साथ 4000 किमी से लंबी सीमा साझा करने वाला देश
चीन का प्रभाव: अगर रहमान भारत से दूर जाते हैं, तो वह पाकिस्तान के पास नहीं बल्कि चीन के
पास जाएंगे। पाकिस्तान के पास बांग्लादेश को देने के लिए न तो पैसा है और न ही तकनीक। हाँ
पकिस्तान उनसे भी लोन जरूर मांग लेगा।
क्या पाकिस्तानी मीडिया 'ओवरसेलिब्रेट' कर रहा है? जैसे वे अक्सर क्रिकेट मैच में भी भारत को
हराने के सपने देखने लगता है और मैच हार कर सिर्फ रोना और टीवी तोड़ने जैसी हरकतें करता नजर
आता हैं।
बिलकुल वैसे ही, पाकिस्तानी मीडिया का यह सोचना कि तारिक रहमान आते ही भारत से रिश्ते तोड़ लेंगे,
पूरी तरह से वास्तविकता से परे है।
वैसे भी अभी ऊंट को बैठने तो दो, कल्पना के घोड़े दौड़ाना थोड़ी ज्यादा जल्दी होगी।
सुरक्षा चिंताएं: यदि रहमान ने 2001 वाली गलती दोहराई और उत्तर-पूर्व भारत के उग्रवादियों को
पनाह दी, तो भारत के पास 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'आर्थिक नाकेबंदी' जैसे कड़े विकल्प मौजूद हैं।
