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Why Computer Prices Rising India

लैपटॉप खरीदना हुआ महंगा: कंप्यूटर और कम्प्यूटर पार्ट्स के बढ़ते दाम के पीछे ये 5 बड़े कारण




Computer Parts Prices Skyrocket: 

China Imports, Chip Shortage Explained

कंप्यूटर और कंप्यूटर पार्ट्स के दाम क्यों चढ़ रहे हैं?

 

NewsBell7 विशेष रिपोर्ट

पिछले डेढ़–दो साल में कंप्यूटर, लैपटॉप और उनके पार्ट्स की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है। बाजार में नया सिस्टम खरीदना महंगा हुआ ही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुराने पार्ट्स — जैसे RAM, SSD, ग्राफिक्स कार्ड, मदरबोर्ड — इनके रेट भी काफी ऊपर चले गए हैं। कई जगहों पर कीमतें लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ चुकी हैं।

खासकर नए स्टूडेंट्स और मिडिल क्लास खरीदार यह समझ नहीं पा रहे कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट सस्ते होने की बजाय महंगे होते जा रहे हैं।

इस रिपोर्ट में हम आसान, सामान्य भाषा में समझेंगे:

--कीमतें क्यों बढ़ रही हैं

--क्या चीन से इम्पोर्ट और करेंसी रेट इसका बड़ा कारण है

--क्या सिर्फ भारत में महंगाई है या पूरी दुनिया में

--स्टूडेंट्स को अभी खरीदना चाहिए या रुकना चाहिए

--आगे कीमतों का ट्रेंड कैसा रह सकता है


सबसे पहले समझें — किन चीजों के दाम बढ़े हैं? 


बाजार में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इन पार्ट्स में देखी जा रही है:

1-RAM (मेमोरी)

2 - SSD / NVMe स्टोरेज

3 - ग्राफिक्स कार्ड (GPU)

4 - मदरबोर्ड

5 - लैपटॉप

6 - हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर वाले सिस्टम

7 - सेकेंड-हैंड (पुराने) पार्ट्स

पहले जो RAM या SSD बहुत सस्ते मिल जाते थे, आज वही काफी महंगे हो गए हैं। कई दुकानदार 

कहते हैं कि नया स्टॉक ही महंगा आ रहा है।


क्या ज्यादातर कंप्यूटर पार्ट्स चीन से इम्पोर्ट होते हैं?

सीधा जवाब — हाँ, काफी हद तक।

दुनिया के ज्यादातर कंप्यूटर पार्ट्स का:

-निर्माण

-असेंबली

-पैकेजिंग


या तो सीधे चीन में होती है, या चीन आधारित सप्लाई चेन से जुड़ी होती है।

कई बड़ी टेक कंपनियाँ अपने पार्ट्स का निर्माण या असेंबली चीन में करवाती हैं। इसके अलावा चिप 

और मेमोरी बनाने वाली कंपनियाँ — जैसे Samsung Electronics और Micron Technology — 

भले दूसरे देशों की हों, लेकिन उनकी सप्लाई चेन एशिया में फैली हुई है।

इसका मतलब:
👉 अगर चीन या एशिया क्षेत्र में लागत बढ़ती है — तो पूरी दुनिया में पार्ट्स महंगे हो जाते हैं।


गिरता रुपया  — डॉलर महंगा =  सभी पार्ट्स महंगे


यह एक बहुत बड़ा कारण है जिसे आम खरीदार अक्सर नजरअंदाज कर देता है।

भारत में आने वाले ज्यादातर कंप्यूटर पार्ट्स की कीमत डॉलर में तय होती है। जब:

डॉलर मजबूत होता है

और भारतीय रुपया कमजोर होता है तो इम्पोर्ट की लागत अपने आप बढ़ जाती है।

मतलब :

पहले जो पार्ट $100 में आता था, अगर डॉलर रेट बढ़ गया — तो वही पार्ट भारत में ज्यादा रुपये में 

पड़ेगा।

इसका सीधा असर पड़ता है:

-कंप्यूटर पार्ट्स पर

-लैपटॉप पर

-IT एक्सेसरीज़ पर


यानी करेंसी रेट भी कीमत बढ़ने का एक प्रमुख कारण है — सिर्फ कंपनी की मनमानी नहीं।


मेमोरी और चिप की वैश्विक कमी — बड़ा कारण

दुनिया भर में अभी मेमोरी चिप और स्टोरेज चिप की भारी मांग चल रही है। कारण:

-बड़े डेटा सेंटर बन रहे हैं

-क्लाउड सर्वर बढ़ रहे हैं

-हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग बढ़ी है

-एडवांस सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन सिस्टम ज्यादा संसाधन मांगते हैं

मेमोरी और स्टोरेज बनाने वाली कंपनियाँ पहले बड़े सर्वर और एंटरप्राइज ग्राहकों को सप्लाई दे रही हैं 

— कंज्यूमर मार्केट को बाद में।

नतीजा:

📈 RAM और SSD महंगे


📈 लैपटॉप कॉन्फ़िगरेशन महंगे


📈 अपग्रेड करना भी महंगा

-इसके साथ साथ यदि आप पुराने कंप्यूटर पार्ट्स से अपग्रेड करना चाहते हैं वह भी लगभग नए पार्ट्स 

के आसपास महंगा बिक रहा है क्योंकि अचानक पुराने पार्ट्स की डिमांड बेहतहाशा बढ़ गयी है, 

पुराना कंप्यूटर का सामान बेचने वाले अब पूरा फायदा उठा रहे हैं।  


2021–22 में कंप्यूटर पार्ट्स की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं, लेकिन 2023 के बाद मेमोरी और

 स्टोरेज चिप की वैश्विक कमी, चीन-आधारित सप्लाई चेन दबाव, डॉलर की मजबूती और 

अमेरिका-चीन टैरिफ तनाव के असर से कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया।

2024 से 2026 के बीच RAM और SSD सेगमेंट में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज हुई, जिसका सीधा 

असर लैपटॉप और डेस्कटॉप सिस्टम की कुल कीमत पर पड़ा।

सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक खर्च भी बढ़ा

दुनिया भर में शिपिंग, कंटेनर, ट्रांसपोर्ट और बीमा का खर्च भी बढ़ा है।

जब फैक्ट्री से पार्ट निकलता है, तब तक वह सस्ता होता है — लेकिन:


-शिपिंग

-कस्टम ड्यूटी

-ट्रांसपोर्ट

-टैक्स


जुड़ते-जुड़ते अंतिम कीमत काफी बढ़ जाती है।


क्या महंगाई सिर्फ भारत में है?


नहीं। यह बहुत जरूरी बात है — यह समस्या सिर्फ भारत की नहीं है।

इन देशों में भी कंप्यूटर पार्ट्स महंगे हुए हैं:

-अमेरिका

-यूरोप के कई देश

-एशिया के टेक मार्केट

-ऑस्ट्रेलिया

-भारत में कीमतें इसलिए ज्यादा महसूस हो रही हैं क्योंकि:

यहां ज्यादातर पार्ट्स इम्पोर्ट होते हैं

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ

टैक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी भी जुड़ती है
लेकिन ग्लोबल लेवल पर भी RAM, SSD और GPU की कीमतें ऊपर गई हैं — यह एक विश्वव्यापी 

ट्रेंड है।


फिर पुराने पार्ट्स भी महंगे क्यों हो गए?


यह बात लोगों को सबसे ज्यादा चौंकाती है।

कारण:

1️⃣ नए पार्ट्स महंगे → लोग पुराने पार्ट्स खरीद रहे

2️⃣ डिमांड बढ़ी → सेकेंड-हैंड मार्केट में तेजी

3️⃣ स्टॉक कम → दुकानदार ज्यादा दाम मांग रहे

4️⃣ अपग्रेड करने वाले लोग पुराने पार्ट्स बेचने की बजाय रोक रहे

इसलिए: 
Used market भी अब सस्ता नहीं रहा।


ग्रेजुएशन स्टूडेंट्स के लिए खास — कैसे प्लान करें लैपटॉप खरीद? 

अगर आप नया स्टूडेंट हैं और लैपटॉप खरीदना चाहते हैं, तो बिना प्लानिंग के न खरीदें।

✅ पहले जरूरत समझें

हर स्टूडेंट को हाई-एंड लैपटॉप नहीं चाहिए।

सामान्य ग्रेजुएशन के लिए पर्याप्त:

i5 / Ryzen 5 लेवल प्रोसेसर

16GB RAM (अगर संभव हो)

512GB SSD

अच्छी बैटरी

भरोसेमंद ब्रांड


बजट रेंज तय करें

आज के बाजार में:

-बेसिक स्टडी लैपटॉप: 40–55 हजार

-बेहतर परफॉर्मेंस: 55–75 हजार

-हाई-परफॉर्मेंस: 75 हजार+


कीमतें पहले से ज्यादा हैं — इसलिए बजट पहले तय करें।


अभी खरीदें या रुकें?

अभी खरीदें अगर:

-कोर्स शुरू हो रहा है

-तुरंत जरूरत है

-पुराना सिस्टम काम नहीं कर रहा


रुक सकते हैं अगर:

-3–6 महीने इंतज़ार संभव है

-आपका काम अभी पुराने सिस्टम से चल रहा है

-बड़े फेस्टिव सेल आने वाले हैं

ध्यान रखें — कीमतें अचानक आधी होने की संभावना कम है, लेकिन ऑफर पीरियड में कुछ राहत 

मिल सकती है


खरीदते समय यह करें

फेस्टिव सेल देखें


✔ बैंक ऑफर चेक करें


✔ स्टूडेंट डिस्काउंट पूछें

✔ वारंटी जरूर लें


✔ RAM अपग्रेड स्लॉट वाला मॉडल लें


Refurbished certified भी देखें


आगे क्या कीमतें और बढ़ेंगी?

टेक मार्केट एक्सपर्ट्स का सामान्य अनुमान:

मेमोरी और स्टोरेज की मांग अभी ऊँची रहेगी

करेंसी रेट भी असर डालते रहेंगे

सप्लाई धीरे-धीरे सुधरेगी, पर तुरंत नहीं


मतलब: 

📌 बहुत बड़ी गिरावट तुरंत संभव नहीं


📌 स्थिरता आ सकती है


📌 ऑफर-आधारित राहत मिल सकती है


ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और कंप्यूटर मार्केट का संबंध


टैरिफ और जवाबी टैरिफ (चीन और अमेरिका दोनों ने एक दूसरे के सामान पर शुल्क लगाये) के कारण:

📌 इलेक्ट्रॉनिक सामान और कंप्यूटर से जुड़े सामान पर टैरिफ की अनिश्चितता बढ़ी।  

📌 सप्लाई-चेन में अस्थिरता आई।  

📌 कंपनियों ने संभावित टैक्स लागत को अपने निर्माण मूल्य में जोड़ना शुरू किया। 


यू.एस.-चीन व्यापार तनाव ने सारी अंतरराष्ट्रीय सप्लाई-चेन को अस्थिर किया है, जिससे विश्व भर में 

टेक्नोलॉजी सरल लागत-मूल्य तंत्र से बाहर हो गई।

✔ जबकि कुछ उत्पादों को बाद में छूट दी गई, अनिश्चितता बनी रही जिससे निर्माता लागत प्रबंधन के 

लिए कीमतें बढ़ाये हैं।

यह एक “ट्रिगर या माचिस की तरह” रहा? 

टैरिफ पॉलिसी ने दो बड़े तरीके से कंप्यूटर बाजार पर अप्रत्यक्ष असर डाला है:

🔹 (A) सप्लाई-चेन अस्थिरता बढ़ी

टैरिफ की घोषणा से कंपनियों को माल के आयात पर लागत और अनिश्चितता जुड़ी, जिसके कारण 

कंपनियों ने शेयर प्राइस, लागत संरचना और मूल्य निर्धारण पर सोच बदल दी।

👉 इससे निर्माताओं ने पहले से ही कीमतें ऊँची रखने का रुख अपनाया।

🔹 (B) वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू

कंपनियाँ चीन पर निर्भरता कम करने और अन्य देशों में उत्पादन शिफ्ट करने में लगी हैं। यह प्रक्रिया 

महंगी और समय लेने वाली है, जिसके कारण ट्रांज़िशन स्टेज में कीमतें स्थिर नहीं हो पा रही हैं


सरल शब्दों में पूरी बात

कंप्यूटर और पार्ट्स महंगे होने के मुख्य कारण:

चीन और एशिया से भारी इम्पोर्ट निर्भरता

डॉलर मजबूत, रुपया कमजोर

मेमोरी और चिप की वैश्विक कमी

सप्लाई चेन खर्च

बढ़ती टेक डिमांड

सेकेंड-हैंड मार्केट में भी अचानक ज्यादा मांग (पुराने लैपटॉप बेचने वाले भी काट रहे चांदी )

👉 असर सिर्फ भारत पर नहीं — पूरी दुनिया में कीमतें बढ़ी हैं


👉 स्टूडेंट्स को घबराकर नहीं, प्लान बनाकर खरीदना चाहिए


👉 जरूरत, बजट और समय — तीनों देखकर फैसला लें