Delhi BJP Government ₹750 Crore Scam?
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी के बाद अब दिल्ली बीजेपी सरकार पर हॉस्पिटल खरीद में करोड़ों के घोटाला का आरोप
NB7 - नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
दिल्ली में 27 वर्षों बाद सत्ता में लौटी सरकार अब अपने पहले ही वर्ष में सरकारी अस्पतालों की खरीद को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विपक्ष का आरोप है कि अस्पतालों के लिए खरीदे गए सामान में बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत चुकाई गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
हालांकि, सरकार ने इन आरोपों पर आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्या हैं आरोप?
विपक्ष का दावा है कि दिल्ली सरकार ने अस्पतालों को पहले मिलने वाली स्वतंत्र खरीद (Local Purchase) की सुविधा समाप्त कर दी। इसके बाद सभी अस्पतालों के लिए सामान की केंद्रीकृत खरीद शुरू की गई।
आरोप है कि इसी केंद्रीकृत खरीद में भारी मूल्य वृद्धि दिखाई गई।
ORS पैकेट पर आरोप
सबसे बड़ा आरोप ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) पैकेट की खरीद को लेकर लगाया गया है।
विपक्ष का दावा है कि—
- बाजार में उपलब्ध ORS पैकेट की कीमत लगभग 10–12 रुपये है।
- लेकिन सरकारी खरीद में वही पैकेट लगभग 205 रुपये प्रति यूनिट खरीदा गया।
- यानी प्रति पैकेट लगभग 190–195 रुपये अतिरिक्त भुगतान किया गया।
यदि यह दावा सही पाया जाता है तो केवल ORS की खरीद में ही करोड़ों रुपये के अतिरिक्त भुगतान का मामला बन सकता है।
चादरों की खरीद पर भी सवाल
आरोप केवल ORS तक सीमित नहीं हैं।
विपक्ष का कहना है कि—
- सामान्य अस्पताल बेडशीट, जिसकी बाजार कीमत लगभग 150 रुपये बताई जा रही है,
- उसे सरकारी खरीद में लगभग 450 रुपये प्रति चादर खरीदा गया।
यानी प्रत्येक चादर पर लगभग 300 रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए।
20 लाख चादरों की खरीद पर उठे सवाल
सबसे अधिक चर्चा उस दावे की हो रही है जिसमें कहा गया है कि सरकार ने 20 लाख से अधिक चादरों की खरीद की।
विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में लगभग 15,000 बेड ही उपलब्ध हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में चादरों की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी?
यदि 15,000 बेड मान लिए जाएं, तब भी 20 लाख चादरों की खरीद सामान्य आवश्यकता से कहीं अधिक दिखाई देती है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि खरीद कितने वर्षों की आवश्यकता, रिजर्व स्टॉक, आपदा प्रबंधन या अन्य किसी योजना के लिए की गई थी।
750 करोड़ रुपये की खरीद पर सवाल
विपक्ष का आरोप है कि अस्पतालों से संबंधित खरीद प्रक्रिया में कुल लगभग 750 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।
इन आरोपों में कहा जा रहा है कि—
- बाजार दरों की अनदेखी की गई,
- प्रतिस्पर्धी खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई,
- और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विपक्ष ने क्या मांग की?
विपक्ष ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच—
- स्वतंत्र एजेंसी,
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG),
- अथवा न्यायिक आयोग
से कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सरकार का पक्ष
इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं था। यदि सरकार अपनी प्रतिक्रिया जारी करती है तो उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाना चाहिए।
मुख्य सवाल
- क्या वास्तव में ORS पैकेट बाजार मूल्य से कई गुना महंगे खरीदे गए?
- क्या अस्पतालों की स्थानीय खरीद व्यवस्था समाप्त होने से प्रतिस्पर्धा कम हुई?
- 15,000 बेड वाले अस्पताल तंत्र के लिए 20 लाख से अधिक चादरों की आवश्यकता कैसे बनी?
- क्या खरीद प्रक्रिया सभी सरकारी नियमों के अनुसार हुई?
अंत में
यदि लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी खरीद अनियमितताओं में से एक हो सकती है। वहीं यदि सरकार इन आरोपों का तथ्यात्मक खंडन करती है, तो उससे भी स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए अंतिम निष्कर्ष किसी सक्षम जांच एजेंसी की जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
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