भारतियों में BP, शुगर और हार्ट डिजीज क्यों बढ़ रही है? कौन से कारण हैं इसके पीछे ?

NB7 विशेष स्वास्थ्य रिपोर्ट

भारतीय जीवनशैली के 10 कड़वे सच: जिनकी कीमत हमारा शरीर चुका रहा है



रोटी-चावल, नमक-तेल, चाय-नमकीन, कम होती शारीरिक मेहनत, पेट की चर्बी और वर्षों पुरानी खान-पान की आदतों पर वैज्ञानिक पड़ताल।

क्या हमारी सबसे बड़ी गलती यह है कि हम खाना सिर्फ पेट भरने के लिए खाते हैं, शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए नहीं?

भारत में स्वास्थ्य की तस्वीर बदल रही है। घर का खाना अभी भी हमारी ताकत है, लेकिन सवाल यह है कि उस घर के खाने में क्या और कितना है? थाली में रोटी या चावल कितने हैं, दाल या दूसरे protein sources कितने हैं, सब्जियां कितनी हैं, नमक कितना है, तेल कितना है और दिनभर शरीर कितना चलता है— यही बातें धीरे-धीरे हमारे metabolic health को प्रभावित कर सकती हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि बीमारी का दोष किसी एक भोजन पर डालना सही नहीं होगा। रोटी बीमारी नहीं है। चावल बीमारी नहीं है। शाकाहारी भोजन अपने-आप खराब नहीं है और मांस अपने-आप दवा नहीं है। असली सवाल है—पूरी lifestyle और पूरी थाली का balance क्या है?

पहले आंकड़े देखिए—फिर अपनी थाली देखिए

30% 30–79 वर्ष के वयस्कों में hypertension का WHO 2024 अनुमान
21.02 करोड़ लगभग इतने adults hypertension के साथ
17.39 करोड़ Hypertension वाले लोगों में BP controlled नहीं
10 g/day WHO profile में estimated mean population salt intake

WHO की 2025 India hypertension profile के अनुसार 2024 में 30–79 वर्ष की उम्र के adults में hypertension की prevalence लगभग 30% थी। अनुमानित 21.02 करोड़ adults hypertension के साथ थे और लगभग 17.39 करोड़ लोगों का blood pressure controlled नहीं था। यानी समस्या केवल बीमारी होने की नहीं, बल्कि समय पर पहचान और control न होने की भी है।

कड़वा सच #1 — हर बीमारी का दोष सिर्फ “DNA” को देना आसान है

भारत में अक्सर कहा जाता है—“हमारे खानदान में diabetes है, इसलिए मुझे भी होगी।” Genetic background निश्चित रूप से risk को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

South Asian populations में metabolic risk अपेक्षाकृत कम BMI पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए केवल वजन देखकर स्वास्थ्य का फैसला करना सही नहीं है। पेट की चर्बी, blood pressure, blood sugar, physical activity, sleep और diet pattern भी महत्वपूर्ण हैं।

सीधी बात: genes जोखिम दे सकते हैं, लेकिन lifestyle उस जोखिम को बढ़ा भी सकती है और कम भी।
कड़वा सच #2 — पेट भरना और शरीर को पोषण देना एक बात नहीं

हमारी पारंपरिक थाली में cereals यानी रोटी, चावल आदि का स्थान बड़ा है। समस्या रोटी या चावल का होना नहीं, बल्कि यह है कि कई बार पूरी meal में carbohydrate-heavy हिस्सा बहुत बड़ा हो जाता है और protein तथा विविधता पीछे छूट जाती है।

2025 में प्रकाशित ICMR-INDIAB dietary analysis में 18,090 adults के dietary data का अध्ययन किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर carbohydrates से लगभग 62.3% energy, fat से 25.2% और protein से लगभग 12% energy मिली।

अध्ययन में protein intake को National Dietary Guideline के 15% energy recommendation से कम बताया गया। इसका अर्थ यह नहीं कि हर भारतीय “protein deficient” है, बल्कि यह जरूर बताता है कि भारतीय diet में protein की मात्रा और quality पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।

ICMR-INDIAB Dietary Study: हमारी calories कहां से आ रही हैं?

Diet component कुल energy में योगदान
Carbohydrates 62.3%
Refined cereals 28.5%
Milled whole grains 16.2%
Total fat 25.2%
Total protein 12%
Plant protein 8.9%
Dairy protein 2.1%
Animal protein 1%

ध्यान दें: ये national dietary averages हैं। इन्हें हर व्यक्ति की व्यक्तिगत diet का exact measurement नहीं माना जाना चाहिए।

कड़वा सच #3 — “चार रोटी तो खानी ही चाहिए” कोई medical rule नहीं

भारत में भोजन की मात्रा अक्सर उम्र, activity और health के हिसाब से नहीं, बल्कि आदत और परिवार की परंपरा के हिसाब से तय होती है। किसी के लिए चार रोटी ठीक हो सकती हैं, किसी के लिए दो पर्याप्त हो सकती हैं।

असली सवाल केवल रोटी की संख्या नहीं है। पूरी plate में protein, vegetables, fruits, dairy या अन्य nutrient sources, fibre और कुल calories का balance कैसा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसलिए “रोटी बंद करो” समाधान नहीं है। बेहतर सवाल है— क्या मेरी plate में cereal के साथ पर्याप्त protein और vegetables भी हैं?

कड़वा सच #4 — Protein अक्सर हमारी थाली का “side character” बन गया है

दाल को कभी-कभी मुख्य भोजन के बजाय छोटी कटोरी की चीज समझ लिया जाता है। लेकिन protein शरीर के muscles, enzymes, hormones और tissue maintenance के लिए जरूरी है।

ICMR-INDIAB dietary analysis में carbohydrate calories के एक हिस्से को plant, dairy, egg या fish protein से replace करने वाले modeled analyses में diabetes और prediabetes की likelihood कम पाई गई। यह observational/modelled evidence है, इसलिए इसे यह कहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता कि कोई एक protein food diabetes को रोक देता है।

practical lesson सरल है—हर मुख्य भोजन में protein का मजबूत source रखें। दाल, चना, राजमा, लोबिया, सोया, दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली आदि व्यक्ति की पसंद, जरूरत और dietary pattern के अनुसार विकल्प हो सकते हैं।

❌ मिथक

“मैं vegetarian हूं, इसलिए मेरा खाना automatically healthy है।”

✓ सच

Vegetarian diet healthy हो सकती है, लेकिन refined carbs, ज्यादा नमक, ज्यादा तेल, मिठाई और packaged food से भरी vegetarian diet भी balanced नहीं होगी।

कड़वा सच #5 — Vegetarian या non-vegetarian होना अकेला फैसला नहीं

“Vegetarian = healthy” और “Non-veg = unhealthy”—दोनों oversimplification हैं। एक व्यक्ति vegetarian होकर दाल, चना, राजमा, सोया, dairy, nuts और vegetables से balanced diet ले सकता है। वहीं दूसरा व्यक्ति vegetarian होकर भी केवल refined flour, मिठाई, fried snacks और sugary drinks पर निर्भर हो सकता है।

इसी तरह non-vegetarian diet भी automatically healthy नहीं होती। Food की quality, quantity, cooking method और पूरे dietary pattern को देखना जरूरी है।

कड़वा सच #6 — नमक दिखाई कम देता है, लेकिन BP पर असर बड़ा हो सकता है

नमक हमारी थाली का सबसे छोटा दिखने वाला ingredient है, लेकिन इसका सेवन कई भारतीय परिवारों में जरूरत से काफी ज्यादा हो सकता है।

WHO की 2025 India hypertension profile में 2021 के लिए adults 25+ का estimated mean population salt intake लगभग 10 ग्राम प्रतिदिन दिया गया है। WHO सामान्य आबादी के लिए sodium को सीमित रखने की सलाह देता है, क्योंकि ज्यादा sodium intake blood pressure बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण dietary factor है।

इसलिए केवल ऊपर से डाला हुआ नमक ही नहीं—अचार, पापड़, नमकीन, packaged snacks और processed foods भी ध्यान में रखने चाहिए।

कड़वा सच #7 — “बस थोड़ा-सा नमकीन” रोज हो तो थोड़ा नहीं रहता

भारतीय चाय के साथ नमकीन, biscuit, fried snack या मीठा लेना बहुत सामान्य आदत है। समस्या एक दिन की नहीं—समस्या उस pattern की है जो सालों चलता है।

इसी तरह घर के खाने में “थोड़ा extra तेल”, “थोड़ी extra चीनी” और “थोड़ा extra नमक” अलग-अलग छोटे निर्णय लगते हैं। लेकिन शरीर इन सबका cumulative effect देखता है।

स्वास्थ्य का हिसाब एक meal से नहीं, महीनों और वर्षों के pattern से बनता है।

कड़वा सच #8 — हमारा खाना बदला, लेकिन शरीर की मेहनत घट गई

पहले रोजमर्रा की जिंदगी में walking, manual work और physical activity ज्यादा शामिल थी। आज कई लोगों का काम बैठकर होता है, travel motorised है और leisure time screen के सामने गुजरता है।

WHO की 2025 India profile में 2022 के लिए 18+ adults में physical inactivity लगभग 49% estimated थी।

यानी समस्या सिर्फ यह नहीं कि हम क्या खाते हैं। सवाल यह भी है कि जो energy हम खाते हैं, उसे शरीर इस्तेमाल कितना करता है?

कड़वा सच #9 — “मैं मोटा नहीं हूं, इसलिए मुझे diabetes नहीं होगी” गलत सुरक्षा है

BMI उपयोगी measure है, लेकिन अकेले इससे metabolic health का पूरा पता नहीं चलता। खासकर South Asian populations में abdominal fat और metabolic risk पर ध्यान देना जरूरी है।

ICMR-INDIAB data analysis में abdominal obesity का burden भी महत्वपूर्ण पाया गया। इसलिए केवल weighing machine पर खड़े होकर यह तय करना कि “मैं healthy हूं” पर्याप्त नहीं है।

कभी-कभी वजन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता, लेकिन waistline बढ़ती रहती है। इसलिए कमर का घेरा, blood pressure, blood sugar और lipid profile भी समय-समय पर देखना समझदारी है।

कड़वा सच #10 — बीमारी से ज्यादा खतरनाक है बीमारी का देर से पता चलना

High BP और कई metabolic problems लंबे समय तक बिना स्पष्ट symptoms के रह सकती हैं। व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है और फिर भी उसके blood pressure या blood sugar में लगातार समस्या हो सकती है।

WHO के अनुसार भारत में estimated hypertension वाले 21.02 करोड़ adults में से करीब 17.39 करोड़ का BP controlled नहीं था। केवल लगभग 17% hypertensive adults controlled category में थे।

यही कारण है कि “मुझे कोई परेशानी नहीं है” को health certificate नहीं माना जा सकता। समय पर screening और follow-up prevention का हिस्सा है।

एक जरूरी वैज्ञानिक बात: ICMR-INDIAB dietary study में carbohydrate intake और metabolic problems के बीच associations मिली हैं। इसका मतलब यह नहीं कि “रोटी खाने से diabetes होती है” या “चावल बंद करते ही diabetes ठीक हो जाएगी।” बीमारी कई factors का परिणाम है— genetics, total calories, abdominal fat, activity, sleep, diet quality और अन्य environmental factors भी भूमिका निभाते हैं।

तो फिर भारतीय थाली कैसी हो?

समाधान भारतीय भोजन छोड़ना नहीं है। समाधान है भारतीय थाली को ज्यादा balanced बनाना।

❌ समस्या वाली आदत

  • बहुत ज्यादा रोटी/चावल
  • छोटी मात्रा में protein
  • सब्जियां कम
  • नमकीन/अचार/papad ज्यादा
  • चाय के साथ रोज snacks
  • मीठे पेय और ज्यादा sugar
  • कम physical activity

✓ बेहतर दिशा

  • रोटी/चावल की मात्रा जरूरत के अनुसार
  • हर मुख्य meal में protein source
  • भरपूर और विविध vegetables
  • नमक और packaged foods सीमित
  • फल को diet का हिस्सा बनाना
  • तेल और sugar की मात्रा पर ध्यान
  • रोज physical activity

भारतीय थाली का आसान Formula

अनाज + Protein + सब्जियां + उचित मात्रा में fat + फल/अन्य विविध foods + पर्याप्त physical activity

इसका अर्थ यह नहीं कि हर व्यक्ति को बिल्कुल एक जैसा meal खाना चाहिए। उम्र, काम, शरीर, बीमारी, दवा, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत dietary preference के अनुसार भोजन की जरूरत बदलती है।

आखिरी बात: रोटी को दोष देने से पहले पूरी थाली देखिए

भारत की समस्या “रोटी” नहीं है। भारत की समस्या केवल “चावल” भी नहीं है। असली चुनौती उस पूरे lifestyle pattern को समझना है जिसमें एक तरफ carbohydrate-heavy meal हो सकता है, दूसरी तरफ protein और dietary diversity कम हो सकती है, नमक और processed snacks बढ़ सकते हैं और physical activity घट सकती है।

हमें अपनी परंपरागत थाली को छोड़ने की जरूरत नहीं है। जरूरत है उसे समझदारी से बदलने की। रोटी खाइए, लेकिन यह भी देखिए कि उसके साथ क्या है। चावल खाइए, लेकिन पूरी plate का balance देखिए। Vegetarian हैं तो protein और nutrient diversity पर ध्यान दीजिए। Non-vegetarian हैं तो भी food quality और cooking method को नजरअंदाज मत कीजिए।

सबसे बड़ा बदलाव शायद यह है कि हमें “पेट भर गया” और “शरीर की जरूरत पूरी हो गई” को एक ही बात समझना बंद करना होगा।

क्योंकि शरीर हर दिन हमारी थाली का हिसाब रखता है— और उसका हिसाब कई बार डॉक्टर की रिपोर्ट आने के बाद दिखाई देता है।

रिसर्च स्रोत:

1. ICMR–INDIAB dietary analysis, Nature Medicine, 2025 — “Dietary profiles and associated metabolic risk factors in India from the ICMR–INDIAB survey-21”.

2. World Health Organization (WHO), Global Report on Hypertension 2025 — India Hypertension Profile.

Editorial note: यह लेख health awareness और scientific information के उद्देश्य से है। व्यक्तिगत बीमारी, दवा या diet plan के लिए qualified doctor या registered dietitian से सलाह लें।