भारत में आरक्षण की पूरी सच्चाई:- खरी खरी
भारतीय संविधान में संविधान के अनुच्छेद 15(4), 16(4) और
46 राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति
देते हैं। या यूँ कहें समाज में सभी वर्गों को बराबरी पर लाने की कोशिस करता है।
OBC आरक्षण की सिफारिशें Mandal Commission ने दी थीं। 1992 में इंद्रा साहनी केस में
Supreme Court of India ने 50% आरक्षण सीमा का सिद्धांत स्थापित किया।
(कुछ अपवादों को छोड़कर)।
भारत में आरक्षण (Reservation) केवल सरकारी नौकरी या कॉलेज में सीट पाने का नियम नहीं है,
बल्कि यह सामाजिक न्याय से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था है। इसका उद्देश्य उन समुदायों को सामान
अवसर देना है जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा और रोजगार में पीछे रह गए या पीछे कर दिए गए ।
लेकिन बड़ा सवाल यह है —-भारत में किस वर्ग की आबादी कितनी है?
-किसे कितना आरक्षण मिलता है?
-क्या जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण है?
-आवेदन करते समय कैटेगरी चुनने का क्या नियम है?
-ज्यादा अंक आने पर क्या दूसरी कैटेगरी में चयन हो सकता है?
कई राज्यों में आरक्षण 50% से अधिक है।
उदाहरण:
-तमिलनाडु – लगभग 69%
-महाराष्ट्र – मराठा आरक्षण विवाद-बिहार – हाल में बढ़ोतरी
राज्य सरकारें अपनी सामाजिक संरचना के आधार पर प्रतिशत तय करती है।
आवेदन करते समय कैटेगरी कैसे काम करती है?
जब आप सरकारी नौकरी या प्रवेश परीक्षा में आवेदन करते हैं, तो आपको अपनी श्रेणी चुननी होती है:
-SC (आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग )-ST (आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर जन जातीय वर्ग)
-OBC (Non-Creamy Layer) (NCL से यहाँ मतलब आर्थिक रूप से कमजोर पिछड़ा वर्ग )
-EWS (आर्थिक रूप से कमजोर जनरल अगड़ी वर्ग )
-General (संपन्न वर्ग या अगड़ी जातियां )
-आवेदन के बाद कैटेगरी बदलना लगभग असंभव होता है। एक बार आपका किसी वर्ग विशेष में
-वैध प्रमाणपत्र आवश्यक है।
-OBC के लिए क्रीमी लेयर सीमा (वार्षिक आय) लागू होती है।
कटऑफ इन बातों पर निर्भर करती है:
-कुल सीटें-परीक्षा कठिनाई स्तर
-प्रतियोगिता में मिले अंकों के आधार पर हर केटेगरी की अलग अलग मेरिट
हर वर्ग की अलग कटऑफ होती है।
भारत में आरक्षण बनाम जनसंख्या अनुपात:-
क्या General वर्ग सबसे ज्यादा फायदे में है?
EWS और UR सीटों की पूरी सच्चाई
भारत में आरक्षण पर बहस का एक नया सवाल तेजी से सामने आता है:
“अगर EWS भी जोड़ दें तो General वर्ग के पास ज्यादा सीटें चली जाती हैं।यह सवाल भावनात्मक भी है और गणितीय भी।
केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय संस्थानों में:
वर्ग आरक्षण कुल जनसँख्या (अनुमानित अनुपात)
SC 15 % 16.6 %
ST 7.5 % 8.6 %
OBC (NCL ) 27 % 40 से 45 % अनुमानित
कुल कास्ट रिजर्वेशन 49.5 % 70 % जन्सॉंख्या
यानि लगभग 70 % जनसख्या के पास 50 % आरक्षण
EWS 10 % आंकड़े उपलब्ध नहीं
जनरल 40.5 % 30 % जनसँख्या सभी मिला कर (गरीब और अमीर )
कुल जनरल रिजर्वेशन 50.5 %
यानि लगभग 30 % जनसख्या के पास 50.5 % आरक्षण का लाभ
यहाँ हम EWS को जनरल के साथ रख कर चल रहे हैं क्योंकि EWS का फायदा भी जनरल गरीब
लोगों को मिलता है
2011 की जनगणना के अनुसार:
-SC = 16.6%
-ST = 8.6%
OBC का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
Mandal Commission ने 52% अनुमान लगाया था।
अन्य सर्वेक्षण 40–45% बताते हैं।
यदि औसत 43% मान लें:
SC (16.6) + ST (8.6) + OBC (NCL) (43) ≈ 68%- 70 %
तो शेष आबादी ≈ 30–35%
👉 इसलिए अनुमानतः General वर्ग की आबादी लगभग 30–35% मानी जाती है।
यहाँ EWS = General किन्तु गरीब ?
✔ सच्चाई क्या है :
-EWS केवल उन लोगों के लिए है जो SC/ST/OBC में नहीं आते।-यानी "EWS "यह “सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर हिस्से” के लिए है।
-सभी General उम्मीदवार EWS नहीं होते।
-आय सीमा और संपत्ति सीमा लागू होती है।
इसलिए:
EWS = पूरे General वर्ग के बराबर नहीं है (General का आर्थिक रूप से कमजोरहिस्सा जिसके लिए अलग से 10 % रिजर्वेशन रखा गया है )
अब बड़ा सवाल — क्या General सबसे ज्यादा
फायदे में है?
चलिए 100 सीटों का गणित करते हैं।
100 सीटों में वितरण:
(सभी प्रतियोगी सिर्फ अपनी केटेगरी में अपनी सीट के लिए प्रतियोगिता करता है )
--15 SC--7.5 ST
--27 OBC (केवल NCL )
--10 EWS (जनरल गरीब )
--40.5 UR ( जनरल अमीर -अलिखित आरक्षण )
जनरल सीटों पर कौन बैठ सकता है?
यह बहुत महत्वपूर्ण है।
UR ( जनरल ) सीटों पर: सभी बैठ सकते हैं। किन्तु तभी- जब रिज़र्व केटेगरी के प्रतियोगी जनरल
से ज्यादा मार्क्स ले लें और सभी रिज़र्व सीटें पहले ही भर चुकी हों। किन्तु वास्तविक स्थिति इसके
एकदम उलट है।
ज्यादातर रिज़र्व सीटें अभी भी खाली चल रही हैं।
SC/OBC उम्मीदवार जनरल से ज्यादा अंक लाता है, तो वह UR में जा सकता है।
इसे “Merit Migration” कहते हैं। किन्तु ऐसे केस अभी तक न के बराबर हैं।
Merit Migration केस बहुत दुर्लभ है और इनमें Supreme Court of India के
निर्णय शामिल हैं।
अब गणित से समझिए
मान लीजिए: कुल जनसख्या
General आबादी ≈ 32%
Reserved आबादी ≈ 68%
सीटें:
-General को सीधा आरक्षण = 40.5 %-EWS = 10% (लेकिन केवल आर्थिक रूप से कमजोर General)
-रिज़र्व आबादी 70 % = आरक्षण केवल 49.5% (जिस पर सभी रिज़र्व वर्ग प्रतिस्पर्धा करते हैं)
वास्तविक स्थिति क्या है?
तीन महत्वपूर्ण बिंदु समझिए:
✔ 1. General के लिए अलग आरक्षण नहीं है किन्तु अदृश्य रूप से ये सीटें जनरल के लिए
उपलब्ध रहती हैं। किन्तु सभी प्रतियोगी अपनी अपनी केटेगरी में प्रतियोगिता करते हैं
उन्हें ओपन प्रतिस्पर्धा जैसा दिखाई देता है। किन्तु वास्तविक रूप से अभी भी जनरल प्रतिस्पर्धी फायदे
में हैं।
✔ 2. EWS केवल आय सीमा के भीतर वालों के लिए है
संपन्न General को इसका लाभ नहीं मिलता। किन्तु यहाँ भी पेंच है, अक्सर भीतर की जानकारी
और पहुँच रखने वाले संपन्न प्रतिस्पर्धी गलत तरीके से EWS का प्रमाणपत्र बनवा कर इसका फायदा
उठा लेते हैं। आप इस स्थिति से परिचित होंगे।
✔ 3. UR सीटें गरीब या संपन्न 'जनरल' सबके लिए खुली हैं
तो क्या जनसंख्या के आधार पर General सबसे फायदे में है?
निष्पक्ष विश्लेषण:
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| जनसंख्या | ~30–35% |
| सीधा अदृश्य आरक्षण | 40.5 % |
| EWS (जनरल ) | 10 % केवल गरीब General |
| UR सीटें | देखने में सभी के लिए खुली, किन्तु अधितर सीटें जनरल द्वारा भरी रहती हैं |
क्या ऊँचे पदों पर General का वर्चस्व क्यों दिखता है?
यह एक जटिल सामाजिक प्रश्न है। किन्तु उत्तर कटु सत्य हाँ है।ऐतिहासिक रूप से:
-प्रशासनिक सेवाओं तक पहुँच General वर्ग की ज्यादा रही
-शिक्षा पर शुरू से आसानी से पकड़
-सामाजिक ढांचे से भी शिक्षा पर अगड़ों का अधिकार
-अंग्रेज़ी माध्यम शिक्षा-शहरी संसाधन
-पारिवारिक शैक्षणिक और संपन्न पृष्ठभूमि
इन कारणों से आज भी:
✔ IAS, IPS, प्रोफेसर, न्यायपालिका जैसे शीर्ष पदों पर General वर्ग का अनुपात अधिक दिखता है।
हालाँकि पिछले 20–30 वर्षों में SC/ST/OBC प्रतिनिधित्व थोड़ा बढ़ा है।
आसान शब्दों में- जमीनी हकीकत
✔ SC/ST/OBC को तय जनसख्या प्रतिशत के अनुसार आरक्षण मिलना चाहिए।
✔ General को अलग आरक्षण नहीं मिलता किन्तु अधिकतर UR सीटों पर जनरल उम्मीदवार सीटें ले जाते हैं,
और जिन् जनरल उम्मीदवारों को सीटें नहीं मिल पाती उनकी नजर रिज़र्व केटेगरी की सीटों पर टिक जाती है।
जबकि SC/ST/OBC केवल अपनी केटेगरी में उपलब्ध सीटों के लिए प्रतियोगिता करते हैं।
✔ EWS केवल आर्थिक रूप से कमजोर General के लिए है।
✔ UR सीटें सबके लिए खुली हैं। किन्तु SC/ST/OBC अभी तक इस स्थिति में नहीं आ सके हैं की
जनरल उम्मीदवारों की सीटों के लिए प्रतियोगिता करें, क्यों की 70 सालों में भी सभी संपन्न नहीं हुवे हैं
अभी भी 90 % निचले पायदान पर संघर्ष कर रहे हैं।
✔ UR सीटों पर अभी भी संपन्न जनरल का अधिकार है और शुरू से साधन संपन्न होने के कारण
लगभग सभी उच्च पदों पर साधन संपन्न जनरल बैठे हैं।
✔ Reserved उम्मीदवार ज्यादा अंक पर UR सीट ले सकते हैं। किन्तु ऐसे उदाहरण लगभग 0.001% हैं।
✔जैसे जैसे आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा वर्ग अपने अपने हिस्से की सीटें ले कर आगे
बढ़ेगा ये स्थिति बराबरी पर आने लगेगी तब शायद किसी को आरक्षण की जरूरत न पड़े, किन्तु इसके
लिए अभी बहुत काम करना बाकी है।
गांव में अभी तक सामाजिक बराबरी नहीं आ सकी है और सरकारी विभागों में ये असमानता अक्सर
सामने आ जाती है इसलिए सरकारों को अभी और मेहनत करने की जरूरत है।
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