18वीं सदी की शुरुआत तक भारत में शक्तिशाली मुगल साम्राज्य था जिसे
Mughal Empire के नाम से जाना जाता है।
लेकिन 1707 में औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद यह साम्राज्य तेजी से कमजोर होने लगा।
मुगल सत्ता के कमजोर पड़ते ही कई क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरने लगीं।
उस समय भारत में प्रमुख शक्तियाँ थीं:-मराठा साम्राज्य
-सिख साम्राज्य
-मैसूर राज्य
-बंगाल नवाब
-अवध नवाब
-हैदराबाद निजाम
-राजपूताना की रियासतें
इन राज्यों के बीच अक्सर युद्ध होते रहते थे।
इतिहासकारों के अनुसार 18वीं सदी का भारत राजनीतिक रूप से अत्यंत अस्थिर था। यही वह
समय था जब यूरोपीय व्यापारिक कंपनियाँ भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने लगीं।
यूरोपीय शक्तियों का आगमन
भारत में कई यूरोपीय शक्तियाँ आईं:--पुर्तगाली
-डच
-फ्रांसीसी
-अंग्रेज (ब्रिटिश कंपनी)
इनमें सबसे अधिक प्रभावशाली बन गई ब्रिटिश इंडिया कंपनी:
East India Company
कंपनी शुरू में सिर्फ व्यापार करने आई थी, लेकिन धीरे-धीरे उसने सैन्य और राजनीतिक शक्ति
हासिल कर ली।
1757 का Battle of Plassey भारतीय इतिहास का निर्णायक मोड़ माना जाता है।
इस युद्ध के बाद बंगाल पर अंग्रेजों का नियंत्रण स्थापित हो गया और यहीं से भारत में ब्रिटिश सत्ता का
विस्तार शुरू हुआ।
भारत क्यों बना विदेशियों का आसान शिकार
भारतीय समाज की जटिल संरचनाअंग्रेजों के आने से पहले भारत में समाज कई स्तरों में विभाजित था।
1. जाति व्यवस्थाभारतीय समाज में जाति व्यवस्था का प्रभाव बहुत गहरा था।
सामाजिक संरचना में:
-उच्च जातियाँ
-मध्य जातियाँ
-निम्न जातियाँ
-अस्पृश्य माने जाने वाले समुदाय
यह विभाजन कई क्षेत्रों में सामाजिक तनाव का कारण बनता था।
हालाँकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी प्रकृति अलग-अलग थी, लेकिन सामाजिक असमानता एक बड़ी
समस्या थी।
2. सामाजिक कुरीतियाँ
उस समय समाज में कई कुरीतियाँ भी मौजूद थीं जैसे:
-सती प्रथा
-बाल विवाह
-महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध
-विधवाओं की कठिन स्थिति
19वीं सदी में कई भारतीय समाज सुधारकों ने इन मुद्दों के खिलाफ आंदोलन चलाए।
इन सुधारकों में प्रमुख थे:
-Raja Ram Mohan Roy
-Ishwar Chandra Vidyasagar
इन्होंने सामाजिक सुधारों की शुरुआत की।
महिलाओं की स्थिति
इतिहासकार मानते हैं कि भारत के कई हिस्सों में महिलाओं की स्थिति कठिन थी।
कई क्षेत्रों में:
शिक्षा सीमित थी
सामाजिक स्वतंत्रता कम थी
बाल विवाह आम थेहालाँकि यह भी सच है कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति अलग-अलग थी।
धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष
मध्यकालीन भारत में कई धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष भी हुए।
उदाहरण के तौर पर:
-मुगल शासन और कुछ क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संघर्ष
-मराठा और मुगल युद्ध
-सिख और मुगल साम्राज्य के बीच टकराव
-सिख समुदाय का राजनीतिक उत्थान भी इसी दौर में हुआ।
सिख इतिहास में महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं:
-Guru Gobind Singh
-Maharaja Ranjit Singh
सिख साम्राज्य ने उत्तर-पश्चिम भारत में एक शक्तिशाली राज्य स्थापित किया।
ब्रिटिश शासन का विस्तार:
1757 से 1857 तक कंपनी ने धीरे-धीरे भारत के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया।
1857 का विद्रोह, जिसे Indian Rebellion of 1857 कहा जाता है, ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला बड़ा संगठित विद्रोह था।
इसके बाद भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के नियंत्रण में चला गया।
ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियाँ
ब्रिटिश शासन की सबसे बड़ी आलोचना उनकी आर्थिक नीतियों को लेकर होती है।
कई इतिहासकारों का मानना है कि ब्रिटिश शासन के दौरान:
-भारतीय उद्योग कमजोर हुए
-कुटीर उद्योगों को नुकसान हुआ
-कृषि पर अत्यधिक कर लगाए गए
भारतीय अर्थशास्त्री Dadabhai Naoroji ने “ड्रेन ऑफ वेल्थ” सिद्धांत दिया था।उनका कहना था कि
भारत की संपत्ति लगातार ब्रिटेन भेजी जा रही थी।
ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था
ब्रिटिश शासन ने एक केंद्रीकृत प्रशासनिक प्रणाली बनाई।
इसमें प्रमुख था:
Indian Civil Service
यह नौकरशाही व्यवस्था आज के भारतीय प्रशासनिक ढांचे की आधारशिला बनी।
कानून और न्याय व्यवस्था
ब्रिटिश शासन के दौरान आधुनिक कानून बनाए गए।
जैसे:
-Indian Penal Code
-सिविल और क्रिमिनल कोर्ट सिस्टम
-पुलिस प्रशासन
आज भी भारत की कानूनी व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी ढांचे पर आधारित है।
रेलवे और संचार
ब्रिटिश शासन की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक थी रेलवे।
भारत की पहली ट्रेन 1853 में चली और धीरे-धीरे विशाल नेटवर्क बना जिसे आज हम जानते हैं:
Indian Railways
रेलवे ने:
-व्यापार बढ़ाया
-प्रशासन आसान बनाया
-लोगों के बीच संपर्क बढ़ाया
आधुनिक शिक्षा का प्रसार
-ब्रिटिश शासन के दौरान आधुनिक शिक्षा प्रणाली शुरू हुई।
-इसमें अंग्रेजी शिक्षा भी शामिल थी।
-इसी शिक्षा प्रणाली से एक नया शिक्षित वर्ग उभरा जिसने बाद में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व
किया।
राष्ट्रीय आंदोलन का उदय:
Education backfire on British System
19वीं सदी के अंत में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन शुरू हुआ।
1885 मे Indian National Congress की स्थापना हुई।
इसके बाद कई नेताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया जैसे:
-Mahatma Gandhi
-Jawaharlal Nehru
-Subhas Chandra Bose
आधुनिक भारत का निर्माण
आखिरकार 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
इसके बाद भारत ने एक लोकतांत्रिक संविधान अपनाया और आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में विकसित
हुआ।
इतिहास क्या कहता है ?
इतिहास को एक ही रंग में नहीं देखा जा सकता।
सच्चाई यह है कि:
ब्रिटिश शासन ने भारत का आर्थिक शोषण किया
लेकिन उन्होंने कई आधुनिक संस्थागत ढांचे भी बनाए
भारत पहले से मौजूद जटिल सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं से भी जूझ रहा था
आधुनिक भारत दरअसल बहुत से घटकों का रंग बिरंगा मिश्रण है।
इसमें —स्थानीय सभ्यताओं, क्षेत्रीय शक्तियों, सामाजिक सुधार आंदोलनों, औपनिवेशिक शासन और
स्वतंत्रता आंदोलन का संयुक्त परिणाम।