Political Science 12th (NCERT) नोट्स हिंदी (परीक्षा की तैयारी आसान भाषा में )

समकालीन विश्व राजनीति (पोलिटिकल साइंस) 

(हिंदी माध्यम ) (अध्याय 2)




समकालीन विश्व राजनीति (कक्षा 12) – आसान हिंदी में


अध्याय 1: शीत युद्ध का दौर (Cold War)


शीत युद्ध क्या था?

द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) खत्म होने के बाद दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश बन गए—

-अमेरिका (USA)

-सोवियत संघ (USSR)

दोनों देशों की सोच अलग थी।

-अमेरिका चाहता था कि दुनिया में पूंजीवाद (Capitalism) फैले, जहाँ लोग निजी व्यापार और 

कंपनियाँ चला सकें।

-सोवियत संघ चाहता था कि समाजवाद (Socialism) फैले, जहाँ सरकार का नियंत्रण अधिक हो और 

सभी लोगों को बराबरी मिले।

दोनों देशों के बीच विचारों की लड़ाई शुरू हो गई।


2. शीत युद्ध क्या था?

शीत युद्ध ऐसा संघर्ष था जिसमें दोनों महाशक्तियाँ सीधे युद्ध नहीं लड़ती थीं, बल्कि दूसरे देशों, 

हथियारों, विज्ञान, अंतरिक्ष और राजनीति के माध्यम से एक-दूसरे पर दबाव बनाती थीं।

इसे "शीत" इसलिए कहा गया क्योंकि बंदूकें कम चलीं, लेकिन तनाव लगातार बना रहा।


इसे "शीत युद्ध" क्यों कहा गया?

"शीत" यानी ठंडा।

इस युद्ध में अमेरिका और सोवियत संघ ने एक-दूसरे पर सीधे हमला नहीं किया।

उन्होंने एक-दूसरे को डराने के लिए—


-परमाणु हथियार बनाए,

-दूसरे देशों की मदद की,

-जासूसी की,

-विज्ञान और अंतरिक्ष में मुकाबला किया।

यानी लड़ाई चलती रही, लेकिन दोनों सीधे युद्ध नहीं लड़े।


पूरी दुनिया दो हिस्सों में बंट गई:-

-कई देश अमेरिका के साथ हो गए।

-कई देश सोवियत संघ के साथ चले गए।

-इस कारण दुनिया दो बड़े गुटों में बंट गई।


नाटो (NATO):

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य संगठन बनाया।

यदि किसी एक सदस्य पर हमला होगा, तो सभी सदस्य उसकी रक्षा करेंगे।

वारसा संधि:

सोवियत संघ ने भी अपने मित्र देशों के साथ सैन्य गठबंधन बनाया।

इसका उद्देश्य NATO का मुकाबला करना था।

परमाणु हथियारों की दौड़:

-दोनों देशों (रूस और अमेरिका ) ने हजारों परमाणु बम बनाए।

-दोनों जानते थे कि यदि युद्ध हुआ, तो दोनों का भारी नुकसान होगा।

-इसी कारण उन्होंने सीधे युद्ध से बचने की कोशिश की।


भारत ने क्या किया?

भारत ने किसी एक पक्ष का साथ नहीं चुना।

भारत ने कहा—

"हम अपनी विदेश नीति खुद तय करेंगे।"

इसी सोच से गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement – NAM) शुरू हुआ।


गुटनिरपेक्ष आंदोलन का मतलब:

भारत, मिस्र, यूगोस्लाविया, इंडोनेशिया और घाना जैसे देशों ने मिलकर कहा—

"हम अमेरिका या सोवियत संघ किसी के गुलाम नहीं बनेंगे।"

यानी दोनों से दोस्ती रखेंगे, लेकिन फैसला अपना करेंगे।

भारत, मिस्र, यूगोस्लाविया, इंडोनेशिया और घाना जैसे देशों ने मिलकर यह आंदोलन शुरू किया।

इसका उद्देश्य था—

-स्वतंत्र विदेश नीति

-शांति

-उपनिवेशवाद का विरोध

-सभी देशों से मित्रता


शीत युद्ध का अंत कैसे हुआ?

1991 में सोवियत संघ टूट गया।

इसके बाद अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन गया।

यहीं से शीत युद्ध समाप्त माना जाता है।


परीक्षा में याद रखने योग्य बातें :

✔ शीत युद्ध = बिना सीधे युद्ध के तनाव।

✔ दो महाशक्ति = अमेरिका और सोवियत संघ।

✔ भारत = गुटनिरपेक्ष नीति।

✔ शीत युद्ध समाप्त = 1991।


महत्वपूर्ण तथ्य :

✅ शीत युद्ध लगभग 1945 से 1991 तक चला।

✅ मुख्य देश—अमेरिका और सोवियत संघ।

✅ भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई।

✅ 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ।



अध्याय 1: शीत युद्ध का दौर

प्रश्न 1. शीत युद्ध क्या था?

उत्तर:

शीत युद्ध अमेरिका और सोवियत संघ के बीच लगभग 1945 से 1991 तक चला वैचारिक और 

राजनीतिक संघर्ष था। इसमें दोनों देशों ने सीधे युद्ध नहीं किया, बल्कि हथियारों की दौड़, दूसरे देशों 

को समर्थन और राजनीतिक दबाव के माध्यम से एक-दूसरे का मुकाबला किया।


प्रश्न 2. शीत युद्ध को "शीत" क्यों कहा गया?

उत्तर:

इसे शीत युद्ध इसलिए कहा गया क्योंकि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच सीधे युद्ध नहीं हुआ। 

दोनों एक-दूसरे को परमाणु हथियारों और सैन्य शक्ति से डराते रहे, लेकिन आमने-सामने नहीं लड़े।


प्रश्न 3. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) क्या है?

उत्तर:

गुटनिरपेक्ष आंदोलन उन देशों का समूह था जिन्होंने शीत युद्ध के समय अमेरिका और सोवियत संघ में 

से किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई। भारत इसके प्रमुख 

संस्थापक देशों में था।


प्रश्न 4. भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति क्यों अपनाई?

उत्तर:

भारत स्वतंत्र निर्णय लेना चाहता था। वह किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं रहना चाहता था और सभी 

देशों से मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता था।


प्रश्न 5. सोवियत संघ के विघटन का विश्व राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद शीत युद्ध समाप्त हो गया। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी 

महाशक्ति बन गया और विश्व राजनीति में एकध्रुवीय व्यवस्था उभरकर सामने आई।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

शीत युद्ध किन दो देशों के बीच था?

उत्तर

अमेरिका और सोवियत संघ।

प्रश्न 2

भारत ने कौन-सी विदेश नीति अपनाई?

उत्तर

गुटनिरपेक्ष नीति।

प्रश्न 3

NATO किसका सैन्य संगठन था?

उत्तर

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का।

प्रश्न 4

वारसा संधि किसने बनाई?

उत्तर

सोवियत संघ ने।

प्रश्न 5

शीत युद्ध कब समाप्त हुआ?

उत्तर

1991 में।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

शीत युद्ध को "शीत" क्यों कहा गया?

उत्तर:

क्योंकि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच सीधा युद्ध नहीं हुआ। दोनों ने हथियारों, राजनीति, जासूसी 

और दूसरे देशों के माध्यम से एक-दूसरे पर दबाव बनाया।

प्रश्न 2

भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति क्यों अपनाई?

उत्तर:

भारत किसी महाशक्ति के प्रभाव में नहीं आना चाहता था। वह स्वतंत्र विदेश नीति अपनाकर सभी 

देशों से अच्छे संबंध रखना चाहता था।

प्रश्न 3

परमाणु हथियारों की दौड़ का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

दोनों देशों ने बड़ी संख्या में परमाणु हथियार बनाए। इससे दुनिया में भय और तनाव बढ़ा, लेकिन 

परमाणु युद्ध के खतरे के कारण दोनों सीधे युद्ध से बचते रहे।


बड़े प्रश्न

शीत युद्ध के कारण और प्रभाव लिखिए।

उत्तर:

शीत युद्ध का मुख्य कारण अमेरिका और सोवियत संघ की अलग-अलग विचारधाराएँ थीं। दोनों अपने-

अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहते थे।

इसके प्रमुख प्रभाव—

-दुनिया दो गुटों में बँट गई।

-NATO और वारसा संधि बने।

-परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हुई।

-कई छोटे देशों में अप्रत्यक्ष युद्ध हुए।

-भारत सहित कई देशों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन शुरू किया।

-1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ शीत युद्ध समाप्त हुआ।

MCQs:

1. शीत युद्ध किन देशों के बीच था?

A. भारत–चीन

B. अमेरिका–सोवियत संघ ✅

C. भारत–पाकिस्तान

D. अमेरिका–ब्रिटेन


2. भारत किस आंदोलन का संस्थापक सदस्य था?


A. NATO

North Atlantic Treaty Organization

 (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन)

(स्थापना: 4 अप्रैल 1949
मुख्यालय: North Atlantic Treaty Organization का मुख्यालय Brussels में है।

स्थापना का उद्देश्य

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका, कनाडा और पश्चिमी यूरोप के देशों ने अपनी सामूहिक सुरक्षा के लिए NATO की स्थापना की। इसका मुख्य उद्देश्य था कि यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है, तो सभी सदस्य मिलकर उसकी रक्षा करेंगे।

NATO का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत (अनुच्छेद 5)

"एक सदस्य पर हमला, सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा।"

यही सिद्धांत NATO की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था की आधारशिला है।

बोर्ड परीक्षा के लिए याद रखें

Full Form: North Atlantic Treaty Organization
स्थापना: 4 अप्रैल 1949
मुख्यालय: ब्रुसेल्स, बेल्जियम
मुख्य उद्देश्य: सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा और रक्षा।)

B. वारसा संधि

वारसा संधि (Warsaw Pact) क्या है?

वारसा संधि (Warsaw Pact) एक सैन्य गठबंधन (Military Alliance) था, जिसे 14 मई 

1955 को Soviet Union और उसके सहयोगी समाजवादी देशों ने बनाया था।

इसका मुख्य उद्देश्य NATO का मुकाबला करना और समाजवादी देशों की सामूहिक सुरक्षा 

सुनिश्चित करना था।

इसे "वारसा संधि" क्यों कहा गया?

इस संधि पर हस्ताक्षर Warsaw (पोलैंड की राजधानी) में हुए थे। इसलिए इसका नाम वारसा संधि 

(Warsaw Pact) पड़ा।

वारसा संधि क्यों बनाई गई?

1955 में पश्चिम जर्मनी को NATO की सदस्यता मिल गई। इससे सोवियत संघ को लगा कि उसकी

 सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसके जवाब में उसने अपने सहयोगी देशों के साथ वारसा संधि बनाई।


प्रमुख सदस्य देश

-सोवियत संघ (USSR)

-पोलैंड

-पूर्वी जर्मनी (East Germany)

-चेकोस्लोवाकिया

-हंगरी

-बुल्गारिया

-रोमानिया

-अल्बानिया (बाद में अलग हो गया


C. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) ✅

D. यूरोपीय संघ


3. शीत युद्ध किस वर्ष समाप्त हुआ?

A. 1945

B. 1962

C. 1991 ✅

D. 2001


बोर्ड परीक्षा के लिए याद रखें

-शीत युद्ध का अर्थ और कारण।

-NATO और वारसा संधि में अंतर।

-गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य।

-भारत की विदेश नीति।

-1991 में सोवियत संघ के विघटन का महत्व।

अध्याय का सार

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक संघर्ष शुरू हुआ, जिसे शीत 

युद्ध कहा गया। इस दौरान दुनिया दो गुटों में बँट गई। भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाकर स्वतंत्र 

विदेश नीति का पालन किया। 1991 में सोवियत संघ के टूटने के साथ शीत युद्ध समाप्त हो गया।


कक्षा 12 राजनीति विज्ञान

समकालीन विश्व राजनीति — अध्याय 4

अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations)




बोर्ड परीक्षा के लिए सरल हिंदी में सम्पूर्ण नोट्स + महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

यह अध्याय मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN), उसकी आवश्यकता, संरचना, सुरक्षा परिषद, 

सुधारों और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को समझाता है।


1. अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्या हैं?

जब कई देश किसी साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कोई संस्था बनाते हैं, तो उसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन 

कहते हैं।

इनका उद्देश्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करना होता है।

उदाहरण

-संयुक्त राष्ट्र (UN)

-विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)

-विश्व बैंक

-अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)

-विश्व व्यापार संगठन (WTO)


2. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता क्यों है?

दुनिया में सभी देशों की अपनी-अपनी सरकारें हैं, लेकिन कुछ समस्याएँ ऐसी हैं जिन्हें कोई एक देश 

अकेले हल नहीं कर सकता।

जैसे—

-युद्ध और संघर्ष

-आतंकवाद

-गरीबी

-महामारी

-जलवायु परिवर्तन

-शरणार्थी समस्या

-परमाणु हथियार

-आर्थिक संकट

इन समस्याओं से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।

इसलिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता होती है।



3. क्या अंतर्राष्ट्रीय संगठन विश्व सरकार हैं?

नहीं।

संयुक्त राष्ट्र या अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन विश्व सरकार नहीं हैं।

इनके पास दुनिया के सभी देशों पर उसी तरह शासन करने की शक्ति नहीं है जिस तरह किसी देश की सरकार अपने नागरिकों पर शासन करती है।

इनका मुख्य उद्देश्य है—

देशों को एक मंच प्रदान करना ताकि वे बातचीत, सहयोग और समझौते के माध्यम से
अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान कर सकें. 

 

4. संयुक्त राष्ट्र (United Nations)

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई।

इसकी स्थापना का प्रमुख कारण था—

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व में शांति और सुरक्षा स्थापित करना।

संयुक्त राष्ट्र से पहले राष्ट्र संघ (League of Nations) था, लेकिन वह विश्व शांति बनाए रखने में सफल नहीं हुआ।


5. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  1. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।
  2. देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बढ़ाना।
  3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  4. मानवाधिकारों की रक्षा करना।
  5. आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना।
  6. अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना।

6. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग

संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग हैं—

1. महासभा (General Assembly)

सभी सदस्य देश इसमें शामिल होते हैं।

2. सुरक्षा परिषद (Security Council)

अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेती है।

3. आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC)

आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर काम करती है।

4. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)

देशों के बीच कानूनी विवादों का समाधान करता है।

5. सचिवालय (Secretariat)

संयुक्त राष्ट्र के प्रशासनिक कार्य करता है।

6. न्यास परिषद (Trusteeship Council)

इसका मूल उद्देश्य न्यास क्षेत्रों की देखरेख करना था। अब इसका काम लगभग समाप्त हो चुका है।


7. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

यह अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण विषय है।

सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली अंग माना जाता है।

इसकी जिम्मेदारी है—

अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।

 

8. सुरक्षा परिषद की संरचना

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं।

स्थायी सदस्य — 5

इन्हें P5 कहा जाता है।

  1. अमेरिका
  2. रूस
  3. चीन
  4. ब्रिटेन
  5. फ्रांस

अस्थायी सदस्य — 10

इनका चुनाव महासभा द्वारा दो वर्ष के लिए किया जाता है।


9. वीटो शक्ति क्या है?

सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति है।

यदि पाँच स्थायी सदस्यों में से कोई एक किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव के खिलाफ वोट करता है, तो प्रस्ताव को रोका जा सकता है।

इसी शक्ति को वीटो शक्ति कहते हैं।

सरल उदाहरण

मान लीजिए सुरक्षा परिषद में किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान होता है।

अगर पर्याप्त समर्थन होने के बावजूद किसी स्थायी सदस्य ने वीटो कर दिया, तो प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता।


10. वीटो शक्ति पर विवाद

वीटो शक्ति को लेकर विवाद इसलिए है क्योंकि—

-पाँच देशों के पास विशेष अधिकार है।

-बाकी देशों के पास ऐसी शक्ति नहीं है।

-वर्तमान विश्व राजनीति 1945 की तुलना में बहुत बदल चुकी है।

-आज कई नए शक्तिशाली देश सामने आए हैं।

इसलिए सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग लगातार होती रही है।


11. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता क्यों है?

संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना मुख्य रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों को दर्शाती है।

लेकिन आज—

-एशिया की शक्ति बढ़ी है।

-अफ्रीका के कई स्वतंत्र देश हैं।

-लैटिन अमेरिका की भूमिका बढ़ी है।

-भारत, जापान और जर्मनी जैसी शक्तियाँ महत्वपूर्ण हैं।

-विश्व की अर्थव्यवस्था और राजनीति बदल गई है।

इसलिए संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुधार की आवश्यकता महसूस होती है।


12. सुरक्षा परिषद में सुधार

सुधार की मुख्य मांगें हैं—

1. स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए।

2. अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए।

3. एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को अधिक प्रतिनिधित्व मिले।

4. विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाई जाए।



13. भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी

भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का मजबूत दावेदार है।

भारत इसके लिए कई तर्क देता है।

भारत का पहला तर्क — बड़ी जनसंख्या

भारत दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में से एक है।

दूसरा — लोकतंत्र

भारत विश्व का एक बड़ा और महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देश है।

तीसरा — अर्थव्यवस्था

भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

चौथा — संयुक्त राष्ट्र में योगदान

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पाँचवाँ — शांति स्थापना

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों (Peacekeeping Operations) में बड़ी संख्या में 

सैनिक भेजे हैं।

छठा — विकासशील देशों की आवाज

भारत विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।


14. भारत की स्थायी सदस्यता के विरोध में तर्क

कुछ देश भारत की दावेदारी को लेकर अलग-अलग चिंताएँ रखते हैं।

मुख्य आपत्तियाँ—

-सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने पर शक्ति संतुलन बदल सकता है।

-क्षेत्रीय राजनीति में कुछ देशों को भारत की सदस्यता पर आपत्ति हो सकती है।

-कुछ देश अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को स्थायी सदस्य नहीं बनाना चाहते।

हालाँकि भारत की सदस्यता के समर्थन में भी कई देश हैं।


15. संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियाँ

संयुक्त राष्ट्र की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं—

1. शांति स्थापना

युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना के प्रयास।

2. मानवाधिकार

मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देना।

3. स्वास्थ्य

WHO जैसी संस्थाओं के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग।

4. शरणार्थी सहायता

शरणार्थियों की सहायता और पुनर्वास।

5. विकास

गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में काम।

6. अंतरराष्ट्रीय सहयोग

देशों को बातचीत के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना।


16. संयुक्त राष्ट्र की सीमाएँ

संयुक्त राष्ट्र की कुछ महत्वपूर्ण सीमाएँ भी हैं।

1. वीटो शक्ति

P5 के पास अत्यधिक विशेषाधिकार हैं।

2. शक्तिशाली देशों पर निर्भरता

संयुक्त राष्ट्र के पास अपनी स्वतंत्र सैन्य शक्ति सीमित है।

3. बड़े देशों के मतभेद

यदि शक्तिशाली देश किसी मुद्दे पर सहमत न हों तो निर्णय लेना कठिन हो जाता है।

4. सुरक्षा परिषद की पुरानी संरचना

आज की विश्व व्यवस्था का पूरा प्रतिनिधित्व वर्तमान संरचना नहीं करती।


17. संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करने के उपाय

संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए—

-सुरक्षा परिषद में सुधार होना चाहिए।

-विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।

-वीटो व्यवस्था में सुधार पर विचार होना चाहिए।

-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक लोकतांत्रिक बनाया जाना चाहिए।

-देशों के बीच सहयोग बढ़ना चाहिए।


⭐ महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्या हैं?

उत्तर:


अंतर्राष्ट्रीय संगठन वे संस्थाएँ हैं जिनकी स्थापना कई देशों द्वारा साझा उद्देश्यों और समस्याओं के 

समाधान के लिए की जाती है। इनका उद्देश्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, शांति स्थापित करना और 

अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करना है।



प्रश्न 2. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई?

उत्तर:


संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई।


प्रश्न 3. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना क्यों की गई?

उत्तर:


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व में शांति और सुरक्षा स्थापित करने, देशों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा 

भविष्य में बड़े युद्धों को रोकने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई।


प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग कौन-से हैं?

उत्तर:

  1. महासभा
  2. सुरक्षा परिषद
  3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद
  4. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
  5. सचिवालय
  6. न्यास परिषद

प्रश्न 5. सुरक्षा परिषद में कितने सदस्य होते हैं?

उत्तर:

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं—

5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य।


प्रश्न 6. सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य कौन हैं?

उत्तर:

  1. अमेरिका
  2. रूस
  3. चीन
  4. ब्रिटेन
  5. फ्रांस

इन्हें P5 कहा जाता है।


प्रश्न 7. वीटो शक्ति क्या है?

उत्तर:

सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों को प्राप्त वह विशेष अधिकार जिसके द्वारा वे किसी महत्वपूर्ण 

प्रस्ताव को रोक सकते हैं, वीटो शक्ति कहलाती है।


प्रश्न 8. सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर:


संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शक्ति व्यवस्था को 

दर्शाती है। आज विश्व में राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का वितरण बदल चुका है। एशिया, अफ्रीका 

और लैटिन अमेरिका के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसलिए सुरक्षा परिषद में सुधार 

आवश्यक है।


प्रश्न 9. भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता क्यों चाहता है?

उत्तर:

भारत की दावेदारी के प्रमुख आधार हैं—

  1. भारत की विशाल जनसंख्या।
  2. भारत का लोकतांत्रिक स्वरूप।
  3. भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति।
  4. संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में भारत का योगदान।
  5. संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका।
  6. विकासशील देशों के हितों की आवाज उठाने में भारत की भूमिका।

प्रश्न 10. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में क्या योगदान दिया है?

उत्तर:


भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न कार्यक्रमों और शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत ने 

कई देशों में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैनिक भेजे हैं। भारत ने विकासशील देशों की 

समस्याओं और उनके हितों को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है।


प्रश्न 11. क्या संयुक्त राष्ट्र विश्व सरकार है?

उत्तर:


नहीं।

संयुक्त राष्ट्र विश्व सरकार नहीं है। इसके पास दुनिया के सभी देशों पर सीधे शासन करने की 

शक्ति नहीं है। यह देशों के बीच बातचीत, सहयोग और सामूहिक निर्णय के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच 

है।


प्रश्न 12. संयुक्त राष्ट्र की दो प्रमुख उपलब्धियाँ लिखिए।

उत्तर:

  1. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए शांति अभियानों का संचालन।
  2. मानवाधिकार, स्वास्थ्य, विकास और शरणार्थी सहायता जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

प्रश्न 13. संयुक्त राष्ट्र की दो सीमाएँ बताइए।

उत्तर:

  1. सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों को वीटो शक्ति प्राप्त है।
  2. शक्तिशाली देशों के बीच मतभेद होने पर संयुक्त राष्ट्र कई मामलों में प्रभावी निर्णय नहीं ले पाता।

⭐ 4 अंकों का महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न: संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता के चार कारण लिखिए।

उत्तर:

  1. वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के समय की शक्ति व्यवस्था को दर्शाती है।
  2. एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
  3. भारत, जापान और जर्मनी जैसे महत्वपूर्ण देशों को स्थायी सदस्यता प्राप्त नहीं है।
  4. विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता है।

⭐ 6 अंकों का महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न: भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता क्यों मिलनी चाहिए? तर्क दीजिए।

उत्तर:

भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता देने के पक्ष में कई मजबूत तर्क हैं।

पहला, भारत विश्व की बड़ी जनसंख्या वाला देश है।

दूसरा, भारत विश्व का एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देश है।

तीसरा, भारत की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव लगातार बढ़ा है।

चौथा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पाँचवाँ, भारत विकासशील देशों की समस्याओं और हितों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।

छठा, वर्तमान सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों और विशेष रूप से एशिया का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

निष्कर्ष:
भारत की बढ़ती आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक भूमिका को देखते हुए सुरक्षा परिषद में भारत 

की स्थायी सदस्यता से संयुक्त राष्ट्र अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और लोकतांत्रिक बन सकता है।


⭐ 6 अंकों का दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न: संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों और सीमाओं की चर्चा कीजिए।

उपलब्धियाँ

-अंतरराष्ट्रीय शांति के प्रयास।

-शांति अभियानों का संचालन।

-मानवाधिकारों को बढ़ावा।

-स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग।

-शरणार्थियों की सहायता।

-अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मंच।

सीमाएँ

-वीटो शक्ति के कारण निर्णयों में बाधा।

-शक्तिशाली देशों के मतभेद।

-सुरक्षा परिषद की पुरानी संरचना।

-संयुक्त राष्ट्र की अपनी स्वतंत्र शक्ति सीमित होना।

निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्र की कमियाँ होने के बावजूद यह विश्व राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है। इसे समाप्त 

करने के बजाय सुधार कर अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाना अधिक उचित है।


📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अंतर

महासभा और सुरक्षा परिषद

महासभासुरक्षा परिषद
सभी सदस्य देश शामिल15 सदस्य
प्रत्येक सदस्य देश का प्रतिनिधित्व5 स्थायी + 10 अस्थायी
सामान्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चाशांति और सुरक्षा पर विशेष अधिकार
सभी देशों को समान मतदान अधिकार        स्थायी सदस्यों के पास वीटो
व्यापक प्रतिनिधित्वअधिक शक्तिशाली निर्णयकारी भूमिका

🧠 एक नजर में पूरा अध्याय

अंतर्राष्ट्रीय संगठन

देशों के बीच सहयोग

संयुक्त राष्ट्र — 1945

विश्व शांति और सुरक्षा

सुरक्षा परिषद — 15 सदस्य

P5 — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस

वीटो शक्ति

सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग

विकासशील देशों का अधिक प्रतिनिधित्व

भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी


🔥 बोर्ड परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न

इन प्रश्नों को विशेष रूप से तैयार करें:

  1. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता क्यों है?
  2. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब और क्यों हुई?
  3. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों का वर्णन कीजिए।
  4. सुरक्षा परिषद की संरचना समझाइए।
  5. वीटो शक्ति क्या है?
  6. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता क्यों है?
  7. भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का दावेदार क्यों है?
  8. संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियाँ और सीमाएँ लिखिए।
  9. क्या संयुक्त राष्ट्र को विश्व सरकार कहा जा सकता है?
  10. सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व क्यों बढ़ाया जाना चाहिए?
  11. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में क्या योगदान दिया है?
  12. संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या सुधार आवश्यक हैं?

📚 याद रखने की सबसे जरूरी तारीखें

1945 → संयुक्त राष्ट्र की स्थापना
24 अक्टूबर 1945 → संयुक्त राष्ट्र दिवस
P5 → 5 स्थायी सदस्य
15 → सुरक्षा परिषद के कुल सदस्य
10 → अस्थायी सदस्य
2 वर्ष → अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल