समकालीन विश्व राजनीति (पोलिटिकल साइंस)
(हिंदी माध्यम ) (अध्याय 2)
समकालीन विश्व राजनीति (कक्षा 12) – आसान हिंदी में
अध्याय 1: शीत युद्ध का दौर (Cold War)
शीत युद्ध क्या था?
द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) खत्म होने के बाद दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश बन गए—
-अमेरिका (USA)-सोवियत संघ (USSR)
दोनों देशों की सोच अलग थी।
-अमेरिका चाहता था कि दुनिया में पूंजीवाद (Capitalism) फैले, जहाँ लोग निजी व्यापार और-सोवियत संघ चाहता था कि समाजवाद (Socialism) फैले, जहाँ सरकार का नियंत्रण अधिक हो और
दोनों देशों के बीच विचारों की लड़ाई शुरू हो गई।
2. शीत युद्ध क्या था?
शीत युद्ध ऐसा संघर्ष था जिसमें दोनों महाशक्तियाँ सीधे युद्ध नहीं लड़ती थीं, बल्कि दूसरे देशों,
हथियारों, विज्ञान, अंतरिक्ष और राजनीति के माध्यम से एक-दूसरे पर दबाव बनाती थीं।
इसे "शीत" इसलिए कहा गया क्योंकि बंदूकें कम चलीं, लेकिन तनाव लगातार बना रहा।
इसे "शीत युद्ध" क्यों कहा गया?
"शीत" यानी ठंडा।
इस युद्ध में अमेरिका और सोवियत संघ ने एक-दूसरे पर सीधे हमला नहीं किया।
उन्होंने एक-दूसरे को डराने के लिए—
-दूसरे देशों की मदद की,
-जासूसी की,
-विज्ञान और अंतरिक्ष में मुकाबला किया।
यानी लड़ाई चलती रही, लेकिन दोनों सीधे युद्ध नहीं लड़े।
पूरी दुनिया दो हिस्सों में बंट गई:-
-कई देश अमेरिका के साथ हो गए।
-कई देश सोवियत संघ के साथ चले गए।
-इस कारण दुनिया दो बड़े गुटों में बंट गई।
नाटो (NATO):
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य संगठन बनाया।
यदि किसी एक सदस्य पर हमला होगा, तो सभी सदस्य उसकी रक्षा करेंगे।
वारसा संधि:
सोवियत संघ ने भी अपने मित्र देशों के साथ सैन्य गठबंधन बनाया।
इसका उद्देश्य NATO का मुकाबला करना था।
परमाणु हथियारों की दौड़:
-दोनों देशों (रूस और अमेरिका ) ने हजारों परमाणु बम बनाए।
-दोनों जानते थे कि यदि युद्ध हुआ, तो दोनों का भारी नुकसान होगा।
-इसी कारण उन्होंने सीधे युद्ध से बचने की कोशिश की।
भारत ने क्या किया?
भारत ने किसी एक पक्ष का साथ नहीं चुना।
भारत ने कहा—
"हम अपनी विदेश नीति खुद तय करेंगे।"
इसी सोच से गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement – NAM) शुरू हुआ।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का मतलब:
भारत, मिस्र, यूगोस्लाविया, इंडोनेशिया और घाना जैसे देशों ने मिलकर कहा—
"हम अमेरिका या सोवियत संघ किसी के गुलाम नहीं बनेंगे।"
यानी दोनों से दोस्ती रखेंगे, लेकिन फैसला अपना करेंगे।
भारत, मिस्र, यूगोस्लाविया, इंडोनेशिया और घाना जैसे देशों ने मिलकर यह आंदोलन शुरू किया।
इसका उद्देश्य था—
-स्वतंत्र विदेश नीति
-शांति
-उपनिवेशवाद का विरोध
-सभी देशों से मित्रता
शीत युद्ध का अंत कैसे हुआ?
1991 में सोवियत संघ टूट गया।
इसके बाद अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन गया।
यहीं से शीत युद्ध समाप्त माना जाता है।
परीक्षा में याद रखने योग्य बातें :
✔ शीत युद्ध = बिना सीधे युद्ध के तनाव।
✔ दो महाशक्ति = अमेरिका और सोवियत संघ।
✔ भारत = गुटनिरपेक्ष नीति।
✔ शीत युद्ध समाप्त = 1991।
महत्वपूर्ण तथ्य :
✅ शीत युद्ध लगभग 1945 से 1991 तक चला।
✅ मुख्य देश—अमेरिका और सोवियत संघ।
✅ भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई।
✅ 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ।
अध्याय 1: शीत युद्ध का दौर
प्रश्न 1. शीत युद्ध क्या था?
उत्तर:
शीत युद्ध अमेरिका और सोवियत संघ के बीच लगभग 1945 से 1991 तक चला वैचारिक और
राजनीतिक संघर्ष था। इसमें दोनों देशों ने सीधे युद्ध नहीं किया, बल्कि हथियारों की दौड़, दूसरे देशों
को समर्थन और राजनीतिक दबाव के माध्यम से एक-दूसरे का मुकाबला किया।
प्रश्न 2. शीत युद्ध को "शीत" क्यों कहा गया?
उत्तर:
इसे शीत युद्ध इसलिए कहा गया क्योंकि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच सीधे युद्ध नहीं हुआ।
दोनों एक-दूसरे को परमाणु हथियारों और सैन्य शक्ति से डराते रहे, लेकिन आमने-सामने नहीं लड़े।
प्रश्न 3. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) क्या है?
उत्तर:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन उन देशों का समूह था जिन्होंने शीत युद्ध के समय अमेरिका और सोवियत संघ में
से किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई। भारत इसके प्रमुख
संस्थापक देशों में था।
प्रश्न 4. भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति क्यों अपनाई?
उत्तर:
भारत स्वतंत्र निर्णय लेना चाहता था। वह किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं रहना चाहता था और सभी
देशों से मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता था।
प्रश्न 5. सोवियत संघ के विघटन का विश्व राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद शीत युद्ध समाप्त हो गया। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी
महाशक्ति बन गया और विश्व राजनीति में एकध्रुवीय व्यवस्था उभरकर सामने आई।
